अहलेबैत की महिमा है अपरंपार
| -Ali Askari Naqvi - Oct 15 2018 5:12PM

अंबेडकरनगर। अल्लाह पवित्र पुस्तक कुरान में सूरज और चांद की कसम खाता है। चांद को अरबी भाषा में कमर कहते हैं। कुरान शरीफ में जहां भी कमर शब्द का उल्लेख हुआ है, उसका आशय इमामत से है। कहना गलत न होगा कि इमामत का सिलसिला मौलाए कायनात हजरत अली इब्ने अबीतालिब से है। इस प्रकार अहलेबैत की महिमा का अंदाजा लगाया जा सकता है। मोहल्ला मीरानपुर इमामबारगाह परिसर स्थित दिलवर हुसैन के अजाखाने में आयोजित वार्षिक मजलिस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पेश इमाम जामा मस्जिद मौलाना शुजा हैदर ने यह बात कही।

यासिर हुसैन की व्यवस्था में संपन्न मजलिस कार्यक्रम से पहले आरिफ, जैबी, कमर अकबरपुरी, इफ्तेखार, उमम लोरपुरी, मीसम आदि ने पेशखानी किया। मौलाना शुजा हैदर ने यह भी कहा कि खत्मुल अम्बिया हजरत मोहम्मद मुस्तफा का प्रत्येक पग ईश्वर की इच्छानुसार ही उठता था। रसूले अकरम ने अंतिम हज की वापसी के दौरान खुम के मैदान में सवा लाख हाजियों के मजमें में मौला अली का हाथ बुलंद करके कहा था जिसका मैं मौला, उसके अली मौला हैं। कहा कि कर्बला वालों के विचार सदा प्रासंगिक रहेंगे। अंजुमन अकबरिया के अध्यक्ष आबिद हुसैन ने अपने समय के प्रसिद्ध शायर नसीम अकबरपुरी का मशहूर नौहा 'हाय शहे कर्बला' पढ़ा तो बड़ी संख्या में उपस्थित अजादार सिसक पड़े।

मजलिस में अब्बास रिजवी, सैयद रईस हुसैन, अनवर हुसैन लड्डू, इम्तियाज हुसैन, मेहदी रजा, परवेज मेहदी, माहिर मिर्जा, ख्वाजा शादाब हुसैन, मसर्रत हुसैन, तस्वीर हुसैन, बरकी, मेहदी हसन, अलमदार हुसैन, जौव्वाद हुसैन,  कर्रार हुसैन, जुल्फिकार हुसैन,  अबरार हुसैन, अजहर अब्बास, हसन इमाम अच्छे मौलवी, सादिक हुसैन मुन्ना, जाहिद अली, डॉक्टर आमिर अब्बास, नजर अब्बास पप्पू, सिरताज अली राजा, कायम अली, जावेद हसन सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम के समापन पर आयोजक यासिर हुसैन ने सभी के प्रति आभार जताया।



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