समलैंगिकता अब अपराध नहीं : सुप्रीम कोर्ट
| Agency - Sep 6 2018 2:46PM

ऐतिहासिक फैसला

समलैंगिकता अब अपराध नहीं है, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। इसी के साथ कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध करार देने वाली आईपीसी की धारा 377 के प्रावधान को खत्म कर दिया है।

कोर्ट ने कहा कि निजता का अधिकार मौलिक अधिकार है। देश में सभी को समानता का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने फैसले में कहा कि देश में सबको सम्मान से जीने का अधिकारी है। समाज को अपनी सोच बदलने की जरूरत है। पुरानी धारणाओं को छोड़ना होगा। हालांकि कोर्ट ने पशुओं से संबंध को अपराध की श्रेणी में रखा है।

समलैंगिकता को अपराध करार देने वाली आईपीसी की धारा 377 की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने कहा कि पहचान बनाए रखना जीवन की सच्चाई है।

ऐसे में LGBTQ समुदाय के लोगों को भी दूसरे लोगों की तरह ही सामान्य अधिकार हैं। कोर्ट ने कहा कि दो बालिग लोगों के बीच आपसी सहमति से बने निजी संबंध जो किसी के लिए नुकसानदायक नहीं है, वह दो लोगों के बीच आपसी सहमति का मामला है। ऐसे में धारा समलैंगिकता अब अपराध नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के साथ ही दिसंबर 2013 को सुनाए गए अपने ही फैसले को पलट दिया है। सीजेआई दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ ने 10 जुलाई को मामले की सुनवाई शुरु की थी और 17 जुलाई को इस पर फैसला सुरक्षित रखा था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवन का अधिकार मानवीय अधिकार है। इस अधिकार के बिना बाकी अधिकार औचित्यहीन हैं। कोर्ट ने कहा कि समलैंगिकता पर किसी भी तरह की रोक संवैधानिक अधिकार का हनन है। किसी भी सामान्य व्यक्ति की तरह LGBTQ के लोगों को भी उतने ही अधिकार हैं। एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करना चाहिए।



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