ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी का दूसरा राज्य सम्मेलन लखनऊ में आयोजित
| Rainbow News - Sep 29 2018 5:25PM

लखनऊ। आज देश के एकमात्र राष्ट्रस्तरीय वैज्ञानिक संगठन, ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी, के उत्तर प्रदेश राज्य प्रखण्ड ने अपना दूसरा राज्य सम्मेलन आईएमए भवन, लखनऊ में आयोजित किया। सम्मेलन में प्रमुख वक्ता के रूप में बोलते हुए भटनागर सम्मान प्राप्त प्रख्यात वैज्ञानिक, भारतीय विज्ञान शिक्षण व अनुसंधान, कोलकाता के डीन और संगठन के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. सौमित्रो बनर्जी ने ‘‘विज्ञान का समाज के साथ एकीकरण’’ पर बोलते हुए कहा कि विज्ञान ने असंख्य भिन्न-भिन्न तरीक़ों से हमारी रोज़मर्रा जिन्दगी को प्रभावित किया है।

वर्तमान जगत में तमाम वे चीजें जिन्हें हमने अभिन्न अंग के तौर पर स्वीकार कर लिया है, उदाहरण के लिए एक बटन दबा देने मात्र से ही तत्काल उजाला हासिल कर लेना, विज्ञान से प्राप्त उपहार हैं। जो भी हो, विज्ञान केवल तकनीकी विकास व खोजों से सम्बद्ध नहीं है; विज्ञान एक विश्व-दृष्टिकोण है; यह वस्तु जगत को देखने का एक विशेष तरीक़ा है; इसके पास हमारे इर्द-गिर्द के संसार को समझने की एक विशिष्ट पद्धति है; यह चिंतन की एक ख़ास शैली को अन्तर्निविष्ठ कराता है और इसकी एक सामाजिक प्रतिबद्धता है। विज्ञान का दर्शन, प्राचीन व आधुनिक दर्शनों की अन्य सभी श्रेणियों से स्पष्टतया भिन्न है।

दुर्भाग्यवश, हमारी शिक्षा प्रणाली लगभग पूर्णतया विज्ञान के केवल तकनीकी पहलू के अनुकूल बना दी गयी है; इसकी पद्धति, इसके दर्शन और विश्व-दृष्टिकोण को केवल एक सरसरी निग़ाह से देखा जाता है, वो भी अगर हो सका तो। हमारी शिक्षा, ख़ासतौर पर स्कूली स्तर पर, शिक्षार्थियों को विवेकपूर्ण चिंतन और तर्कसंगत कार्यकलापों के लिए शिक्षित नहीं करती है। परिणामस्वरूप, यद्यपि हमारा संविधान नागरिकों को वैज्ञानिक स्वभाव को आत्मसात् करने व बढ़ावा देने का विशेषाधिकार प्रदान करता है, विवेकशीलता, वस्तुनिष्ठता और एक दृढ़ व उत्साहपूर्ण रचनात्मक संशयवादिता जैसे सद्गुण वर्तमान भारतीय समाज की मनोवृत्ति में गहरी पैठ नहीं बना पाये हैं।

अवश्यंभाव्यतः, समाज व विज्ञान के बीच एक विच्छेद है, जो भारतीय समाज व भारतीय विज्ञान, दोनों ही के लिए घातक साबित हुआ है। आमजन के व्यापक तबकेे अपनी पतनोन्मुखी परिस्थिति से अपने को ऊपर उठाने में अक्षम रह गये हैं और अन्ततः सामाजिक योगदान के अभाव के कारण भारतीय विज्ञान भी क्षरित होता जा रहा है। सभा को लखनऊ विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ0 सरजित सेनशर्मा, हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के एसोसियेट प्रोफेसर डॉ0 ब्रजेश कटियार व सेवानिवृत्त प्रोफेसर एच.एस.निरंजन और संगठन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यगण दिनेश मोहांता व जयप्रकाश मौर्य ने भी संबोधित किया। श्रोताओं ने उपरोक्त वक्ताओं से एक लम्बी समयावधि तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सम्बंधित तमाम सवाल-जवाब किये और समाज के साथ विज्ञान के एकीकरण का रुख लिये हुए सभाभवन से विदा ली।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रख्यात गायन शिक्षक व संगीतकार श्री असीम सरकार द्वारा प्रस्तुत किये गये एक स्वागत गीत से हुई। तत्पश्चालत् बीरबल पुरातत्व विज्ञान संस्थान के अवकाशप्राप्त व दिल्ली में परामर्शदाता के रूप में कार्यरत वैज्ञानिक डॉ0 चन्द्रमोहन नौटियाल द्वारा लिखित एक संक्षिप्त वक्तव्य का पाठ किया गया। फिर सॉफ्टवेयर इंजीनियर मनीष शुक्ला जी ने कुछ वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रदर्शन द्वारा उपस्थित छात्रसमूह का ज्ञानवर्धन किया। कार्यक्रम के आखिरी चरण में प्रदेश में आमजनमानस तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण की गहरी पैठ कराने हेतु कारगर प्रयास के इरादे से एक सलाहकार मण्डल व एक संयोजन समिति का गठन किया गया। अन्त में भाग लेने वाले छात्रसमूह को प्रमाणपत्र वितरित किया गया और प्रो. सौमित्रो बनर्जी ने वायलिन पर एक संक्षिप्त संगितिक प्रस्तुति देते हुए कार्यक्रम का समापन किया।

-वीरेन्द्र त्रिपाठी, सदस्य, राज्य संयोजन समिति, उत्तर प्रदेश राज्य प्रखण्ड, ब्रेकथ्रू साइंस सोसाइटी



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