फूड महकमे का जागरूकता अभियान: जंगल में मोर नाचा किसने देखा......?
| Rainbow News - Oct 26 2018 4:40PM

त्योहार चल रहे हैं। लोगों में खाने-पीने के सामानों की खरीद को लेकर एक उत्साह देखा जा रहा है। आम लोग त्योहार पारम्परिक ढंग से हर्षोल्लास के साथ मनाने की तैयारियाँ कर रहे हैं। घरों की साफ-सफाई, रंगाई-पोताई शुरू है। व्यवसाय करने वाले अपने दुकानों एवं प्रतिष्ठानों को बाहर से मंगाकर खाद्य पदार्थों से भर रहे हैं। आम आदमी आस्था के चलते पूर्ण रूपेण धार्मिक वातावरण में त्योहार मनाने की तैयारी में लगा है। वहीं व्यवसाई अच्छी आमदनी व मुनाफा कमाने के लिए कमर कस लिया है। इससे इतर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन महकमा कथित रूप से जन-जागरण के लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक कर रहा है। तात्पर्य यह कि आम उपभोक्ता व व्यवसाई तथा निगरानी महकमा सभी अपने-अपने तरीके फेस्टिवल सेलिब्रेट करने की तैयारी लगे हैं। मान्यता के अनुसार हिन्दुओं के लिए दिवाली का त्योहार धन आगमन का सुअवसर प्रदान करता है, और यह मौका साधारण श्रद्धावान व्यक्ति, मुनाफाखोरों और सरकारी अहलकारों के लिए काफी महत्व रखता है।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद में तैनात/कार्यरत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारी/कर्मचारी शासनादेश व जिले के हाकिम के निर्देश पर सक्रिय होकर अपना काम करने लगे हैं। मीडिया मैनेजकर फोटो, सेल्फी मार कर उच्चाधिकारियों व शासन को रिपोर्ट्स भेजकर स्वयं की पीठ थपथपाने में लग गए हैं। यहाँ की टीम के बारे में बताया जाता है कि ये लोग छोटी-छोटी बाजारों में जाकर गट्टा, बताशा, बुनिया, रेवड़ी, गजक, सोनपापड़ी, जलेबी, इमरती आदि बेंचकर जीविकोपार्जन कर घर-परिवार चलाने वाले दुकान दारों के यहाँ चेकिंग अभियान चलाकर अपनी हैसियत व दबदबे का ऐसा प्रभाव छोड़ रहे हैं जिससे इन दुकानदारों में इंस्पेक्टर राज का हौव्वा खड़ा हो सकता है। यह हौव्वा मिलावटी, दूषित व प्रदूषित खाद्य पदार्थों के निर्माण व बिक्री पर कोई अंकुश तो नहीं लगा पाएगा अपितु इससे गरीबों की आजीविका पर असर जरूर पड़ेगा। महकमे की इस तरह की कारगुजारी से यही प्रतीत होता है कि समरथ को नहिं दोष गोसाईं...........।

अम्बेडकरनगर खाद्य सुरक्षा महकमें के सर्वाधिक चर्चित वरिष्ठ अधिकारी के.के. उपाध्याय (मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी) के बारे में बताया गया है कि जिले में महकमे के दूसरे क्रमांक पर आने वाले अधिकारी के रूप में इनकी नियुक्ति जरूर है परन्तु पूरे महकमें पर इन्हीं का नियंत्रण है। इनके द्वारा संरक्षित अन्य सदस्य इसके दिशा-निर्देश पर स्वहितार्थ धनार्जन हेतु रणनीति बनाकर कार्य करते हैं। पहले के फूड इंस्पेक्टर पदनाम वाले ओहदे पर कार्यरत इनकी टीम वही करती है जो उपाध्याय जी कहते हैं।

बीते दिनों दूरभाषीय वार्ता में के.के. उपाध्याय ने कहा था कि इस महकमें में वह एक प्रोन्नति पाकर सी.एफ.एस.ओ. बने हैं और दो प्रोन्नति पाकर अभिहीत अधिकारी के रूप में तैनात राजवंश प्रकाश श्रीवास्तव महकमें के मुखिया हैं। वे ही प्रेस-विज्ञप्तियाँ जारी करवाते हैं और मीडिया प्रबन्धन भी करते हैं। उपाध्याय ने यह बात उस समय कही थी जब प्रकाशित किसी खबर से उन्हें आश्चर्य मिश्रित रंज हो आया था। वही उपाध्याय जी इस समय कथित रूप से जनजागरण चलाकर खाद्य पदार्थों की बिक्री करने वाले व ग्राहकों से कहते हैं कि सामान खरीद की पक्का बिल जरूर लिया करें। उपाध्याय जी से यह पूछने की जुर्ररत कौन कर सकता है कि वह बताएँ- खाद्य पदार्थों के पैकेट लेबिलों पर एफ.एस.एस.ए.आई (फूड सेफ्टी एण्ड स्टैण्डडर्स अथॉरिटी ऑफ इण्डिया) व शत प्रतिशत शाकाहार (हरा) और मांसाहार (लाल) के मोनोग्राम जो पैकेटों पर छपे होते हैं उनका क्या मतलब है? उपाध्याय जी के पास समय नही है। हमेशा वह विभागीय कार्यो में व्यस्त रहते हैं।

अपने सहकर्मियों से अपने स्टाइल में काम लेने वाले उपाध्याय जी के बारे में कहा जाता है कि वह काफी धाकड़ एवं प्रभावशाली हैं। हालांकि तानाशाह जैसे शब्द का जो एक अलंकार ही कहा जाएगा का इस्तेमाल अपने लिए करना वह कतई पसन्द नहीं करते। बात-बात में के.के. उपाध्याय ने कहा था कि मिलावट के बारे में विस्तृत जानकारी देने के लिए वह अवश्य ही प्रयास करेंगे और इसकी सूचना मीडिया को देंगे। परन्तु हमें अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिल सकी है कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन महकमें द्वारा समाज के जनस्वास्थ्य के दृष्टिगत कोई ऐसी कार्रवाई की जा ही है।



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