....और फिर ढूंढते रह जाओगे अकबरपुर
| Rainbow News - Nov 17 2018 5:20PM

ढूंढते रह जाओगे.............जी नहीं...........ढूंढोगे तो भी नहीं पाओगे............यह भी नहीं....... अब भी नहीं मिल रहा है...........जी हाँ ऐसा ही है। हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के जनपद अम्बेडकरनगर के मुख्यालयी शहर अकबरपुर स्थित कुछ प्रमुख सरकारी विभागीय कार्यालयों की। इनके भवन तो हैं परन्तु बाहर से लोग इन्हें अपनी आँखों से आसानी से नहीं देख सकते हैं। देखन की कौन कहे इन सरकारी विभागों के कार्यालयी इमारतों को अनजान एवं बाह्य स्थानों से आने वाले आगन्तुकों द्वारा ढूंढा जाना और उनमें प्रवेश पाना बड़ा ही दिक्कत तलब है। यहाँ जिक्र कर रहे हैं लोक निर्माण विभाग (पुराना डाक बंगला), अकबरपुर-टाण्डा रोड स्थित लोक निर्माण विभाग का सर्किट हाउस, प्रमुख बैंक बैंक ऑफ इण्डिया की अकबरपुर शाखा, खण्ड विकास कार्यालय अकबरपुर, कृषि भवन और विद्युत वितरण खण्ड अकबरपुर कार्यालय आदि जैसे प्रमुख महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों/वाणिज्यिक संस्थाओं का। 

ऐसा क्यों..........? क्या कारण है.........? पाठक भी जान लें..............। ये सभी महत्वपूर्ण विभागीय इमारतें अतिक्रमण की चपेट में हैं और यह अतिक्रमण संक्रामक रोगों की तरह निरन्तर बढ़ता ही जा रहा है। नगर पालिका अकबरपुर प्रशासन को अतिक्रमण हटाकर मुख्य सड़क मार्ग को अस्तित्व विहीन होने से बचाने के लिए सोचने की आवश्यकता है। परन्तु- पिछले कई सालों से इस महत्वपूर्ण समस्या अतिक्रमण की तरफ नगर पालिका व प्रशासन के जिम्मेदार ओहदेदारों का ध्यान ही नहीं जा रहा है। 

गुमटी, ठेला एवं सड़क से सटे दोनों तरफ के फूटपाथों पर दुकानें सजाकर धन्धा करने वालो द्वारा मुख्य सड़क मार्ग को सरकारी सम्पत्ति न मानकर अपनी खतौनी मान लिया गया है। ये लोग इस पर खाने-पीने के सामानों की बिक्री करने के साथ ही छोटे-मोटे होटल, ढाबे एवं जलपान गृहों का संचालन कर रहे हैं। इन दुकानों पर हमेशा ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ती रहती है। भीड़ को अपने जरूरत के सामानों की खरीद व भूख-प्यास की स्थिति में खाने-पीने (स्वाद चखने व पेट भरने) के सिवाय सड़क पर चलने वाले वाहनों की गति व उनसे होने वाली दुर्घटनाओं की फिकर ही नहीं। नॉनवेज और वेज खाद्य पदार्थो की बिक्री करने वालों द्वारा अपने-अपने ग्राहकों की सुविधा के लिए अपनी दुकानों के आस-पास मेज, कुर्सी, बेंच, स्टूल आदि रखकर सड़क व फूटपाथ पर अतिक्रमण कर लिया जाता है, जिससे संकुचित सड़क पर चलने वाले बड़े व छोटे वाहनों तथा बेतरतीब पैदल यात्रियों की वजह से नगर में जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। 

शाम होते ही काम काज से फुर्सत पाने वाले खाने-पीने के शौकीन ग्राहक इन दुकानों पर आकर बैठ जाते हैं और अण्डा, आमलेट बिरयानी, पुलाव, एगरोल, चिकन रोल, अण्डा करी आदि का चटखारा लेकर स्वाद चखते हैं। मयखाने से लाई गई मदिरा की बोतलों के ढक्कन खोलने व इन्हें गिलासों में उड़ेल कर मय का जाम बनाने वाले ये दुकानदार अपने ग्राहकों का भरपूर ख्याल रखते हैं। मदिरा के शौकीन और पॉकेट से स्ट्रांग ये ग्राहक आवभगत से खुश होकर खाद्य पदार्थ तो खाते ही हैं ऊपर से दुकानदारों को अच्छी टिप्स भी देते हैं..............और क्या चाहिए। ग्राहक तो देवता होता है। यह बात दीगर है कि इन देवतुल्य नशेड़ी लोगों की लगने वाली जमघट से आबादी की कॉलोनियों में प्रवेश करने वाले महिला/पुरूषों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 

