राजनीति से दूर रहकर धार्मिक दायित्वों का निर्वहन करें मौलवी और धर्मगुरू : ख्वाजा शफाअत हुसैन
| -Ali Askari Naqvi - Jul 1 2018 2:49PM

अधिवक्ता ख्वाजा शफाअत हुसैन

अंबेडकरनगर। कथित धर्मगुरुओं की राजनीतिक सक्रियता तथा अनर्गल बयानबाजी से समुदाय विशेष में आक्रोश है। बताते चलें कि विगत दिवस भाजपा के एमएलसी बुक्कल नवाब ने लखनऊ स्थित एक होटल में आधा दर्जन मौलवियों मौजूदगी में पत्रकार वार्ता करके 90 फीसद शिया समाज के लोगों को अपनी पार्टी का समर्थक होने का दावा किया था।

इस बयान व कथित मौलवियों द्वारा पार्टी का झंडा थाम कर बुक्कल नवाब के कथन की पुष्टि किए जाने से प्रदेश भर के शियाओं में उबाल है। अल-इमाम चैरिटेबल फाउंडेशन के चेयरमैन अधिवक्ता ख्वाजा शफाअत हुसैन ने उक्त बयान और मौलवियों के आचरण की कटु निंदा की है। उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है जहां प्रत्येक व्यक्ति को अपने विवेक से किसी भी राजनितिक दल का समर्थन अथवा मत देने का पूर्ण अधिकार है।

किसी धर्म, समुदाय का रुझान दल विशेष की ओर होने का दावा करना केवल मूर्खता का ही परिचायक है। इसके अतिरिक्त धर्मगुरुओं एवं मौलवियों को राजनीति से दूर रहकर अपने धार्मिक उत्तरदायित्व का निर्वहन करना चाहिए। ख्वाजा शफाअत हुसैन ने आगे कहा कि शिया कौम किसी नेता या धर्मगुरु का गुलाम नहीं है। सभी को राजनितिक समझ है, लिहाजा कौम की तरफ से किसी को ठेका लेने की जरूरत नहीं है।



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