HBD आशा भोंसले : उम्र 85 लेकिन सुर 16 के, जब भी गाया...दिल चुरा लिया
| Agency - Sep 8 2018 12:25PM

सुरों की मल्लिका और हिंदी सिनेमा की महान हस्तियों में से एक आशा भोंसले का आज जन्मदिन हैं। आज आशा भले ही 85 साल की हो गई हों लेकिन आज भी उनकी आवाज में 16 साल की लड़की की आवाज खनकती है, जो सीधे लोगों के रूह पर असर करती है, चाहे वो गीत हो, गजल हो, ठुमरी हो, भजन हो या फिर कैबरे या पॉप, हर जगह आशा ने सिर्फ और सिर्फ लोगों को रूमानियत से रूबरू कराया है। लोगों के लिए एक मिसाल बन चुकीं आशा भोंसले संगीत की हर शैली में नंबर वन है, आपको जानकर हैरत होगी कि आशा भोंसले ने 20 भाषाओं में एक हजार से ज्यादा गाने गाए हैं।

आशा का जन्म महाराष्ट्र के सांगली गांव में 08 सितम्बर 1933 को हुआ था। पिता पंडित दीनानाथ मंगेश्कर की छोटी बेटी आशा ने 1980 में आर डी बर्मन से शादी की थी यह उनकी दूसरी शादी थी। कई अवार्ड पर कब्जा जमा चुकीं आशा को बतौर गायिका 8 बार फिल्म फेयर पुरस्कार मिल चुके हैं। यह पहली सिंगर हैं जिन्हें ग्रेमी अवार्ड के लिए भी चुना गया था। 1986 मे प्रदर्शित फिल्म इजाजत के गीत 'मेरा कुछ सामान आपके पास पड़ा है' के लिए आशा भोंसले नेशनल अवार्ड से सम्मानित की गई। इनके अलावा बीबीसी ने उन्हें लाइफ टाइम अचिवमेंट अवार्ड भी दिया है।

महज सोलह वर्ष की उम्र में अपने परिवार की इच्छा के विरूद्ध जाते हुए आशा ने अपनी उम्र से काफी बडे गणपत राव भोंसले से शादी कर ली। वैसे उनकी शादी सफल तो नहीं हो पायी लेकिन धीरे-धीरे आशा की आवाज का जादू संगीत की दुनिया पर छाने लगा और जल्द ही उन्होंने संगीत की दुनिया में अपनी अलग ही पहचान बना ली। आशा भोंसले के संगीत जगत में अपना पहला गीत वर्ष 1948 में सावन आया... फिल्म चुनरिया में गाया था। लेकिन वर्ष 1957 में प्रदर्शित निर्माता-निर्देशक बी. आर. चोपडा की फिल्म 'नया दौर' आशा भोंसले के लिए मील का पत्थर साबित हुई। इसके बाद बी. आर. चोपडा ने आशा भोंसले को अपनी कई फिल्मों में गाने का मौका दिया।

आशा ने अपने शुरुआती दौर में ज्यादातर बी ग्रेड के लिए ही गाने गाए। साठ और सत्तर के दशक में आशा भोंसले हिन्दी फिल्मों की डांसर 'हेलन' की आवाज समझी जाने लगी। आशा भोंसले ने हेलन के लिए तीसरी मंजिल में 'ओ हसीना जुल्फों वाली...' और आजा आजा मैं हू प्यार तेरा . गाकर संगीत की दुनिया में तहलका मचा दिया। इसी दौरान उन्हें आर डी बर्मन से मोहब्बत हुई और साल 1980 में आशा ने अपने से 6 साल छोटे संगीतकार आरडी बर्मन से शादी कर ली। 1994 में आर.डी.बर्मन की मौत से आशा भोंसले को गहरा सदमा लगा और उन्होने गायिकी बंद कर दी लेकिन अपनी उदासियों को दूर करने के लिए आशा ने सुरों का सफर फिर से शुरू किया। 1995 में रंगीला में 'तन्हा तन्हा...' गीत गाया और लोगों को फिर से बता दिया कि सुरों पर उम्र के आंकड़े असर नहीं करते हैं।



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