आई.पी.एस. विपिन कुमार मिश्रा का अन्दाज-ए-बयाँ.............?
| Bhupendra Singh Gargvanshi - Nov 3 2018 4:29PM

महकमा पुलिस- भारतीय पुलिस- पुलिस ऑफ इण्डिया- पुलिस इन इण्डिया आदि.....आदि.....आदि। जहाँ तक हमें मालूम है पुलिस का गठन अंग्रेजी शासनकाल में वर्ष 1860-61 में किया गया था। तब इसका उद्देश्य भारत के देशभक्तों व उनकी गतिविधियों का दमन कर स्थित को सामान्य बनाये रखने का था। तत्समय चूँकि शासक अंग्रेज हुआ करते थे इसलिए पुलिस जैसा संगठन उन्हीं की हिफाजत में लगा रहता था और अपनी दमनकारी शैली से हिन्दुस्तानियों पर जुल्म व अत्याचार किया करता था। गाली, अपशब्द, धमकियाँ अकारण मुकदमों में फंसा देना, जेल की हवा खिलाना, मुठभेंड़ में मार गिराना, फिरंगियों के शासनकाल में पुलिस के लिए यह आम बात थी। खैर! 15 अगस्त 1947 में देश स्वाधीन हुआ, तिरंगा लाल किला की प्राचीर पर लहराया और 26 जनवरी 1950 को भारत एक स्वाधीन गणराज्य घोषित हुआ। तब से काफी कुछ तब्दीलियाँ आईं और आती रहेंगी। परिवर्तन का क्रम निरन्तर जारी है।

अभी कुछ दिन पूर्व सोशल मीडिया में एक पुलिस ऑफिसर का ऑडियो वायरल हुआ, जिसमें सामान्य ढंग से पुलिसिया शैली में अपने अनुभव को शेयर करते हुए पुलिस अधिकारी फोनकर्ता से बात कर रहे थे। हमारा मानना है कि पुलिस वर्दी में इस तरह के होने वाले संवाद सामान्य ही कहे जा सकते हैं। चूँकि यह ऑफिसर जिले के उच्च पदस्थ पुलिस कप्तान और आई.पी.एस. है इसलिए उसके द्वारा उच्चारित शब्दों की गूँज वायरल ऑडियो के माध्यम से कुछ ज्यादा ही हो रही है। ऐसा होना स्वाभाविक है, क्योंकि आरक्षी, मुख्य आरक्षी उपनिरीक्षक, निरीक्षक, क्षेत्राधिकारी (डिप्टी एस.पी.), एडिशनल एस.पी. के ऊपर पुलिस अधीक्षक का पद होता है जिस पर आसीन ओहदेदार से हर कोई अपेक्षा रखता है सामने वाला अधिकारी एक गम्भीर, शालीन व सरल व्यक्तित्व का स्वामी हो। रही बात पुलिस डिपार्टमेन्ट की तो इसमें कार्यरत सभी का साविका जरायम पेशे से जुड़े लोगों से ही पड़ता है और अपराधियों, बदमाशों, गुण्डों, अराजकतत्वों से बात करने में हर वर्दीधारी कुछ इसी तरह की भाषा शैली का इस्तेमाल करता है। 

वर्षो पूर्व की बात है। प्रयोग के रूप में शालीन बनकर चोर, उच्चकों, अपराधी तत्वों से मित्रवत व्यवहार रखने वाले एक पुलिस अधिकारी के घर में चोरो ने रात के समय अनधिकृत रूप से प्रवेश कर सारा माल-असवाब उड़ा लिया था। इस घटना के उपरान्त एक मित्र ने नसीहत देते हुए पीड़ित पुलिस अधिकारी से कहा था कि गोस्वामी तुलसीदास मत बनों और जरायम पेशे से जुड़े लोगों को श्री राम चरित मानस की चौपाइयाँ न सुनाओ। ये लोग डण्डे के आदी होते हैं इनको यही भाषा समझ में आती है। 

अब आते हैं मूल विषय-वस्तु पर........। यह वाकया उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद का है जहाँ के पुलिस महकमें में पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात विपिन कुमार मिश्रा ने सांसद डॉ. हरिओम पाण्डेय के जलालपुर स्थित प्रतिनिधि कृष्ण गोपाल से दूरभाषीय वार्ता करते हुए कुछेक शब्दों का इस्तेमाल किया था जो उनकी गरिमा के विपरीत है। उक्त वार्ता का ऑडियो सोशल मीडिया (व्हाट्सएप्प) पर वायरल हुआ और मामले ने तूल भी पकड़ लिया। इस ऑडियो में पुलिस अधीक्षक ने दूरभाषीय वार्ता में कहा कि अम्बेडकरनगर का इंप्रेशन इतना खराब है कि यहाँ साला मादर..........ज्यादातर लोग या तो गुण्डा हैं या फिर नेता, सामान्य आदमी, सामान्य नागरिक तो यहाँ रहता ही नहीं। इसके अलावा पूरी टेलीफोनिक वार्ता जो वायरल हुई है उसमें आधे से अधिक में एस.पी. विपिन कुमार मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किया गया अन्दाज-ए-बयाँ विशुद्ध रूप से पुराने जमाने के दारोगा, थानेदार, कोतवाल सरीखा ही कहा जाएगा। 

