मुंशी प्रेमचंद की जयन्ती पर सेमिनार का आयोजन
| Rainbow News - Jul 31 2018 4:44PM

लखनऊ। सर्वहारा लेखक संघ के तत्वावधान में कलम के सिपाही मुंशी प्रेमचंद के 138 वीं जयन्ती के अवसर पर सेमिनार का आयोजन अमीनाबाद इंटर कॉलेज के सभागार में किया गया।कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कथाकार व लेखक डाॅ एस के पंजम ने किया। सेमिनार में बोलते हुए सलेस के सचिव व युवा लेखक वीरेन्द्र त्रिपाठी ने कहा कि हिन्दी साहित्य की चर्चा प्रेमचंद के साहित्य के बगैर अधूरा है।प्रेमचंद ने विदेशी गुलामी की बेड़ियों में जकड़ी आम जनता के दुःख-दर्द व उनकी परेशानियों को अपनी रचनाओं मे वे यथार्थ रूप में लाते है।और प्रेमचंद का साहित्य तत्कालीन समय का इतिहास है।
     मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए शिक्षाविद वालेन्द्र कटियार ने कहा कि प्रेमचन्द की रचनाओं में ऐतिहासिक विकास मिलता है।प्रारम्भिक दौर की रचनाओं में जहां वे सामंती - पारंपरिक मूल्यों  की पड़ताल करते है तो वही दूसरे दौर की रचनाओं में उन पर गांधी जी का प्रभाव नजर आता है तो वही अपने अन्तिम दौर में प्रेमचंद यथार्थवाद की पक्की जमीन पर खड़े नजर आआते है और वे आदर्शवाद केंचुल को छोड़कर समाज के वस्तुनिष्ठ चित्रण की ओर बढ़ते है और सामने आती है पूस की रात व कफ़न जैसी कहानियां। सामाजिक चिंतक ओ पी सिन्हा ने कहा कि प्रेमचन्द की कृतियां भारत के सर्वाधिक विशाल व विस्तृत वर्ग की कृतियां है।प्राचार्य साहब लाल मिश्रा ने भी प्रेमचंद व्यक्तित्व व कृतित्व पर चर्चा की।
     अध्यक्षीय संबोधन में डाॅ एस के पंजम ने कहा कि प्रेमचन्द ने दबे कुचले लोगों की पीड़ा ,सामाजिक विषमता, जात-पांत,छुआछूत ,पुरोहितों के आतंक के खिलाफ बड़ी बेबाकी से कलम चलाया है।प्रेमचंद का पंचपरमेशर से कफ़न तक का सफर लेव तोल्स्तोय से मैक्सिम गोर्की की तरफ की यात्रा है। कार्यक्रम में के के शुक्ल, रामकिशोर, ज्योति सिंह, मन्दाकिनी राय, उदय सिंह, प्रो एस एस जाफरी,साहब लाल मिश्रा, आदि ने भी अपने विचार रखे।

वीरेन्द्र त्रिपाठी, एडवोकेट, सचिव- सलेस, लखनऊ



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