खुशियों का त्योहार दिवाली
| Rainbow News - Nov 9 2018 1:18PM

..है खुशियों की, अगवानी का, त्योहार दिवाली। 
गढती है मेलजोल का, संसार दिवाली। 

आंगन में लाए, खुशियों की, सौगात सभी के, 
मां लक्ष्मी से करती, नमस्कार दिवाली। 

घर द्वार सजाएं, चलो रूठों को मनाएं, 
करती है, दिल में प्यार का, संचार दिवाली। 

अपना-पराया, ऊंच- नीच, बैर मिटा के, 
मानवता पे बढ़ाए, ऐतबार दिवाली। 

गुलदस्ते में जीवन के, हों हर रंग के सपने, 
हर ले व्यसन, विकार, अहंकार दिवाली। 

मंजिल हो कामयाबी की, कदमों में आपके, 
धन- धान्य, कीर्ति, यश दे, सदाचार दिवाली। 

आशाओं, भावनाओं की, संगत की रात में, 
'राकेश' है सितारों का, उपहार दिवाली। 

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वो बचपन कहां है...?

वो आब्- ओ- हवा वो, सुकूनत कहाँ है। 
घरौंदे बनाऊँ इजाजत कहाँ है। 

पतंग, डोर, नंगे बदन, गिल्ली- डंडा, 
जिया चाहता हूं, वो बचपन कहां है। 

मुहब्बत हो चारो तरफ, बस, मुहब्बत, 
जहाँ में बची पर, मुहब्बत कहां है। 

दिलों में तपिश हैं, किए बंद खिड़की, 
झरोखा दे ताजी हवा, रब कहां है। 

हैं पथराई आंखें हैं, सपने भी जिंदा, 
मुकम्मल हों नींदें, वो नौबत कहां है। 

मिलूं बेझिझक, तुझको, बांहों में ले लूं, 
है दिल चाहता, पर, इजाजत कहाँ है। 

वो दिखता है जैसा, हकीकत में है भी, 
यकीं कर लूं, 'राकेश' हालत कहां है। 

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अपनों को आजमाएं हम

आग बदले की है, घर अपना ही, जलाएं हम। 
बीच अपनों के ही, अपनों को, आजमाएं हम। 

मेरे हमदर्द, छिड़क घाव में, नमक बोले, 
तुम्हारे वास्ते, अपना जहाँ, जलाएं हम। 

आह मजलूमों की, करके जमा, तिजोरी में, 
वजन कफ़न का, बस हर रोज ही, बढ़ाए हम। 

एक झटके में, जाएं टूट औ, बिखर जाएं, 
सपने गुल्लक के, जतन जितने से, जमाएं हम। 

लगी है भूख, दांव पर जरूर हारेगी 
जोर किस्मत का, चलो आज, आजमाएं हम। 

घना अंधेरा है, चारों तरफ, मगर यारा 
नाज उस दीप पे, मोहरा जिसे बनाएं हम। 

सुबह से शाम तलक, और घर से बाहर तक, 
जिएं न जिंदगी, बस नौकरी, बजाएं हम। 

हम भी इंसान हैं, 'राकेश' लग रहे जोकर, 
खता है, उनके ही, चेहरों पे हंसी लाएं हम। 



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