मानसिक परीक्षण प्रमाण पत्र की अनिवार्यता
| Rainbow News - Sep 6 2018 12:22PM

    आधुनिक भारतीय समाज में महिलाएं पुरुषों के साथ कन्धा मिलाकर चल रही हैं। अच्छी बात है लेकिन विचार करने की बात यह है कि क्या पुरूष समाज भी महिलाओं के साथ कन्धा मिलाकर चल रहा है..? शायद बहुत हद तक नहीं।
    भारतीय संस्कृति व सभ्यता के अनुसार स्त्रियों की जिम्मेदारी मकान को घर बनाना, बच्चे को जन्म और अच्छी परवरिश द्वारा देश, समाज को स्वस्थ मानसिकता का नागरिक देना, पति-परिवार की सुख-सुविधा का ध्यान रखना आदि पुरुषों की जिम्मेदारी धनार्जन कर परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को पूर्ण करना, गांव-समाज से जुड़े मुद्दों पर निर्धारित नैतिक कर्तव्यों का निर्वहन करना आदि निश्चित किया गया था।
    उक्त जीवनशैली से जीवन यापन करके आज तक हमारी भारतीय संस्कृति व सभ्यता को पोषित किया जा सका है परन्तु वर्तमान भारतीय सामाजिक परिवर्तन के फलस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में ही हमारी संस्कृति आप देख सकते हैं। महानगरों में पाश्चात्य सभ्यता के दुष्प्रभाव के कारण सम्पूर्ण भारत कुप्रभावित हो रहा है।
    पुरूष समाज के लिये स्टेट्स सिम्बल दुर्व्यसन, गलत संगत, व्यभिचार, भोग विलासपूर्ण जीवनशैली में लिप्तता मानसिक अक्षमता का कारण बन रहा है जिससे किशोरों की पढ़ाई में अंक कम, सही ज्ञान का अभाव के साथ बेरोजगारी, वयस्कों का आर्थिक तंगी के साथ परिवार की जिम्मेदारी उठा पाने में असमर्थता के कारण महिलाओं के सामने ‘मैं क्या करू’ प्रश्न स्वयं से पूछना एवं आर्थिक समस्या समाधान के लिये घर से बाहर निकल परिवार की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करने में व्यस्त हो जाना ही विकल्प चुनाव शेष दिखता हैं।
    अर्थात महिलाएं यदि पुरूषों की जिम्मेदारी उठा रही हैं तो महिलाएं स्वयं की जिम्मेदारी परिवार, पति, बच्चे को स्वस्थ्य मानसिकता का नागरिक बनाना पूरी नहीं कर पा रही हैं। भारतीय संस्कृति, सभ्यता पर पड़ते पाश्चात्य सभ्यता व संस्कृति के दुष्प्रभाव को रोकने की दिशा में तत्काल ठोस निर्णय ले संविधान के संशोधन की भी आवश्यकता है।
    वर्तमान भारत में ड्राविंग लाइसेंस, सरकारी कर्मचारी, बच्चों के स्कूल कर्मचारी, भारत में विचरण करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की शैक्षणिक योग्यता परीक्षण, शारीरिक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य है परन्तु मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण को जरूरी नहीं समझा जाता है जिसके कारण विकृत मानसिकता के लोगों के बीच हम सभी जीवन यापन करने के लिये मजबूर हैं।
    आज समाज मे बढ़ते अपराध दर को कम करने में, बेरोजगारी की समस्या से उबरने में, देश की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में स्वस्थ मानसिकता की युवा पीढ़ी की परवरिश की आवश्यकता है। शोधों द्वारा बताया गया कि बच्चों की परवरिश माता पिता की देख-रेख में होंने से ही स्वस्थ मानसिक स्वास्थ्य का विकास होता है जिसमें माता की भूमिका को अहम बताया गया है।
    रोजगार, लाइसेंस के लिये अन्य सभी परीक्षणों के साथ मानसिक स्वस्थ परीक्षण की भी अनिवार्यता होनी चाहिये। देश के प्रत्येक नागरिक के आधार कार्ड से मानसिक स्वास्थ्य प्रमाण पत्र को जोड़ देना चाहिये जिससे मानसिक रोगियों को पहचान मनःचिकित्सा द्वारा तत्काल लाभ पहुंचाया जा सके और एक स्वस्थ मानसिकता के समाज की रूपरेखा तय की जा सके। मैं विश्वास के साथ कह सकती हूं। उक्त निर्णय भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सर्वश्रेष्ठ कदम साबित होगा।

(लेखिका गार्गी सिंह स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं)



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