तूल पकड़े इस वायरल ऑडियो प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए अम्बेडकरनगर के साँसद एवं विधायक टाण्डा ने मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन को पत्र भेज कर एस. पी. विपिन कुमार मिश्र के स्थानान्तरण व निलम्बन की माँग किया है। श्रीमती संजू देवी विधायक टाण्डा द्वारा मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन को भेजे गए पत्र में लिखा है कि अम्बेडकरनगर जनपद में वर्तमान समय में तैनात पुलिस अधीक्षक द्वारा पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता के साथ टेलीफोन पर की गई वार्ता का ऑडियो क्लिप वायरल हुआ है जिसमें पुलिस अधीक्षक द्वारा जनपद की समस्त जनता को नेता और गुण्डा कह कर गालियों के साथ-साथ अमर्यादित भाषा का भी प्रयोग किया गया है जिससे समस्त जनपदवासी काफी आहत और अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे हैं, जनपद में वर्तमान पुलिस अधीक्षक की तैनाती से ही अपराध का ग्राफ काफी बढ़ा है, ताबड़तोड़ हत्याएँ एवं लूटपाट की घटना आम हो गई है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ समस्त जनपदवासियों के सम्मान एवं हितों की रक्षा हेतु वर्तमान पुलिस अधीक्षक का स्थानान्तरण/निलम्बन तत्काल किया जाना जनहित में आवश्यक है। 

हम यहाँ जो कुछ भी लिख रहे है वह ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर के आधार पर है। सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए कहना चाहेंगे कि जो कुछ भी हुआ उस पर तरह-तरह की व्याख्या की जा सकती है। अपने-अपने नजरिये से प्रकरण को देखा पढ़ा जा सकता है और विश्लेषण कर कुछ भी लिखा जा सकता है। हमें प्रतीत होता है कि पुलिस अधीक्षक यहाँ के पूर्व जहाँ-जहाँ भी तैनात रहे होंगे वहाँ उनका पाला कमोवेश ऐसे लोगों से पड़ता रहा होगा जो गुण्डा एवं नेता श्रेणी में आते होंगे। इस ऑडियो में उन्होंने यह कहा है कि उनके एक्सपीरियन्स के हिसाब से अम्बेडकरनगर में कुछ ज्यादा ही परसेन्टेज में गुण्डा, नेता हैं सामान्य लोग हैं ही नहीं। या यह भी हो सकता कि इस जिले में हर छोटे-बड़े पुलिस स्तरीय कार्यों हेतु लोग अपने-अपने तरीके से इनसे सम्पर्क कर दबाव बनाते हों। मिश्रा जी के कथन को सुनकर ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें स्पष्ट कहने की आदत है और दबाव में काम करना पसन्द नहीं। और होना भी चाहिए। वह एक अनुभवी, स्पष्टवादी पुलिस अधिकारी हैं। 

53 वर्षीय विपिन कुमार मिश्रा उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के निवासी हैं। कुलीन ब्राम्हण परिवार में 1 जुलाई 1965 को जन्मे छरहरे, कदकाठी के मिश्र ने एल.एल.एम. तक की शिक्षा ग्रहण की है, कानून के ज्ञाता हैं। वर्ष 1990 में पी.पी.एस. परीक्षा उत्तीर्ण कर पुलिस महकमें में अपनी सेवाएँ प्रारम्भ करने वाले मिश्रा वर्ष 2008 में प्रोन्नति पाकर आई.पी.एस. बनें और वर्ष 2014 से बतौर एक आई.पी.एस. पुलिस महकमें के जिम्मेदार पदों पर रहते हुए अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। इन्होंने अम्बेडकरनगर में 29 अगस्त 2018 को एस.पी. के रूप में पद भार ग्रहण किया। अब तक की अल्पावधि में विपिन कुमार ने महकमें व जिले के हर आम खास के लिए किसी भी तरह का ऐसा कार्य नहीं किया जिसे ड्रामाई एक्सपेरीमेन्ट कहा जाए। इनके काम करने का तरीका विशुद्ध अनुभवी पुलिस अधिकारी जैसा ही कहा जा सकता है। एस.पी. का वायरल एक ऑडियो जब काफी चर्चा में आया तो हमने भी उनके सी.यू.जी. नम्बर पर कॉल कर इस बावत कुछ पूछना चाहा। पता चला कि वह आज के दिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हैं। किस लिए हैं....? इस पर उनके वाहन चालक भोला यादव ने बताया कि साहब और मेम साहब (साहब का परिवार) श्री राज्यपाल, उत्तर प्रदेश, लखनऊ के आमंत्रण पर गर्वनर हाउस आए हुए हैं उनको कोई पुरस्कार मिलना है वही प्राप्त करने आए हैं। सी.यू.जी. मोबाइल फोन मेरे पास है। इस तरह अम्बेडकरनगर के पुलिस अधीक्षक से हमारे द्वारा किया जाने वाला दूरभाषीय सम्पर्क सम्भव नहीं हो सका। इसमें बस इतना ही.............आपका भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी, 9454908400



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