जैनब ने कस्र-ए-शाम में ताला लगा दिया...
| -Ali Askari Naqvi - Nov 12 2018 11:26AM

अंबेडकरनगर। लूटी हुई दौलतों पर शासन करने वाले यजीद इब्ने मुआविया जैसे अत्याचारी शासकों के दर के भिखारी अजादारी की महिमा, महत्व का मूल्य क्या जाने-समझेंगे। यजीद बेगैरत को मनुष्य के रुप में स्वीकारना मानवता के विपरीत है। क्यों कि इंसान होने के लिए गैरतमंदी जरुरी है जो यजीद और उसके हामियों में दूर दूर तक न थी। 

यह बात टांडा तहसील अंतर्गत ग्राम अरसावां में मौलाना बेलाल काजमी गोंडवी ने अजादारों के बड़े मजमें को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने धाराप्रवाह तकरीर में आगे कहा कि इतिहास साक्षी है कि इंसानियत के अलंबरदार हुसैन इब्ने अली ने संपूर्ण जीवन काल में कभी किसी को खाली हाथ नहीं लौटाया। यहां तक कि बैयत की भीख मांगने वाले यजीद को भी लानत कि ऐसी भीख दिया जिसे वह आज तक संजोए हुए है।

अंत में मौलाना बेलाल काजमी ने कहा- अब कोई भी यजीद न बैठेगा तख्त पर, जैनब ने कस्र-ए-शाम में ताला लगा दिया। कर्बला के बहत्तर शहीदों की याद में अंजुमन फैज-ए-हुसैन द्वारा आयोजित जुलूस कार्यक्रम में जहां मौलाना गुलाम मुर्तुजा जैदी ने 72 ताबूतों का परिचय कराया तो वहीं अंजुमन परचम-ए-अब्बास जारचा, नोएडा के हसन ने अपने हमनवां संग नौहा पढ़ा- जब दूर हुई सीनए सरवर से सकीना, अंजुमन फरोग-ए-अजा सेंथल बरेली के रईस हुसैन आदि ने पढ़ा- घबराती हैं जैनब कभी समझाती हैं जैनब....।

अंजुमन हैदरी नौगावां सादात अमरोहा, अजा-ए-अहलेबैत जौनपुर, पंजतनी तुराबखानी सुल्तानपुर व अंजुमन फैज-ए-हुसैन अरसावां का मातमी दस्ता भी उक्त वार्षिक जुलूस कार्यक्रम में शामिल हुआ। आफताब-ए-निजामत कहे जाने वाले प्रख्यात उदघोषक नजीब इलाहाबादी के संचालन में मौलाना यूनुस हैदर इलाहाबाद, मौलाना इंतेजार आब्दी इलाहाबाद ने संबोधित किया। मोहम्मद हसन, ज़हीर अब्बास, कायम अब्बास, मोहम्मद बाकर, खुई हसन, मोहम्मद अब्बास, सिब्तैन, नौशाद, रिजवान, मीसम, अतहर, कमर आदि ने व्यवस्था संभाला।



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