किसानों के लिए छलावा साबित हो रहा है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
| Santosh Dev Giri - Jul 23 2018 2:44PM

मीरजापुर। जिले के लालगंज और मड़िहान तहसील क्षेत्र में फसल कर्जमाफी योजना का लाभ पाना किसानों के लिए आसान राह नहीं है। सैकड़ों किसान पात्र होते हुए भी लेखपाल व कार्यालयों का चक्कर काट कर थक चुके हैं। किसी को बैंकों ने तो किसी को राजस्व कर्मियों द्वारा अपात्र घोषित कर दिया गया है। कृषि विभाग दिलासा देकर लौटा रहा है। भाजपा सरकार ने यूपी विधानसभा चुनाव के पहले अपने घोषणापत्र में किसानों का कर्ज माफ करने की बात कही थी। चुनाव जीतने के बाद कैबिनेट बैठक में योगी सरकार ने किसानों का ऋण माफ करने का ऐलान किया था। हालांकि कर्ज माफी का लाभ उन्हीं किसानों को मिलना है, जिन्होंने 31 मार्च 2016 से पहले ऋण लिया है। लालगंज में इस अवधि तक  किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड पर खेती के लिए कर्ज लिया था।

फसल ऋण मोचन योजना के तहत फसल कर्ज माफी के लिए चयनित किसानों की बैंकों द्वारा सूची फाइनल करके शासन को भेज दी गई। किसानों की कर्जमाफी की रकम सीधे उनके खातों में पहुंच गई। वहीं, लेखपालों द्वारा पात्र किसानों की कर्जमाफी की जो सूची तैयार की गई हैं, उनमें बहुत से पात्रों को सूची में शामिल नहीं किया गया है। अधिकांश लेखपालों ने स्वहित में अपात्र की रिपोर्ट लगाकर प्रेषित कर दिया। ऐसे लगभग सैकड़ो लोग बैंकों, राजस्व विभाग और कृषि विभाग का चक्कर काट रहे हैं। सूबे की सरकार द्वारा किसानों के कर्जमाफी की घोषणा किए एक साल से अधिक समय बीत गए, अभी तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। सुविधा के लिए सरकार ने पोर्टल पर शिकायतें मांगी। पोर्टल के अलावा भी ढेरों शिकायतें आ रही हैं। बामी गांव निवासी किसान मो. असलम ने वर्ष 2012 में किसान क्रेटिड कार्ड पर लगभग एक लाख रुपये कर्ज खेती के लिए लिया था।

इसी तरह बिरतीया गांव के राजेश यादव ने एक लाख रुपये कर्ज खेती के लिए 2013 में लिया था।जिनका खाता एनपीए है, राजस्व कर्मियों ने रिपोर्ट लगाकर भेज देने की बात कही।बैंक शाखा लहंगपुर में संपर्क करने पर बैंक प्रबंधक ने ब्याज की राशि जमा करने की बात की, बताया की खाता एनपीए है इसलिए आपका कर्ज माफ नहीं हुआ है। इसी तरह और भी किसानो  ने बताया की कृषि विभाग कार्यालय पर संपर्क किया तो वहां राजस्व कर्मियों द्वारा  अपात्र की रिपोर्ट लगाकर भेज दी गई है। किसान ने बताया कि उनके पास निर्धारित सीमा से कम खेत है और उन्होंने तीन साल से एक भी पैसा नहीं जमा किया है। यह तो एक बानगी है। ऐसे सैकड़ो किसान राजस्व व बैंकों की बाजीगरी के चलते परेशान हैं। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी मीरजापुर ने बताया है कि जनपद में पोर्टल के माध्यम से अब तक लगभग 6700 शिकायतें आई हैं। इनमें सभी का निस्तारण कर दिया गया है। जिसमें लगभग अभी कुछ शिकायतें लंबित हैं। इनमें वह किसानों की संख्या अधिक है जिन्होंने आधार कार्ड से खाता को लिंक नहीं कराया है। माह के अंत तक पात्रों के कर्जमाफी की प्रक्रिया पूरा कर लिया जाएगा।

बर्बाद हुई फसलों का नहीं मिला बीमा लाभ, किसान परेशान

मीरजापुर। विकास खण्ड पटेहरा में खरीफ की खेती करना किसानों को चुनौती बन गयी है पिछले सत्र में खरीफ और रबी दोनों फसल इस क्षेत्र की सूख गई थी सभी किसान सोचे थे कि किसान की आय दो गुनी करने हेतु तथा क्षति पूर्ति हेतु केंद्र व प्रदेश की सरकार गम्भीर है जिससे किसान क्रेडिट कार्डो से निर्भीक होकर अच्छी लागत से खेती कर दिया नहर में पानी आया नही परिणाम स्वरूप खरीफ भी गया और रबी भी गयी। तहसील भी आधे अधूरे गांव को सूखा घोषित कर सूखा राहत सामग्री को वितरित कराया किन्तु किसानों को न ही तहसील कुछ मिला और न ही प्रधानमंत्री फसल बीमा से।

वर्तमान खरीफ की खेती एक चुनौती बनकर उभड़ी है। एक ओर सहकारी बैंकों,समितियों के कर्ज का ब्याज 11 प्रतिशत और दस प्रतिशत तावानी ब्याज की चिंता दूसरी तरफ किसान क्रेडिट कार्ड जहाँ उल्टा पल्टी से तीन प्रतिशत ब्याज देय होता था चार प्रतिशत केंद्रीय ब्याज माफ हो जाता था वही खातों के संचालन बन्द यानी भरपाई न हो पाने से 12 प्रतिशत ब्याज देने होंगे उसमे भी यदि बैंक से आरसी जारी हुई तो दस प्रतिशत तावान तहसील को देना होगा बची खुची बच्चो के जीविकोपार्जन का सहारा भी बड़े सेठ साहूकार औने पौने दाम में नीलाम लेकर लोगो को भूमिहीन बनाकर अच्छी कमाई करेगे जिसका लाभ राजस्व बिभाग के लोगो को जेब भरने में होगा। क्या बोले किसान-पटेहरा के जागरूक किसान रमेश प्रताप सिंह का कथन है कि ‘‘फसल बीमा कम्पनी द्वारा जागरूकता रैली निकाल कर किसानों को कृषि बीमा कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

जिसके तहत जिलाधिकारी से आग्रह है कि पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 के खरीफ और रबी में तहसील को सूखा घोषित करने के बाद भी किसी के खाते में बीमा कम्पनी ने क्षति पूर्ति नही भेजी अपितु करोड़ो रूपये का बीमा की धनराशि किसानों के केसीसी से लिये। माला माल हुए ब्यक्तिगत फसल बीमा कराने वाले चतुर किसान जिनके खाते में कम्पनी ने सुविधा शुल्क लेकर पर्याप्त राहत भेजी जबकि उसी गांव के अन्य बीमित किसानों को अधेला भी नही मिला जिससे किसान अब ठगी का शिकार नही होगा‘‘ जांच का विषय है किसानों को सरकार और फसल बीमा कम्पनी तत्काल राहत दे जिससे सरकार की छवि निखरे।



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