ए.आर.टी.ओ. कैलाश नाथ सिंह : शायर, सिंह, सपूत
| Rainbow News - Jul 28 2018 3:22PM

ए.आर.टी.ओ. कैलाश नाथ सिंह

समाज बदलता है- बदला जाता है- शायद हाँ- किन्तु- परन्तु छोड़ा जाए और देखा जाए कि समाज को बदल डालने जैसा उद्देश्य पूर्ण संकल्प लेकर चलने वालों को कितनी सफलता मिलती है...... या अब तक मिली है- ? उन्हें कितना संघर्ष व विरोध झेलना पड़ता है...... फिर भी जो इन सब की परवाह किए बिना सिर्फ अपना कर्म कर रहा हो उसे सफलता तो मिलती ही है।

यह कर्म कौन कर रहा है..........? कितने लोग कर रहे हैं..........? बहुत से ऐसे अपवाद हैं जिनका जिक्र व उनके बारे में एक साथ लिखना काफी लम्बा हो सकता है। फिर भी गीता के श्लोक- ‘‘कर्मणेवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्’’ को अपने मन-मस्तिष्क में संजोकर कर्म करने वाले एक ऐसी शख्सियत के बारे में लिखना चाहेंगे जिसे पढ़कर लोग सनकी अथवा कुछ इसी प्रकार का विशेषण लगाकर उसका नाम ले सकते हैं।

अपने आप यानि स्वयं से संघर्ष करने वालों के बारे में बहुत कम सुना और पढ़ा जाता है- हम आप को एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जो स्वयं से संघर्ष करता है और इसके लिए उसे कितनी मुश्किलों से गुजरना पड़ता है- इसे बेहतर वह ही जानता है। स्वयं से संघर्ष का तात्पर्य यह नहीं कि वह व्यक्ति अपने शरीर (भौतिक) को विभिन्न मुद्राओं में रखते हुए उसे शारीरिक रूप से पीड़ा पहुँचाता है- ऐसा नहीं है- वह संघर्ष करता तो है परन्तु एक ऐसी परम्परा से जो शायद उसे और उसके जैसी सोच वालों को कत्तई पसन्द नहीं।

स्वयं से संघर्ष का सीधा मतलब यह कि एक व्यक्ति अपने संगठन में व्याप्त भ्रष्टाचार, लूट-खसोट व दलाली जैसी परम्परा का विरोध करता है। वह व्यक्ति और उसकी कार्यशैली, संघर्ष की- उस संघर्ष की जो उसके अपने ही महकमें की पुरानी व छवि धूमिल करने वाली रही हो उस परम्परा को तोड़कर पारदर्शिता लाने के लिए संकल्पित है।

पिछले वर्ष से अब तक सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी व उनके महकमें की नकारात्मक खबरें ही सुर्खियों में रहीं। जिज्ञासा जागी तो ए.आर.टी.ओ. के सी.यू.जी. नम्बर पर कॉल किया। काफी प्रयास के बाद उनसे सम्पर्क हो पाया। जो कुछ सुना, जाना, समझा उसी को यहाँ लिपिबद्ध कर पाठकों की अदालत में प्रस्तुत किया जा रहा है।

इसको लिखकर प्रकाशित करने के पूर्व कई शिक्षित मिलने वालों से राय-शुमारी किया था। सभी ने सम्वेत् स्वर में कहा कि जिस व्यक्ति के बारे में बात कर रहे हैं उसका संगठन/विभाग/महकमा अच्छी छवि का नहीं है। सरकारी महकमों में सबसे भ्रष्टतम महकमा माना जाता है, और यह संयोग ही है कि कोई ऐसा व्यक्ति उस महकमें का जिला प्रमुख है जो स्पॉटेड इमेज आफ द डिपार्टमेन्ट को अपने तरीके से कार्य करके धुलकर चमकाने में लगा हुआ है। उन लोगों ने बातों-बातों में यह भी माना कि महकमें का वर्तमान मुखिया अपवाद स्वरूप हो सकता है।

