लेटर टू बापू, सेल्फी विद झाड़ू
| -Rituparna Dave - Oct 1 2018 4:20PM

प्रिय बापू,
        'इंडिया दैट इज भारत' से मेरा राम-राम। आज 2 अक्टूबर है। हर बरस आता है। आगे भी आएगा। तुझे याद करने का मौका हर बरस एक बार ही आता है। ऐसे में माला पहनाते तेरी तस्वीर संग एक क्लिक हो जाए। हाँ बापू अब तो सेल्फी का जमाना है। लोग तो तेरी नकल उतारने की होड़ में लग गए हैं। कोई फूल देता है तो तो कोई हाथ जोड़ता है पर अपुन को मंदसौर के प्रो.गुप्ता बहुत पसंद आए। पता है बापू उन्होंने वही किया..नहीं समझे... वो क्लास के पास नारेबाजी से परेशान थे। नारेबाजों को रोका क्या नारेबाज उन्हें ही देशद्रोही कहने लगे फिर क्या था गुप्ताजी उनके पैर पकड़ने लगे...।

        खैर बापू तू बता ऊपर के क्या हालचाल हैं? मेरे पास टाइम ही टाइम है। छुट्टी का असल मजा तो आज ही होगा। सुबह दो-चार जगह झाड़ू फेर प्रोग्राम में हो आया। फोटू खिचवा ली इधर का कचरा उधर, उधर का इधर। बस छुट्टी पक गई। दिन भर घूमुंगा, फिरूंगा फोटू भिजवाउंगा और क्या। अरे अभी याद आया है। आज तो चैनल वाले भी फोटू दिखाएंगे। वो क्या कहते हैं.....‘सेल्फी’ भेजो। एक आइडिया आया बापू। झाड़ू के संग सेल्फी खींचूंगा। तुम कहोगे कैसा मूर्ख है। भला झाड़ू संग सेल्फी ? तुमको पता नहीं बापू तुम्हारे भारत यानी ‘दैट इज इण्डिया’ में कुछ भी इंपॉसिबल नहीं। 

         सुन बापू मेरे गांव की नदी है। वो सूख गई। सच! सारे शहर की गंदगी से इतना शर्माई, थक, हार गई, कोई देखने सुनने वाला नहीं था। 5-10 बरस पहले ही पता नहीं क्या हुआ पहले धार कम हुई और अब पूरा खल्लास हो गई। बापू मेरा गांव भी सीमेण्ट जंगल बन गया है। तुम सिखाते थे मिट्टी में चला करो, बरसात की सोंधी खुशबू लिया करो, हरे घास में नंगे पैर टहला करो और सुबह-शाम “वैष्णव जन तो तेने कहिए जे पीर पराई जाणे रे” गाया करो। पर क्या करूं बापू मिट्टी तो छोड़ रेत तक सोन के भाव बिक रही है। कहां चलूं सीमेण्टेड रोड में? घास गाय-भैंस को खिलाने को नहीं बची तो घूमने कहां जाऊं? बेशरम की झुरमुट में या हर जगह इकट्ठा कचरे के पहाड़ में। बापू तुम मानते क्यों नहीं पीने के पानी के लिए इतनी मार-काट होती है कि घूमने कि फिकर कैसी? पता है दूसरे मोहल्ले से पानी लाते खासी मेहनत हो जाती है यही तो घूमना हुआ। तेरा भजन मोबाइल वाले बोलते है आउट डेटेड है, तू ही बता नया वर्जन कहां मिलेगा?

          बापू शहर तो छोड़ मेरा छोटा सा गांव भी गंदा हो गया। सुन जो पैसा सरकार ने नाली के लिए भेजा था वो सरपंच की गैरॉज में लग गया। अरे एक बात तो बताना भूल गया। तेरी बहू को शौच के लिए बाहर न जाना पड़े सो सरकार ने घर पर ही पक्का संडास बनवा दिया। पर क्या बताऊं उसमें लगा टीन का दरवाजा महीने भर में ही चोरी हो गया। ‘सत्य मेव जयते’ वाली पुलिस में रपट लिखाने गया तो उल्टा मुझसे पूछने लगे कि शक किस पर है। बता बापू मैं कैसे बता दूं? मरना है क्या बताकर कि वो चौधरी का बेटा...खैर छोड़ बापू।बता के मार थोड़ी खाना है। तुझे पता है मेरा गाल तेरे गाल जैसे मजबूत नहीं क्योंकि तुझे पता है मिलावटी दाना, पानी खाता हूं। इसलिए तेरे जैसे गाल थोड़ी आगे करूंगा।

          चल छोड़ बापू तू बता कैसा है। जल्दी-जल्दी बता दे। शाम हो रही है। रात की चिन्ता सता रही है। खैर छोड़ एक दिन नींद नहीं भी आई तो क्या। अरे बापू सुन तो,  सुबह मुझे सरकारी अस्पताल भी जाना है पता है क्यों। तेरे जनम दिन पर, सरकारी स्कूल में मध्यान्ह भोजन का खास खाना बना था नेताइन के समूह को ठेका मिला है। पता नहीं कैसे नकली दूध की असली खीर में जिन्दा छिपकली गिर गई जिससे बच्चे बीमार हो गए। अभी भी 15-20 अस्पताल में हैं। डॉक्टर तो तेरी फोटू के लिए फूल-माला का इंतजाम करने सीएमओ के पास शहर चला गया था। गनीमत थी कि अपना मन्तू सफाईवाला था न उसका बेटा अस्पताल में बाप की जगह भर्ती हो गया था।

           भला इंसान है खुद ही बच्चों को बॉटल चढ़ा दिया अब सब ठीक हैं। अच्छा बापू अपुन का टेम हो गया, तुझे पता है न तलब लग रही है। पर बापू एक बात तेरे लिए बहुत अच्छी है। सच्ची बताना तू वहां खुश है कि नहीं? सुन अगर कोई तकलीफ हो तो संकोच नहीं करना। मुझे पता है वहां भी तेरे बहुत से पॉलीटिकल कांपीटीटर पहुंच गए होंगे। तुझे वहां भी चैन  नहीं होगी। खैर चिन्ता मत करियो। उससे भी आगे का जुगाड़ हो गया है। वहां तकलीफ हो तो मुझे चुपचाप एसएमएस कर दइओ। अगले 2 अक्टूबर तक तेरे लिए मंगल पर जगह रिजर्व करा दूंगा वहां अभी भीड़ भाड़ कम है और किसी के दिमाग में नहीं है ये आईडिया। बात अपने तक रखियो। चलूं बापू राम-राम।

(इसे व्यंग के रूप में ही लिया जाए)



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