अम्बेडकरनगर: अकबरपुर में बेंचा जा रहा है कीड़ायुक्त केक
| Rainbow News - Sep 15 2018 4:41PM

केक- यानि एक ऐसा प्रचलित नाम जो हर आम खास की जुबान पर। केक आंग्ल भाषा का शब्द- अर्थ टिकिया। केक हर कोई- आयु वर्ग का- इसका बड़े चाव से उपयोग करता है। केक- प्रायः जन्मदिन, शादी की वर्षगाँठ आदि अनेकों खुशी के मौकों पर काटा जाता है। वही केक जिसे अब छोटे-बड़े उद्यमियों द्वारा बेहिचक प्रचुरता मेें निर्मित किया जाता है। केके- फास्ट फूड की कटेगरी में आता है। पाश्चात्य सभ्यता का प्रतीक केक अब कितना दूषित व अशुद्ध, अखाद्य निर्मित होने लगा है, इसका एक नहीं अनेकों उदाहरण हैं। लोग खुशी के अवसरों पर दिन-दिवस, तिथि को यादगार बनाने के लिए केक का उपयोग करते हैं। परन्तु यदि सावधानी न बरतें तो वही केक उनके लिए अमंगलकारी बन सकता है।

जी हाँ आजकल हमारे यहाँ मिलने वाला केक जैसा फास्टफूड जहरीला साबित होने लगा है। क्योंकि इसके निर्माण में साफ-सफाई व बरती जाने वाली सावधानी का कतई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसका नतीजा यह होता है इस केक में जहरीले कीड़े व अन्य अखाद्य सामग्रियाँ, रसायन पाई जाने लगी हैं जिससे जनस्वास्थ्य के लिए खतरा उत्पन्न हो गया है। हालांकि जनस्वास्थ्य के दृष्टिगत शासन स्तर पर खाद्य सुरक्षा महकमें का गठन किया गया है, परन्तु हर कोई अपना-अपना काम ही कर रहा है। मसलन- मिलावट करने वाले मिलावट कर रहे हैं और मानक को दरकिनार करते हुए खाद्य पदार्थों को निर्मित कर उनकी बिक्री मनचाही कीमत पर करके धनोपार्जन में लगे हुए हैं वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग के जिम्मेदार ओहदेदार भी औपचारिक रूप से अभियान चलाकर कुछेक स्थानों पर छापेमारी करके नमूना एकत्र कर अपने दायित्वों की इतिश्री कर ले रहे हैं।

सरकारी विभाग के बारे में ऐसा कुछ भी नहीं कहना है जो पढ़ने और सुनने वालों को नया और अजीब लगे। तात्पर्य यह कि चोर चोरी कर रहा है और साव जग रहा है, पुलिस अपने में ही मस्त है। बहरहाल जहाँ तक जनस्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा की बात है इस परिप्रेक्ष्य में कहना है कि खाद्य उपभोक्ताओं को जागरूक बनने व खाद्य पदार्थों के निर्माताओं को नैतिकता का तथा सरकारी अहलकारों को उनका दायित्वबोध होना चाहिए। प्रीफेस यानि भूमिका (प्रस्तावना) कुछ लम्बा हो गया है। अब आते हैं मुख्य बिन्दु पर- जिसके चलते इस एपिसोड को लिखकर सार्वजनिक करने की आवश्यकता पड़ी।

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद के मुख्यालयी शहर अकबरपुर निवासी युवा पत्रकार संजय मौर्य तूफानी की पुत्री ‘पीहू’ का जन्मदिन 14 सितम्बर 2018 को सेलिब्रेट किया जाना था। पत्रकार ने अकबरपुर के बसस्टेशन क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख जनरल स्टोर से एक केक खरीदा और केक काट रस्म अदायगी उपरान्त जब उसके टुकड़े उपस्थित मित्रों और परिजनों को खिलाने लगे उसी बीच उक्त केक के अन्दर एक बड़ा सा जहरीला कीड़ा दिखाई पड़ा। यह देखकर केक चखने वालों के होश उड़ गए और लोगों को मिचलियाँ आने लगीं।

खैर! जिस-जिस ने केक के टुकड़े उदरस्थ किये थे सभी ने उल्टियाँ किया और मुँह की कुल्ली कर सामान्य होने का उपक्रम किया। यह बात काफी चर्चा में रही, और मीडिया के लोगों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने अकबरपुर- शहजादपुर के एक बड़े एवं प्रमुख बेकरी व्यवासाई से दूरभाषीय वार्ता किया और केक में कीड़े पाए की चर्चा की। इस पर उक्त व्यवसाई ने कहा कि यह केक हमारी किसी भी दुकान से नहीं लिया गया है, और हम ऐसा चौकोर आकार का केक छोटे साइज में नहीं बनाते हैं। यह बटर केक है इसका निर्माण टाण्डा में होता है। वहाँ से चुनिन्दा दुकानों पर इसकी आपूर्ति की जाती है।

उक्त दुकानदार ने बताया कि वह शहजादपुर स्थित दुकान से बोल रहा है उसकी एक दुकान अकबरपुर में डाकबंगले के पास भी है, और उक्त केक का फोटो उसने जब अपने कारीगरों को दिखाया तो सबने कहा कि यह उसके यहाँ किसी भी दुकान का केक नहीं है। क्योंकि उसके यहाँ इस तरह के केक बनाए ही नहीं जाते हैं। बगैर पूछे उक्त व्यवसाई ने अकबरपुर बस स्टेशन स्थित उस दुकान का नाम भी लिया जहाँ से कीड़े वाला केक पत्रकार संजय मौर्य द्वारा खरीदा गया था। यह तो रही केक निर्माता और रेनबोन्यूज की वार्ता।

इसकी जानकारी रेनबोन्यूज ने बजरिए व्हाट्सएप्प जिला अभिहित अधिकारी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी को दिया, परन्तु इन कथित जिम्मेदार ओहदेदारों ने उक्त पर कोई ध्यान नहीं दिया। लम्बी-चौड़ी बातें करने वाले और अपने को कथित ईमानदार, धाकड़, प्रभावशाली, निष्ठावान खाद्य सुरक्षा ओहदेदार बताने वाले ये अधिकारी जनस्वास्थ्य के प्रति कितने सचेष्ट हैं यह उनके उपेक्षापूर्ण रवैय्ये से ही पता चल जाता है। ऐसे ओहदेदार प्रायः कुछेक छोटे-मोटे दुकानदारों के यहाँ छापेमारी कर नमूने संकलित करते हैं जिनको परीक्षण के लिए प्रयोगशालाओं में भेज देते हैं। इस संवाद के आलेख में मुख्य रूप से कीड़ा युक्त केक का जिक्र किया गया है, देखना यह है कि खाद्य सुरक्षा महकमें के अहलकार इसे कितनी गम्भीरता से लेते हैं।



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