देश के लोकतंत्रीय प्रणाली में लोक संचालन हेतु अनेकानेक विभाग/महकमों का गठन किया गया है- उन्हीं में से एक है- परिवहन- जी हाँ हम आज उत्तर प्रदेश के जनपद अम्बेडकरनगर के परिवहन महकमा के मुखिया के बारे में बताना चाहेंगे कि वह किस तरह से यहाँ अपने महकमें पर लगे भ्रष्टाचार/दलाली रूपी कलंक को धोने में लगे हुए हैं। मीडिया में यह महकमा हमेशा सुर्खियों में बना हुआ है और बहैसियत महकमा प्रमुख ये सब कुछ झेलते हुए अपना कार्य जारी रखे हुए हैं।

परिवहन राजस्व वसूली में फैजाबाद संभाग के तहत आने वाले अम्बेडकरनगर जनपद को शीर्ष पर लाने का श्रेय अवश्य ही वर्तमान ए.आर.टी.ओ. के.एन. सिंह को जाता है। के.एन. सिंह को इस बात का जरा भी रंज नहीं है कि मीडिया बगैर जाँचे-परखे उनके व महकमें से सम्बन्धित खबरों का प्रकाशन कर रहा है। उनका यह मानना है कि मेरी कर्मठता मीडिया की खबरों से और बलवती और ऊर्जावान होती है। मुझे हमारी कमियाँ जिसका स्वयं हमें भान नहीं होता वह जागरूक मीडिया के माध्यम से हमें आसानी से मालूम चल जाता है और हम तद्नुसार विभाग व जनहित में और भी सक्रिय होकर कार्य कर पाते हैं। शायद ऐसा करना ही सरकार के आदेशों का अक्षरशः अनुपालन करना कहा जाएगा।

‘‘लीक-लीक कायर चलैं, लीकहिं चलैं कपूत।
लीक छोड़ि तीनों चलें, शायर, सिंह, सपूत।।

बातों-बातों में यह कहकर अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति की एक झलक दिखाने वाले के.एन. सिंह अम्बेडकरनगर जिले के परिवहन महकमें में ए.आर.टी.ओ. (मुखिया) के पद पर वर्ष-2017 से तैनात हैं। यहाँ ए.आर.टी.ओ. पद पर अपनी तैनाती के तुरन्त बाद से ही के.एन. सिंह ने अपना तेवर दिखाना शुरू किया। परिणाम यह हुआ कि डग्गामार वाहनों की चेकिंग के दौरान इनके नेतृत्व वाले चेकिंग दस्ते पर माफियाओं ने आक्रमण शुरू कर दिया।

परिवहन राजस्व वसूली में फैजाबाद संभाग के तहत आने वाले अम्बेडकरनगर को जनपद शीर्ष पर लाने का श्रेय अवश्य ही वर्तमान ए.आर.टी.ओ. के.एन. सिंह को जाता है। के.एन. सिंह को इस बात का जरा भी रंज नहीं है कि मीडिया बगैर जाँचे-परखे उनके व महकमें से सम्बन्धित खबरों का प्रकाशन कर रहा है। उनका यह मानना है कि मेरी कर्मठता मीडिया की खबरों से और बलवती और ऊर्जावान होती है। मुझे हमारी कमियाँ जिसका स्वयं हमें भान नहीं होता वह जागरूक मीडिया के माध्यम से हमें आसानी से मालूम चल जाता है और हम तद्नुसार विभाग व जनहित में और भी सक्रिय होकर कार्य कर पाते हैं। शायद ऐसा करना ही सरकार के आदेशों का अक्षरशः अनुपालन करना कहा जाएगा।

ए.आर.टी.ओ. कैलाश नाथ सिंह ने वार्ता क्रम में कहा कि अम्बेडकरनगर जिले में छोटी चार पहिया आटो सवारी व माल वाहक वाहनों पर विभागीय राजस्व अपेक्षाकृत ज्यादा बकाया है। यह राशि 5 से 6 करोड़ के लगभग है, जिसकी वसूली के लिए मैं और हमारा विभाग प्रतिबद्ध है। आए दिन चेकिंग की जा रही है और इन वाहनों से सख्ती से पेश आकर राजस्व वसूला जा रहा है। बड़े वाहनों/माल वाहकों के बारे में के.एन. सिंह का कहना है कि उन पर विभागीय राजस्व जो भी बकाया होता है वे समय-समय पर अदा करते रहते हैं। इसलिए इनकी धरपकड़ पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाता है।

