विकास के लिए जनसंख्या दर को कम करना होगा
| -Lal Bihari Lal - Jul 11 2018 12:06PM

सन 1987 में विश्व की जनसंख्या 5 अरब को पार गईतभी से सारी दुनिया में जनसंख्या रोकने के लिए जागरुकता की शुरुआत के क्रम में1987 से हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाते हैं। आज सारी दुनिया की 90% आबादी इसके 10% भाग में निवास करती है। विश्व की आबादी कही 11-50/वर्ग कि.मी. है तो कही200 वर्ग कि.मी.है।जनसंख्या वृद्धि के कई कारण है जो जनसंख्या वृद्धि को प्रभावितकरते हैं।उनमें भौगोलिक, आर्थिक एवं सामाजिक तथा सांस्कृतिक कारक प्रमुख है। भोगोलिक कारकों में मुख्य रुप से मीठे एवं सुलभजल की उलब्धता, समतल एवं सपाट भूआकृति, अनुकुलजलवायु ,फसल युक्त उपजाऊ मिट्टी आदी प्रमुख है।

आर्थिक कारकों में खनिज तत्व की उपलब्धता के कारणऔद्योगिकरण तथा इसके फलस्वरुप शहरीकरण क्योंकि आधुनिक युग में स्वास्थ्य ,शिक्षा, परिवहन,बिजली तथा पानी आदी की समुचित उपलब्धता केकारण औद्योगिक कल-कारखाने में काम करने के लिए कर्मचारियो की जरुरत को कारण यहा कीआबादी सघन होते जा रही है। इसके अलावे भी सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवेश उतरदायीहै। उक्त कारकों के अलावे जनसंख्या वृद्दिदर भी आज काफी है।पृथ्वी पर जनसंख्या आज 600 करोड़ से भी ज्यादा है। इस आकार तक जनसंख्या को पहूँचने में शताब्दियां लगी है। आरंभिक कालों में विश्व की जनसंख्या धीरे-धीरे बढ़ी।

विगत कुछ सौ बर्षों के दौरान ही जनसंख्या आश्चर्य दर से बढ़ी है। पहली शताब्दी मेंजनसंख्या 30 करोड़ से कम थी। 16वी. एवं 17वी शताब्दी में औद्योगिक क्रांति के बादतीब्र गति से जनसंख्या की वृद्दि हुई और सन 1750 तक 55 करोड़ हो गई। सन 1804 में 1अरब,1927 में 2 अरब ,1960 में 3 अरब,1974 में 4 अरब तथा 1087 में 5 अरब हो गई। विगत500वर्षों में प्रारंभिक एक करोड़ की जनसंख्या होने में 10 लाख से भी अधिक वर्षलगे परन्तु 5 अरब से 6 अरब होने में 1987 से 12 अक्टूबर 1999 तक मात्र 12 साल लगे। इसी तरह 31अक्टूबर 2011 को 7 अरब हो गई। आज विश्व की जनसंख्या मार्च 2016 तक 7 अरब 40 करोड के आस पास थी। परन्तु 8 जुलाई 2016 को संध्या 5 बजे तक विश्व की जनसंख्या7,43,48,56,776 थी।

भारत आज 120(1,35,25,51,891) करोड़ से अधिक आबादी के साथ चीन (1अरब 45करोड़) के बाददूसरे नंबर पर है अगर इसी रफ्तार से भारत की जनसंख्या बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब भारत 2025 में चीन को पीछा छोड़कर आबादी के मामलों में सारी दुनियामें नंबर वन हो जायेगा। चिंता की बात हैकि जहां 1951 में हिंदूओं की प्रतिशत संख्या लगभग 85 थी जो 2011 में 80 प्रतिशत केआस पास रह गई जबकि 1951 में मुस्लिमों की आबादी लगभग 10 प्रतिशत थी तो 2011 मेंलगभग 15 प्रतिशत हो गई। जबकि भूमि के मामले में भारत विश्व का 2.5% है और आबादी लगभग 17-18 % है।

इस जनसंख्या विस्फोट से समाजिक ढ़ाचापरिवहन,शिक्षा स्वास्थ्य, बिजली, पानी आदी की मात्रा सीमित है जो समस्या बनेगी।इससे प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ेगा और अनेक समस्याय़े खड़ी हो जायेगी। जिससेदेश में सामाजिक ढाचा छिन्न-भिन्न(असहज) होने की संभावना बढ़ेगी। अतः आज जनसंख्यारोकने के लिए। सबको शिक्षा होनी चाहिये जिससे इसे कम करने में मदद मिलेगी शिक्षा केसाथ-साथ जागरुकता की सख्त जरुरत है ताकि देश उनन्ति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ सके।

(लेखक लाल बिहारी लाल स्वतंत्र पत्रकार एवं लाल कला मंच के सचिव है)



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