जेण्डर न्याय व परिवार नियोजन में पुरूषों भूमिका महत्वपूर्ण
| Rainbow News - Jul 12 2018 12:41PM

11 जुलाई, 2018 को विश्व जनसंख्या दिवस के अवसर पर सरोजनी नगर ब्लाक में अमलतास सामाजिक संस्था के तत्वाधान में सहयोग संस्था के सहयोग से जेण्डर न्याय व परिवार नियोजन में पुरूषों की भागीदारी को लेकर जागरूकता मार्च तथा सम्मेलन का आयोजन किया गया।11 जुलाई को पूरी दुनिया में विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। विश्व जनसंख्या दिवस, विश्व आबादी से जुड़े मुद्दों और जागरुकता को लेकर मनाया जाता है। यूं तो मानव ने हर क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है और यह प्रक्रिया लगातार जारी है।

नए-नए तकनीकी अविष्कार ने मानव जीवन को बिल्कुल बदल कर रख दिया है, लेकिन इस अंधाधुंध विकास के बीच के कई समस्याएं भी चुनौती के रूप में सामने खड़ी हुई हैं। जिसमें बढती जनंसख्या भी एक बडी समस्या है। हलांकि पिछले कई सालों से परिवार नियोजन को लेकर अलग अलग, पर कई सारे प्रयास किये जा रहे हैं, लेकिन अभी भी परिवार नियोजन में सबसे बड़ी चुनौती पुरूषों की भागीदारी है, जो कि किसी भी गर्भ निरोधक संसाधन स्थाई व अस्थाई दोनों के प्रयोग में बहुत ही कम है, पुरूष नसबन्दी केवल 2.75 प्रतिशत है, कण्डोम का प्रयोग भी बहुत कम है। इस प्रकार से परिवार नियोजन का सारा जिम्मा महिलाओं पर हो जाता है और यह उनके स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो जाता है।

उत्तर प्रदेश 3.0 की कुल प्रजनन दर के साथ उच्च प्रजनन दर वाला राज्य भी है। प्रदेश में गर्भावस्था एवं प्रसव से सम्बन्धित जटिलताओं के कारण एक लाख जीवित जन्मों में मातृ मृत्यु दर 258 है, जिसके लिए गुणवत्तापरक परिवार नियोजन सेवाओं का अभाव एक महत्वपूर्ण कारक है। करीब 75 प्रतिशत मौतों को रोका जा सकता है, जहाँ महिलाओं को परिवार नियोजन सेवाओं और आपातकालीन प्रसूति संबंधी देखभाल करके किया जा सकता है। परिवार नियोजन कार्यक्रम में केवल महिलाओं की ही भागीदारी है, पुरूष न के बराबर हैं, चाहे वह पुरूष नसबन्दी (2.75 प्रतिशत) हो अन्य अस्थायी साधन (जैसे  कण्डोम 20 प्रतिशत) हों। 14 प्रतिशत महिलायें अगला बच्चा नहीें चाहती हैं तथा 5 प्रतिशत महिलायें बच्चों के बीच में अन्तर चाहती हैं किन्तु इसके बावजूद उन्हे बच्चा पैदा करना पड़ता है। (तथ्य राज्य स्तर के है) 

इस अवसर पर डा0 वीरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि सरकार परिवार नियोजन सेवाओं की जानकारी, सेवाओं की उपलब्धता एवं परिवार नियोजन सामग्री की आपूर्ति को लेकर लगातार प्रयास कर रही है, किन्तु कहीं न कहीं परिवार नियोजन को लेकर सारा ध्यान महिलाओं पर चला जाता है और पुरूष इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से दूर हो जाते है चाहे, वह समुदाय के हों या स्वयं पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ता। पिछले साल जहाँ 17.3 फसदी महिलाआंे ने नसबन्दी कराई, वहीं पुरूष नसबन्दी 0.1 फीसदी ही रही।

वरिष्ठ समाजसेवी के0के0 शुक्ला ने बताया कि जिले में पिछले एक साल से परिवार नियोजन में पुरूषों की भागीदारी बढाने को लेकर समुदाय व शैक्षणिक संस्थानों के युवाओं के साथ जागरूकता बढाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत जिले में पुरूष समानता के साथी या जेण्डर चैम्पियन के रूप में चिन्हित किया जा रहा है। इस अवसर पर कार्यक्रम में अमित अम्बेडकर, संजय आदि लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन अमलतास के सचिव अजय शर्मा ने किया। कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में मजदूर साथी शामिल हुए।

-अजय शर्मा, मो0 9415868533



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