विभाग के सचल दस्ते और कार्यालयी स्टाफ के बारे में ए.आर.टी.ओ. के.एन. सिंह ने कहा कि जैसा कमाण्डर होगा फौज उसी के अनुरूप कार्य करेगी। इस समय उनके महकमें का पूरा अमला प्रतिबद्ध होकर अपना कार्य कर रहा है। मुझे स्टाफ के किसी भी कर्मचारी से कोई शिकायत नहीं है। ए.आर.टी.ओ. ने कहा कि बीच-बीच में दलाल, बिचौलियों व भ्रष्टाचार से ओत-प्रोत खबरें प्रकाशित होने के बाद मेरा मन अवश्य ही खिन्न होता है फिर भी मैं अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति की बदौलत महकमें की छवि सुधारने का भरसक प्रयास कर रहा हूँ। मैं मानता हूँ कि परिवहन महकमें का नाम काफी बदनाम होता है इसकी छवि धूमिल होती है फिर भी मैं दुष्यन्त कुमार की इन पंक्तियों-

‘‘कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो’’ को अपनी कार्यशैली का मूलमंत्र मानकर कर्मठता के साथ लगा हुआ हूँ। स्वस्थ लोकतन्त्र है- जन हित हेतु परिवहन महकमें का गठन किया गया है। हम अच्छी धनराशि का वेतन हर माह पाते हैं- यह जनता का पैसा होता है। इसकी एवज में हम, सरकार व विभागीय अपेक्षाओं के अनुरूप ईमानदारी से कार्य करें यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। कौन अच्छा है, कौन बुरा है........इसके बारे में हमें नहीं सोचना है। यह हमारे कार्य, कार्य पद्धति से सभी को अवलोकित होता है।

अवकाश के दिनों में भी........

विभागीय राजस्व वसूली के लिए तत्पर ए.आर.टी.ओ. सिंह और उनका विभागीय कार्यालयी स्टाफ अवकाश के दिनों में भी अन्य कार्य दिवस की भाँति अपने कार्यालय आता और अपने कार्यों का निष्पादन करता है। कार्यालयी कर्मियों के साथ मित्रवत पेश आते हुए ए.आर.टी.ओ. जरूरत पड़ने पर उन्हें अन्य दिनों में अवकाश लेने की बात कहते हैं। अवकाश के दिनों में कार्यालय खुलवाकर कार्य करने के पीछे उनका मकसद लोगों की सुविधा व सहूलियत प्रदान करना है। उनका कहना है कि लोगों को आनलाइन राजस्व जमा करने के लिए आनलाइन कर्ता को अतिरिक्त पैसा देना होता है ऐसे में वे लोग यदि विभागीय कार्यालय आकर अपना राजस्व जमा करेंगे तो वे अतिरिक्त देय से बच जाएँगे।

के.एन. सिंह का मानना है कि ईमानदारी का रास्ता कठिन जरूर होता है लेकिन इससे आत्म संतुष्टि मिलती है। बगैर निद्राकारक दवा के भरपूर नींद आती है, भोजन पचता है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। अच्छी पगार से दैनिक जीवन के खर्चे चल रहे हैं, थोड़ा-बहुत संचित हो जाता है। परिवार का भरण-पोषण हो रहा है। इसके अलावा एक मानव प्राणी को और क्या चाहिए। अच्छी पगार से दैनिक जीवन के खर्चे चल रहे हैं। थोड़ा-बहुत संचित हो जाता है।

"काजल की कोठरी में कैसो ही सयानो जाय एक लीक काजल की लागे है तो लागे है"

इसकी परवाह किए बगैर ए.आर.टी.ओ. के.एन. सिंह बड़ी सूझबूझ के साथ अपना कार्य जारी रखे हुए हैं।



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