अरहर की बुआई का सही समय जुलाई। डा.रवि प्रकाश
| Rainbow News - Jul 2 2018 6:20PM

दलहनी फसलें खाद्यान्‍न फसलों की अपेक्षा अधिक सूखारोधी होती है। इसलिये सूखा ग्रस्‍त क्षेत्रो मे भी इससे अधिक उपज मिलती है। नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौधोगिक विश्व विधालय कुमारगंज, फैजाबाद द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र पाँती, अम्बेडकर नगर के मुख्य वैज्ञानिक डा. रवि प्रकाश मौर्य ने किसान भाईयो को बताया कि खरीफ की दलहनी फसलों में अरहर प्रमुख है।

उन्‍नत तकनीक से अरहर का उत्‍पादन दो गुना किया जा सकता है। अरहर के लिये बलुई दोमट या दोमट भूमि तथा पी.एच.मान 7-8 के बीच हो। देर से पकने वाली प्रजातियाँ जो 270दिन मे तैयार होती है, की बुआई वर्षा प्रारंभ होने के साथ ही जुलाई माह तक कर देनी चाहिए।  देर से पकने वाली प्रजातियों का 15 किलो ग्राम/हैेक्‍टर बोना चाहिए। कतारों के बीच की दूरी 60 सें.मी. रखना चाहिए। पौध अंतराल 20 से.मी. रखें।

बोने के पूर्व 2 ग्राम थीरम + 1 ग्राम कार्बेन्‍डेजिम फफूदनाशक दवा प्रति किलो ग्राम बीज के हिसाब से उपचारित करें। उपचारित बीज को रायजोबियम कल्‍चर 10 ग्राम प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचारित करें। अरहर की मुख्य प्रजातियाँ अमर, आजाद, नरेन्द्र अरहर-1,नरेन्द्र अरहर-2, पी.डी.ए.-11, मालवीय विकास मालवीय चमत्कार है। जिनकी पकने की अवधि 250-270 दिन है। तथा उपज क्षमता 25-32कु. /हैक्टेयर है।

बुवाई के समय 250 किग्रा.सिगल सुपर फास्फेट या 100 किग्रा डी.ए.पी. व 20 किग्रा गंधक प्रति हेक्‍टर कतारों में बीज के नीचे दिया जाना चाहिए। जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्‍ध हो वहां एक सिंचाई फूल आने प्रारम्भ व दूसरी फलियॉ बनने की अवस्‍था पर करने से पैदावार अच्‍छी होती है।

खरपतवार नियंत्रण के लिए बुआई के  20-25 दिन में पहली निंराई तथा फूल आने से पूर्व दूसरी निंराई करें। या  पेन्‍डीमेथीलिन 2.50-3.00 लीटर को1000लीटर पानीमे घोलकर बुआई  के तुरन्त बाद प्रयोग करने से खरपतवार नियंत्रण होता है। अरहर की फसल के साथ-साथ सहफसल के रुप मे तिल, बाजरा, ऊर्द एवं मूँग की भी फसल ले सकते है।

अंतरवर्तीय फसल पद्धति से मुख्‍य फसल को पूर्ण पैदावार एवं अंतरवर्तीय फसल से अतिरिक्‍त पैदावार प्राप्‍त होगी। मुख्‍य फसल में कीटों का प्रकोप होने पर या किसी समय में मौसम की प्रतिकूलता होने पर किसी न किसी फसल से सुनिश्चित लाभ होगा।



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