कौन खिलावै, डारि पालनौ, पहले किशन कन्हैया कूं...
| Rainbow News - Sep 3 2018 3:35PM

भोर भई, सब लगे बधाई, देने जसुमति मैय्या कूं।
कौन खिलावै, डारि पालनौ, पहले किशन कन्हैया कूं।

भादौं मास की, रात आठवीं, बदरा उमड़ घुमड़ नभ में,
ऐसो बरस्यो मेह, बढि गयो, पानी कालिंदी नद में,
नभ गरज्यो, वसुदेव लै चलौ, तीरे नाग नथैय्या कूं।
कौन खिलावै डारि-------------

कारागार के, खुलि गये तारे, सोय रहे पहरे वारे,
डारि पालनौ, नंदलाला कूं, छोडि राह के भय सारे,
शेषनाग की, फन छतरी भै, लै चल्यो रास रचैय्या कूं।
कौन खिलावै डारि---------------

यमुना नीर, बढ़ चल्यो ऊपर, वासुदेव डूबन लाग्यो,
बाहर पांव, कियो नटनागर, छुवत माहि सूखन लाग्यो,
नंदगांव में, नंदबबा घर, बदल्यो माखन खैय्या कूं।
कौन खिलावै डारि-------------

रातहिं रात, लाय कै छोरी, आय भरी देवकि कै झोरी,
सुनी कंस ने, जनम है गयो, पटकि धरा ज्युं मटुकी फोरी।
आंखनि आंशू, देवकि मां कूं, खुशी जसोदा मैय्या कूं।
कौन खिलावै डारि------------

कुंज गलिन में, नटवर नागर, नित नव लीला, कर लीलाधर।
ग्वाल बाल, 'राकेश' संग लै, दूध दही की फोरै गागर,
जाय गोपियन, घेर्यो जसुदा, बरजौ अपने छैंय्या कूं।
कौन खिलावै डारि-------------

भोर भई, सब लगे बधाई, देने जसुमति मैय्या कूं।
कौन खिलावै, डारि पालनौ, पहले किशन कन्हैया कूं।

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म्यान ख़फ़ा, तलवार ख़फ़ा है ।
घोड़ा विमुख, सवार ख़फ़ा है ।

मोबाइल की, दादा गीरी,
चिट्ठी पत्री, तार ख़फ़ा है।

वोट दिया, अब करे तकाजा,
जनता से, सरकार ख़फ़ा है।

जब देखो तब, चली मायके,
बीबी से, भरतार ख़फ़ा है।

प्यार मुहब्बत, अमन चैन की,
खबरों से, अखबार ख़फ़ा है।

देख देख, संता बंता की,
मायूसी, सरदार ख़फ़ा है।

क्यूँ इतनी, पड़ोस की चिंता,
अपना ही, परिवार ख़फ़ा है।

ऊपर आकर, ढक लेता है,
कुर्ते से, सलवार ख़फ़ा है।

घेरे अब, 'राकेश' घरौंदा,
बढ़ी नदी की, धार ख़फ़ा है।

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मंदिर पर पंडित जी, खुलकर बोलें हैं।
मस्जिद पर मुल्ला जी, के मुह गोले हैं।

फिकर नहीं इनको, भूखों की, रोटी की,
कदम कदम, 'राकेश' सियासत तोले हैं।

बड़े निराले खेल, अजब हथकंडे हैं,
जुदा काम के लिए, जुदा ही फंडे हैं,

काम बना दे जो इनका, 'राकेश' यहां,
हाथ में इनके, इन्ही रंगों के, झंडे हैं।



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