सिंडिकेट बैंक अकबरपुर: प्रबन्धक व दूसरे अधिकारियों के रवैय्ये से ऋण आवेदक सकते में, हुआ डिप्रेस
| Rainbow News - Jul 7 2018 3:09PM

शाखा प्रबन्धक ने प्रशिक्षण, शादी व हनीमून के लम्बे अवकाश की वजह से ऋण आवेदक की पत्रावली को किया निरस्त......?

अम्बेडकरनगर जनपद में संचालित अनेकों वाणिज्यिक बैंकों की शाखाओं में कार्यरत बैंक कर्मी इतने स्वच्छन्द एवं बेलगाम हो गए हैं कि ग्राहक इनसे और इनके रवैय्ये से तंग आ चुके हैं। यदि समय रहते ये लोग अपना रवैय्या (बैंक कार्यशैली) नहीं बदलेंगे तो वह दिन दूर नहीं जब बैंकों के ग्राहक आन्दोलित होने के लिए विवश हो जाएँगे। यही नहीं यदि बैंक प्रबन्धक और महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने वाले बैंक अधिकारी/कर्मी ग्राहकों के भोलेपन व शराफत का बेजा फायदा उठाते हुए उनके बैंक खातों की स्टेटस सार्वजनिक कर उन्हें डिमॉरलाइज करना बन्द नहीं करेंगे तो सम्मान के रक्षार्थ ग्राहक आत्महत्या तक कर सकते हैं।

लोन के लिए बैंकों का चक्कर लगाना और महीने दो महीने उपरान्त बैंक अधिकारियों द्वारा यह कहा जाना कि ‘‘तुम अपात्र हो, बैंक अपना पैसा वापस वसूल नहीं पाएगी, तुम्हारा धन्धा चल नहीं पाएगा, न ही तुम्हें सम्बन्धित व्यवसाय में कोई अनुभव ही है ऐसी स्थिति में हमारा बैंक/बैंक शाखा तुम्हें ऋण नहीं दे पाएगी’’ अवश्य ही सदमा देने वाला व आश्चर्यजनक है। जी हाँ- कुछ ऐसे ही मामले अम्बेडकरनगर जनपद मुख्यालय अकबरपुर/शहजादपुर उपनगरों में प्रकाश मे आए हैं और चर्चा का विषय बने हुए हैं। आश्चर्य तो तब होता है जब ऋण पत्रावली बनने के शुरूआती दिनों से और इस तरह का सपाट उत्तर देने की अवधि में महीनों बीत जाते हैं।

शुरू-शुरू में तरह-तरह की बातें करके ये बैंक अधिकारी ऋण आवेदकों कोे आश्वस्त करते रहते हैं कि उन्हें व्यवसाय से सम्बन्धित सभी औपचारिकताएँ पूरी करने के उपरान्त बैंक ऋण अवश्य देगा। महीनों की गणेश परिक्रमा उपरान्त ऋण आवेदक की पत्रावली पर उनके द्वारा यह टिप्पणी लगाई जाती है कि आवेदक का प्रोजेक्ट सम्भव नहीं है, उसका सिबिल स्कोर अच्छा नहीं है और न ही सम्बन्धित व्यवसाय के लिए उपयुक्त प्रशिक्षिण व अनुभव है। इस तरह की टिप्पणी लगाकर ऋण आवेदक की पत्रावली ठण्डे बस्ते में डाल दी जाती है। कुछेक ऐसे मामले भी प्रकाश में आए हैं और बेहद चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिनमें बैंकों के पुराने ग्राहकों ने ऋण हेतु आवेदन किया हुआ होता है उनके साथ भी ऐसा ही कुछ बैंक अधिकारियों द्वारा किया जाता है और उनकी पत्रावली पर यह लिखा जाता है कि आवेदक ने हमारी शाखा से पहले ही ऋण ले रखा है परन्तु इनका कोई अच्छा रिकार्ड नहीं है। इनके खाते में ऋण किश्तों का पैसा ससमय नहीं जमा किया जाता।

