मजलिस-ए-हुसैन मात्र कर्बला का जिक्र नहीं बल्कि....... मौलाना लोरपुरी
| -Ali Askari Naqvi - Jul 7 2018 2:17PM

अंबेडकरनगर। मजलिस-ए-हुसैन मात्र कर्बला का जिक्र नहीं बल्कि मानव मूल्यों का महत्व व सामाजिक, सांस्कृतिक पहलुओं को परखने का केंद्र भी है। यह बात मौलाना शब्बर हुसैन खान लोरपुरी ने अकबरपुर विकास खंड के मौजा कालेपुर इमामबारगाह में पूर्व प्रधान तफसीर हुसैन जैदी द्वारा आयोजित फातिहे की मजलिस को पढ़ते हुए कही।

उन्होंने आगे कहाकि आज जिस गति से समाज का पतन हो रहा है वह अत्यधिक चिंतनीय है। ऐसे में हम सब को पैगंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब और मौलाए कायनात हजरत अली इब्ने अबी तालिब अलैहिस्सलाम की सीरत पर अमल करने की सख्त जरूरत है।

हजरत अली का संक्षिप्त शासनकाल इस्लामी इतिहास सुनहरा पहलू है। वह हाकिम बनकर जब कूफा राज्य में दाखिल हुए तो फर्माया था, ऐ लोगों मैं अपने शरीर पर जो वस्त्र पहन कर और जिस सवारी पर सवार होकर तुम्हारे नगर में दाखिल हुआ हूं अगर वापस जाते हुए इसके अलावा मेरे पास कोई और चीज हो तो जान लेना कि मैंने अमानत में खयानत की है।

मौलाए कायनात के कर्म व उपदेश से आज के हुक्मरां सबक सीख सकते हैं। उनके विचार सदा की भांति आज भी प्रसांगिक है और कल भी रहेंगे। अहलेबैत के विचारों को आत्मसात कर हम जमाने के सामने आदर्श प्रस्तुत कर सकते हैं।

अंत में उन्होंने युवाओं को इंगित करते हुए कहाकि भविष्य की बागडोर तुम्हारे हाथ में है, लिहाजा अभी से लक्ष्य पर गहरी दृष्टि रखना होगी जिससे तुम्हारे संग राष्ट तथा समाज का भी भला हो सके।

उक्त अवसर पर मौलाना जफर अली, मौलाना जमीर अब्बास, सैयद तौकीर हुसैन, नज्जन, सोनू, इरफान, फरहत अब्बास, महताब रजा, दिलावर, मेहदी हसन सहित तमाम लोग मौजूद थे।



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