खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन का चेकिंग अभियान या नाट्य मंचन....?
| Posted by- Editor - Oct 16 2018 12:45PM

अम्बेडकरनगर जनपद में पिछले एक वर्ष से मिलावटी खाद्य सामग्रियों की बिक्री बेरोक-टोक जोरों पर की जा रही है। इससे सम्बन्धित समाचार बराबर प्रकाशित होते रहते हैं बावजूद इसके जिम्मेदार महकमें के कानों पर जूँ नहीं रेंग रही है। मिलावटी एवं अखाद्य पदार्थों की बिक्री पर नियंत्रण लगाने के बजाय समाचार प्रकाशन उपरान्त जिलास्तरीय अधिकारी दुकानदारों जैसे परचून की दुकानों, फास्टफूड विक्रेताओं, ठेला, ढाबा, जलपान गृहों, मिठाई की दुकानों पर दिखावे के तौर पर छापेमारी कर अपने दायित्वों की इतिश्री कर लेते हैं और माहवारी की रकम में बढ़ोत्तरी कर उन्हें अभय दान दे देते हैं।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन द्वारा जिले के मिलावटखोरों को मिलावट करने की खुली छूट दे दी गई है, और जिम्मेदार स्वयं हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं। मिलावटी खाद्य पदार्थों एवं नकली दवाओं की बिक्री पर लगाम लगाने के लिए तकरीबन छः साल पहले बनाये गए नए कानून का असर भी जिले में कहीं देखने को नहीं मिल रहा है। खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले किसी भी दुकानदार के पास रजिस्ट्रेशन कार्ड नहीं है। शहर के दर्जनों दुकानदारों से बात की गई तो पाया गया कि उनमें से ज्यादातर दुकानों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं है, कार्ड बनवाने की तो बात ही दूर। शहर के हर चौराहे पर खाने-पीने की दुकानें खुली हैं पर रजिस्टेªशन के बारे में किसी को कोई जानकारी ही नहीं है। प्रतीत होता है कि जिम्मेदार महकमें द्वारा खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वालों को मिलावटखोरी की खुली छूट दे दी गई है।

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन महकमें के ओहदेदार पूरे लाव-लश्कर के साथ विभागीय गाड़ी में बैठकर कथित चेकिंग अभियान चला रहे हैं और प्रायोजित ढंग से खाद्य पदार्थ निर्माताओं, विक्रेताओं एवं दुकानदारों के यहाँ छापेमारी कर नमूना संकलित कर रहे हैं। सेल्फी/कथित अभियान से सम्बन्धित फोटो खींचकर विभागीय आलाहाकिमों को प्रेषित करने के साथ-साथ मीडिया प्रबन्धन कर स्वयं की पीठ थपथपा रहे हैं, परन्तु आलम यह है कि चोर चोरी कर रहा है आर साव जग रहा है। पहरेदारी भी हो रही है और चोरी भी नहीं रूक रही है। माजरा क्या है इसे हर कोई समझ सकता है।

लाखों रूपए मासिक वेतन पाने वाले सुख-सुविधा सम्पन्न खाद्य महकमें के ओहदेदार चेकिंग अभियान कुछ इस कदर चला रहे हैं जैसे वह लोग सैलानी बनकर खाद्य दुकानों पर न जाकर टूरिस्ट प्लेसों पर जा रहे हैं, साथ ही इसका सरकारी भत्ता भी वसूल रहे हैं। ताज्जुब होता है कि इंस्पेक्टर से प्रोमोट हुए ये अधिकारी (खाद्य सुरक्षा अधिकारी) इस बात का रोना रोते हैं कि अब नौकरी करना काफी मुश्किल हो गया है क्योंकि शासन की तरफ से महकमें के समस्त कार्य ऑनलाइन कराये जा रहे हैं। हाँ यह बात दूसरी है कि लाइसेन्स व प्रतिष्ठान पंजीयन तथा चेकिंग में जेल जाने का हवाला देकर अल्पज्ञों, मासूमों एवं साधारण दुकानदारों से मोटी रकम वसूल हो जाया करती है।

ब्राण्डेड नामों से मार्केट बिकने वाले तेल जैसे फार्च्यून, सहेली, बैल कोल्हू आदि के अलावा घी, मक्खन, खोवा, बूंदी निर्माता व दूध विक्रेता बेखौफ अपना धन्धा कर रहे हैं। उन्हें मात्र पैसा कमाने से मतलब है, जनस्वास्थ्य से उनका कोई लेना देना नहीं है। वर मरे या कन्या..........पण्डित जी को दक्षिणा से मतलब.........। अम्बेडकरनगर के फूड/ड्रग विभाग में कार्यरत अधिकारियों के पास समय का नितान्त अभाव है। वह लोग अपने सी.यू.जी. अथवा व्यक्तिगत फोन तक उठाने का समय नही पाते हैं। कलेक्ट्रेट स्थित कार्यालय में बैठकर काम करना इन लोगों को पसन्द ही नहीं। अधिकांश समय फील्ड में बिताते हैं। मतलब यह कि निरीक्षक से अधिकारी बने महकमें के ओहदेदार नित्य/नियमित कथित चेकिंग कर जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के दृष्टिगत एड़ी से चोटी तक का पसीना बहा रहे हैं बावजूद इसके सबकुछ अपने-अपने तरीके से हो रहा है। कोई तब्दीली नहीं आई है (यदि इसे पैसा कमाने का एक नाट्य मंचन कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगा)।