उपरोक्त टिप्पणियों को नकारते हुए अकबरपुर अम्बेडकरनगर के निवासी संजय मौर्य पुत्र अरविन्द मौर्य ने अकबरपुर की सिंडिकेट बैंक शाखा के प्रबन्धक व फील्ड आफिसर पर आरोप लगाया है कि उनसे अपेक्षित सुविधा-शुल्क न मिल पाने की दशा में इन बैंक अधिकारियों ने ऐसा कुछ किया है जिससे उन्हें घोर आश्चर्य हो रहा है साथ हतोत्साहित व डिमॉरलाइज होने की वजह से वह सकते में है। संजय मौर्य युवा पत्रकार और ‘अयोध्या की पुकार’ नामक हिन्दी समाचार-पत्र के सम्पादक हैं। इनके अनुसार इन्होंने डूडा अम्बेडकरनगर से पं. दीन दयाल अन्त्योदय योजना के तहत व्यावसयिक ऋण के लिए मई 2018 में आवेदन किया था। डूडा कार्यालय से उक्त योजना के तहत उन्हें व उनके साझीदार धीरेन्द्र कुमार पुत्र राम हित को (पिहू फूड प्रोडक्ट्स गौसपुर, अकबरपुर, अम्बेडकरनगर) नमकीन निर्माण फैक्ट्री के लिए 3 लाख रूपए ऋण दिए जाने हेतु अपनी संस्तुति देते हुए सिंडीकेट बैंक अकबरपुर को पत्रावली मई माह 2018 में ही भेज दिया था। परन्तु काफी चक्कर लगवाने के उपरान्त बैंक प्रबन्धक ने ऋण देने में अपनी असमर्थता जताते हुए सॉरी कह दिया, साथ ही ऋण पत्रावली डूडा अम्बेडकरनगर को वापस कर दिया।

ऋण आवेदक संजय मौर्य

संजय मौर्य का कहना है कि बैंक के इस रवैय्ये से उन्हें काफी आघात लगा है जबकि उक्त बैंक के शाखा प्रबन्धक शिशिर राय ने उन्हें आश्वस्त किया था कि डूडा से ऋण पत्रावली भेजवाओ ऋण अवश्य ही मंजूर होगा। संजय मौर्य ने बताया कि उन्होंने नवम्बर 2016 में 7 लाख रूपए का ऋण सिन्डीकेट बैंक से लिया था और उक्त ऋण का सदुपयोग एक बोलेरो लेकर किया। इस ऋण को प्राप्त करने के लिए उन्होंने बैंक के नियमानुसार 50 हजार का एक फिक्स्ड डिपॉजिट यानि एफ.डी. कराया और प्रतिमाह आने वाली लगभग 11 हजार 5 सौ रूपए की मासिक किश्त की अदायगी नियमित रूप से करते आ रहे हैं। चूँकि वह पुराना बैंक ग्राहक है इसलिए शिशिर राय द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद ही डूडा से उक्त योजना के तहत नमकीन निर्माण फैक्ट्री हेतु ऋण पत्रावली संस्तुति के साथ भेजवाया था। परन्तु जून माह के मध्य में शिशिर राय के स्थान पर वन्दना यादव नामक महिला बैंक प्रबन्धक की तैनाती सिन्डीकेट बैंक की अकबरपुर शाखा में हुआ।

बैंक का चक्कर लगाने वाले संजय मौर्य ने जब अपने ऋण हेतु शिशिर राय से बात किया तो उन्होंने कोरा जवाब दिया कि अब वह इस बैंक शाखा के प्रबन्धक नहीं हैं। उनका पद परिवर्तित कर दिया गया है। हालांकि उनकी तैनाती इसी शाखा में हैं लेकिन अधिकार न होने की वजह से वह इस मामले में कुछ नहीं कर सकते हैं। अब तुम नए प्रबन्धक से मिलकर ऋण के लिए याचना करो। इसी बीच जब संजय मौर्य नवागत शाखा प्रबन्धक वन्दना यादव से मिला तब उन्होंने उत्तर दिया कि वह अभी इस बैंक शाखा की स्टडी कर रही हैं। समय लगेगा। इसके उपरान्त वह प्रशिक्षण हेतु अवकाश पर जाएँगी तदुपरान्त उनकी स्वयं की शादी है जिसके लिए लम्बा अवकाश लेंगी........आदि......आदि........आदि.......। कहकर उन्होंने बड़े बेरूखे अन्दाज से उसे परोक्ष रूप से बाहर का रास्ता दिखा दिया। साथ ही वन्दना यादव के कहने पर जी.एस.टी. पंजीयन, उद्योग रजिस्ट्रेशन प्रमाण-पत्र आदि कई कागज बनवाकर फाइल में संलग्न करने को कहा। जिसे हर सम्भव प्रयासर कर यथा शीघ्र संजय मौर्य ने उपलब्ध कराया और नवागत शाखा प्रबन्धक वन्दना यादव को अवगत कराया। उन्होंने ऋण पत्रावली को एक बैंक अधिकारी/ऋण प्रदाता की तरह बड़ी बारीकी से देखा और अध्ययन किया। साथ ही तत्समय वह संतुष्ट नजर आईं। इससे आवेदक को प्रतीत हुआ कि सिंडीकेट बैंक की नवागत शाखा प्रबन्धक उसकी पत्रावली पर विचार कर उसे उसके व्यवसाय हेतु ऋण अवश्य देंगी।

