'मेला' को है जगा दिया...
| Dr. Anil Upadhyay 'Mela' - Aug 9 2018 11:58AM

जहां सियासत गंदी होकर,
मानवता पर वार करे!
वह आवाम कहां तक बोलो-
समरसता से प्यार करें?
जहां छिपकली मेंढक चूहे
इक घर में रह लेते हैं,
साठ वर्ष तक अपने बनकर
जो सब कुछ सह लेते हैं,
आधी रात बजा कर घंटा
*उनको देश से दूर करें!
उन्हें विदेशी कह कर के
जीना उनका मजबूर करें!
अब तक क्या इस मुल्क मैं अपने
और नरेश नहीं आए
भारतवासी क्यों जाकर के,
परदेशों में है छाए!
अगर बाहरी तत्व असम में,
एक निवाला खाता था!
दो हाथों से कमा-कमा कर
हिंद की शक्ति बढ़ाता था!
हिंदू-मुस्लिम पाक़ बोल कर
हर इंसान को लड़ा दिया,
काम भले कुछ ना कर पाया,
फिर भी वादा बड़ा किया!
पीडीपी से हाथ मिला कर
काम देश का करते हैं,
उसी पार्टी को फुर्सत में
आतंकी क्यों कहते हैं?
चूरन वाली नोट मंगा कर
जी.एस.टी. तक लगा दिया,
मंहगाई की मार ने शायद,
"मेला" को है जगा दिया...!!



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