...क़ातिल के घर में जीत का ऐलान कर दिया
| -Ali Askari Naqvi - Aug 1 2018 4:10PM

अंबेडकरनगर। ज़ालिम बादशाह यज़ीद बिन मुआविया के भरे दरबार में बाबा अली-ए-मुर्तुज़ा के लहजे में ललकार कर पैग़ाम दे दिया कि हक़ बात कहने में संकोच होना चाहिये और न ज़ालिम का ख़ौफ़। यह उद्गार झांसी के ज़ाकिर-ए-अहलेबैत मौलाना नवेद आब्दी ने नगर से सटे मौज़ा कालेपुर में पूर्व प्रधान तफ़सीर हुसैन ज़ैदी की वालिदा मरहूमा सय्यदा अहमदी बीबी बिंते सैयद अहमद मरहूम की चालीसवें की मजलिस को संबोधित करते हुए व्यक्त किया।

ज़ोरदार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में जुटे अज़ादारो के बीच मौलाना आब्दी ने कहा कि जनाबे ज़ैनब (स) को शुजाअत अपने बाबा अली (अ) और माँ जनाबे फ़ातिमा ज़हरा (स) से विरसे में मिली थी। जब इमामे सज्जाद (अ) को इब्ने ज़ियाद के दरबार में लाया गया तो इब्ने ज़ियाद आप की हक़ पसंद गुफ़्तगू सुनकर आगबबूला हो गया और फ़ौरन जल्लाद को इमाम के क़त्ल का हुक्म दे दिया। इब्ने ज़ियाद का हुक्म सुन कर जनाबे ज़ैनब (स) बेताब होकर भतीजे से लिपट गईं और कहने लगीं, "ऐ इब्ने ज़ियाद बस कर। बहुत ख़ून बहा चुका। क्या अभी भी तू हमारे ख़ून से सैराब नहीं हुआ। क़सम ख़ुदा की! मैं इससे जुदा नहीं हो सकती।

अगर इसको क़त्ल करना चाहता हो तो पहले मुझे क़त्ल कर।" यह सुनकर दरबारियों में ख़ौफ़ तारी हो गया। सन् 60 हिजरी का इस्लाम वह इस्लाम था जो वास्तविकता से कोसों दूर था, जिसमें बिदअतों का बोलबाला था, इलाही अहकाम को पामाल किया जा रहा था, इस्लाम के हाकिम धोखे और अपनी ताक़त के बल पर लोगों को यह समझाने पर तुले थे कि देखो यही हक़ीक़ी इस्लाम है। और सीधी-सादी बल्कि नासमझी की शिकार अवाम भी उन के झांसे में आकर उनको इस्लाम और अवाम का हक़ीक़ी दर्दमंद समझने लगी थी।

ऐसे माहोल में दीने मोहम्मद (स) के हक़ीक़ी वारिस ने कश्ती-ए-निजात बनकर सदाए हक़ बुलंद की और अपने भरे घर को ख़ुदा की राह में निछावर करके दीने इस्लाम को मौत के मुंह से निकाल लिया। जिससे इस्लाम को एक नई हयात मिली। यज़ीदी भवर में डूबती इस्लाम की कश्ती को हुसैन (अ) और आप के सहाबियों ने बचा तो लिया लेकिन उसे साहिल पर लगाने के लिए ज़ैनब (स) की ज़रूरत थी। ज़ैनब (स) ने ज़िन्दगी के हर मोड़ पर हुसैन (अ) का साथ दिया। हमेशा साए की तरह उन के साथ-साथ रहीं।

अब्बास की बहन की शुजाअत तो देखिये!
क़ातिल के घर में जीत का ऐलान कर दिया!!

मजलिस कार्यक्रम में तौक़ीर हुसैन ज़ैदी, शब्बीर हुसैन ज़ैदी, महताब रज़ा रिज़वी, सैयद यावर जैदी, ख्वाजा शफ़ाअत हुसैन, फ़रहत अब्बास, जाफ़र मूसा, डॉ. मोहम्मद हसन, दिलावर हुसैन, मेहदी हसन, यासिर, रेहान, नज्जन हुसैन सहित अन्य लोग मौजूद थे। आयोजक तफ़सीर हुसैन ने सभी के प्रति कृतज्ञयता जताई।



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