परन्तु:- दो-चार दिन बाद जब वह (संजय मौर्य) बैंक प्रबन्धक वन्दना यादव की गैर मौजूदगी में पुराने बैंक अधिकारी शिशिर राय से सम्पर्क कर अपनी ऋण पत्रावली पर नवागत शाखा प्रबन्धक का नजरिया जानने का प्रयास किया तो उन्होंने बताया कि तुम्हारी पत्रावली शाखा प्रबन्धक ने रिजेक्ट कर वापस डूडा अम्बेडकरनगर को भेज दिया है। यह कार्य उन्होंने 21 जून 2018 को किया। इतना सुनना था कि ऋण आवेदक और महीनों तक बैंक शाखा का चक्कर लगाने वाला पुराना ग्राहक संजय मौर्य सकते में आ गया। उसे शिशिर राय और नवागत शाखा प्रबन्धक वन्दना यादव से इस तरह के रवैय्ये की अपेक्षा नहीं थी।

वह हताश, निराश डूड अम्बेडकरनगर कार्यालय पहुँचा और अपनी ऋण पत्रावली के बावत जानकारी चाही तो उसे बताया गया कि सिंडीकेट बैंक शाखा अकबरपुर ने उक्त पत्रावली को रिजेक्ट कर दिया है साथ ही शाखा प्रबन्धक ने निम्न टिप्पणियाँ लगाई हैं-

1.    He has already obtained loan in our branch but there is no good track record of account.
2.    His project is not feasible.
3.    His cibil score also is not good.
4.    There is no experience proper training record in this respective field.

कहा जाता है कि डूडा अम्बेडकरनगर द्वारा प्रेषित किसी भी ऋण पत्रावली को सिंडीकेट बैंक ने स्वीकार करने को कौन कहे उस पर गम्भीरता से विचार करना भी गंवारा नहीं समझा। ऐसा बीते 4-5 वर्षों से होता चला आ रहा है। इस बावत संजय मौर्य ने जब सिंडीकेट बैंक के पूर्व शाखा प्रबन्धक शिशिर राय से बात किया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि डूडा द्वारा सम्प्रेषित ऋण पत्रावलियों के आवेदक 95 प्रतिशत से अधिक असफल व डिफाल्टर होतें हैं इसलिए हमारा बैंक ऐसे आवेदक/ग्राहकों पर विश्वास नहीं करता। उक्त बातें शिशिर राय ने तब कहीं जब ऋण पत्रावली बैंक शाखा में विचाराधीन थी, बावजूद इसके उन्होंने पत्रकार मौर्य को आश्वस्त किया था कि तुम हमारी बैंक शाखा के पुराने ग्राहक हो। तुम्हारा ऋण स्वीकृत कर लिया जाएगा।

अब जबकि सिंडीकेट बैंक शाखा अकबरपुर, अम्बेडकरनगर के प्रबन्धक के पद पर वन्दना यादव की तैनाती हुई है और उन्होंने आवेदक संजय मौर्य की पत्रावली ऋण स्वीकृति के बजाए निरस्त करते हुए डूड अम्बेडकरनगर को पुनः वापस कर दिया है तब ये बैंक अधिकारी अब सीधे मुँह संजय मौर्य से बात करना भी गवारा नहीं समझ रहे हैं। ऐसा आवेदक संजय मौर्य का कहना है। उनका यह भी कहना है कि शाखा प्रबन्धक वन्दना यादव ने प्रशिक्षण, शादी व हनीमून के लम्बे अवकाश की वजह से उनकी ऋण आवेदन पत्रावली को निरस्त किया है।

डूडा अम्बेडकरनगर और सिंडीकेट बैंक अकबरपुर शाखा के बीच क्या रिश्ते हैं यह तो पता नहीं परन्तु इस ऋण पत्रावली की वापसी से यह स्पष्ट होता है कि डूडा और सिंडीकेट बैंक शाखा अकबरपुर में आपसी सामंजस्य का अभाव है, जिसका खामियाजा ऋण आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है।

ऋण आवेदक संजय मौर्य का दावा है कि उन्होंने डूडा और बैंक द्वारा वांछित समस्त औपचारिकताओं को पूरा किया है। पत्रावली में सभी अभिलेख संलग्न हैं यदि तटस्थ एजेन्सी से जाँच कराई जाए तो सच्चाई अपने आप सामने आ जाएगी। कुछ भी हो इस समय संजय मौर्य मानसिक रूप से अपसेट और डिप्रेस हो चुका है। उन्हें बैंक प्रबन्धक एवं अन्य बैंक के कर्मचारियों के रवैय्या से काफी आघात लगा है।



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