जिले में इस समय अनगिनत लोग पैसा कमाने की गरज से कम लागत लगाकर नमकीन पन्नियों में भरकर बेंचने का काम कर रहे हैं। बताना जरूरी है कि इसमें से कुछ के पास प्रापर लाइसेन्स है तो अनेकों बगैर लाइसेन्स के ही बाह्य जनपदों से थोक के भाव में नमकीन की खरीद कर उसको पॉलीथीन पैकेटों में भरकर बिक्री कर रहे हैं। ये नमकीन कैसे बनाए गए हैं, इसमें क्या-क्या मिलावट की गई है इसकी जानकारी इन नमकीन विक्रेताओं को भी नहीं होती है। पैसा कमाने की गरज से ये लोग जाने-अनजाने जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। हालांकि अम्बेडकरनगर का खाद्य सुरक्षा एवं औषधि महकमा इस बात का दावा कर रहा है कि ऐसे नमकीन विक्रेताओं के यहाँ छापेमारी कर कार्रवाई की जा रही है।

बीते दिनों रेनबोन्यूज ने जनहित में एक समाचार का प्रकाशन किया था जिसमें शिकायतकर्ता के अनुसार उसकी बेटी के जन्मदिन पर खरीदे गए केक में जहरीला कीड़ा पाया गया था। केक खाने और कीड़ा देखने के बाद लोगों को मिचली और उल्टियाँ होने लगीं थीं। समाचार प्रकाशन उपरान्त वायरल होने पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के जिम्मेदार ओहदेदारों द्वारा सम्बन्धित दुकानदार (जहाँ से केक की खरीद की गई थी) के बारे में जानकारी चाही गई इस पर खरीदने वाले ने कतिपय कारणों से स्पष्ट रूप से नाम बताने से इंकार कर दिया। यदि नाम पता चल जाता तो जिम्मेदार महकमें के लोग अवश्य ही उस दुकानदार के खिलाफ कार्रवाई करते, ऐसा उन लोगों का कहना है। बात आई-गई हो गई। अब इस समय मिलावटी व सेहत के लिए हानिकारक नमकीन की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। यह मामला काफी चर्चा में है।

छः साल पहले बना था नया कानून

खाद्य पदार्थों में मिलावटखोरी रोकने और नकली दवाओं पर लगाम लगाने के लिए करीब छः साल पहले समूचे देश में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (विभाग) का गठन किया गया था। इस कानून के तहत 12 लाख रूपए से कम सालाना टर्न-ओवर करने वाले कारोबारियों को सिर्फ रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। विभाग की ओर से नई व्यवस्था  के तहत रजिस्टेªशन कराने वाले दुकानदारों को फोटोयुक्त रजिस्टेªशन कार्ड विभाग की ओर से जारी किया जाता हैं।

व्यापारियों को लाइसेंस लेने की अनिवार्यता

जानकारी करने पर पाया गया कि ठेलों, गुमटियों या सड़क के किनारे खाद्य पदार्थ बेचने वाले किसी दुकानदार के पास रजिस्टेªशन कार्ड नहीं है। जबकि पूरे जिले में हजारों की संख्या में खाद्य पदार्थ बेचने वाले दुकानदार गुमटियों या सड़क के किनारे दुकान सजाए बैठे हैं और सालाना लाखों का टर्न-ओवर भी कर रहे हैं। नए प्रावधान के मुताबिक 12 लाख या इससे अधिक सालाना टर्न-ओवर करने वाले व्यापारियों को लाइसेन्स लेने की अनिवार्यता है। टर्न-ओवर के हिसाब से लाइसेन्स फीस दो हजार रूपए से लेकर पाँच हजार सालाना तय की गई है। जिले में इस तरह की दुकानें भी सैकड़ों की संख्या में हैं। लेकिन विभाग द्वारा सूची मांगने पर स्पष्ट आंकड़ा देने में हीला-हवाली की जाती है।

दण्ड का प्रावधान

नए कानून में खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत खाद्य पदार्थ में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्वों की मिलावट पाए जाने पर अधिकतम 10 लाख तक का जुर्माना व आजीवन कारावास भी हो सकता है। यदि किसी खाद्य पदार्थ में साधारण मिलावट पाई गई तो तीन लाख रूपए तक के जुर्माने का प्रावधान है।



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