तशनगी कैसे सकीना की बुझाये जैनब....
| -Ramjee Jaiswal - Sep 15 2018 12:19PM

जौनपुर। ‘तशनगी कैसे सकीना की बुझाये जैनब, खाक पे कैसे यतिमा को सुलाए जैनब’ नौहा जैसे ही अंजुमन हैदरिया कुरापट्टी ने पढ़ा अजादार बेचैन हो गये। चारों तरफ से रोने-बिलखने की दर्दनाक आवाज गूंजने लगी। तीसरी मोहर्रम शुक्रवार को शहर के कुरापट्टी खानपट्टी में स्थित इमाम बारगाहों में गम-ए-हुसैन की सदाएं गूंजने लगीं।

अंजुमन हैदरिया के साहबे बयाज एहतिशाम अब्बास, दिलशाद अली ने इमाम हुसैन अलै. की 6 माह की दुधमुंही बच्ची जनाबे सकीना का दर्दनाक नौहा पढ़ा जिससे पूरा वातावरण गम में डूब गया। साथ ही हजरत इमाम हसैन की याद में रखा जाने वाला जरीह व ताजिया भी अकीदतमंद खरीदकर घर लाने लगे।

मजलिस को खिताब करते हुये मौलाना जैनुल आब्दीन ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत पर प्रकाश डाला। जाकिरे अहलेबैत दिलशाद अली ने कहा कि करबला हमें जुल्म से नफरत व मजलूम से मोहब्बत करने का पैगाम देती है।

नफरत का जज्बा इंसान को जालिम बना देता है जबकि मोहब्बत इंसान को फरिश्ते से भी बुलंद मुकाम अता करती है। इस अवसर पर सैय्यद अली, गुलामुस्सकलैन, नौशाद अली, मोहम्मद हसन, जीशान हैदर, शाहिद अल्वी, आरिफ हुसैनी, कासिद अली सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।



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