अकबरपुर-टाण्डा सड़क मार्ग पर स्थित बसस्टेशन, लोकनिर्माण विभाग कार्यालय (पुराना डाक बंगला), सर्किट हाउस, ब्लाक व कृषि भवन की पश्चिमी दीवार तथा विद्युत वितरण खण्ड अकबरपुर की पूर्वी चहार दीवारी का अता पता ही नहीं लगता। इनके अधिकांश हिस्से क्षतिग्रस्त होकर जमींदोज हो गए हैं, जिनपर गुमटी और ठेला वाले आराम से दुकानें सजाकर धन्धा कर रहे हैं। इसके अलावा सड़क की दोनों पटरियों पर अतिक्रमण इस कदर हावी हो गया है कि मुख्य सड़क मार्ग का अस्तित्व ही सिमटता जा रहा है। परिणाम यह कि संकरी सड़क पर गुजरने वाले वाहनों से जाम की स्थिति तो उत्पन्न ही होती है साथ ही दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है। 

इन ठेले, गुमटी वालों के यहाँ लगी रहने वाली भीड़ से डाक बंगला, ब्लाक, कृषि भवन, विद्युत वितरण खण्ड का बाहरी अस्तित्व मिटता जा रहा है। बाहर से आने वाले लोग इन महत्वपूर्ण कार्यालयों तक पहुँच ही नहीं सकते हैं। यही नहीं वेज व नॉनवेज फास्टफूड/खाद्य पदार्थों की बिक्री वाले ठेलों, गुमटी पर दोपहर बाद से जुटने वाली शराबियों की भीड़ और इनके द्वारा किया जाने वाला उत्पात देर रात तक चलता रहता है, जिससे महिलाओं/युवतियों का इन रास्तों से होकर गुजरना मुश्किल है। 

मुख्य मार्ग होने की वजह से इन सड़कों पर यातायात का दबाव अधिक रहता है और शाम के समय कॉलोनियों में रहने वाले शान्तप्रिय लोगों, महिलाओं, युवतियों का बाजारों में निकलना भी होता है। ऐसे में पी.डब्ल्यू.डी. ऑफिस व सर्किट हाउस के आस-पास के ठेलों/गुमटी/अस्थाई दुकानों पर जमा रहने वाली शराबियों की भीड़ इनके लिए कष्टकारी साबित होती है। ये ठेले, गुमटी वाले इतने मनबढ़ हैं कि इन पर किसी की बातों का भी कोई असर ही नहीं होता। बताया जाता है कि इन पर स्थानीय, प्रभावशाली, दबंग, हैंकड़ लोगों का वरदहस्त होता है जिसके एवज में ये दुकानदार उनकी जमकर आवभगत करने के साथ ही माहवारी के रूप में जेबें भरते हैं। 

हालांकि कुछ दिन पूर्व खण्ड विकास अधिकारी अकबरपुर अरविन्द कुमार ने एक-दो अण्डा, ऑमलेट व फास्टफूड का ठेला लगाने वालों को ब्लाक गेट के सामने अपनी दुकानें सजाने से मना किया था उनका कहना था कि इन दुकानों पर लगने वाली शराबियों की भीड़ से कॉलोनियों में रहने वाले सभ्य शान्तप्रिय लोगों व महिलाओं को परेशानी होती है। बावजूद इसके कुछ दिनों बाद स्थिति फिर पूर्ववत ही हो गई। इसी तरह लोक निर्माण विभाग के प्रान्तीय खण्ड में अधिशाषी अभियन्ता एस.के. लाल से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह विषय अत्यन्त ही गम्भीर है। वह जिलाधिकारी को डाक बंगला व सर्किट हाउस के बाहर चहार दीवारी को अतिक्रमण कारियों से मुक्त कराने के लिए अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाने सम्बन्धी पत्र लिखेंगे। जिला प्रशासन के मुखिया द्वारा तिथि और समुचित पुलिस बल मिलने पर इस क्षेत्र को अतिक्रमणमुक्त कराया जाएगा। 

उल्लेखनीय है कि गत वर्ष कृषि भवन मुख्य द्वार के दोनों तरफ के अतिक्रमण को तत्कालीन उप कृषि निदेशक विनोद कुमार ने अपने प्रभाव से हटवाया था परन्तु उनके स्थानान्तरण उपरान्त उक्त द्वारा और कृषि भवन की पश्चिमी दीवार अतिक्रमण कारियों की चपेट में पुनः आ गई और स्थिति पूर्ववत हो गई। वर्तमान के कृषि अधिकारियों के पास अपनी सरकारी ड्यूटी पूरी करने के अलावा अतिक्रमण की तरफ देखने व सोचने की फुरसत ही नही है। कमोवेश यही हाल विद्युत वितरण खण्ड अकबरपुर और बैंक ऑफ इण्डिया अकबरपुर शाखा के जिम्मेदार ओहदेदारों की भी है। इन्हें अतिक्रमण और उसके दुष्परिणाम से कुछ लेना-देना नहीं है। 

खैर! जिला प्रशासन व नगर पालिका प्रशासन को चाहिए कि वह अतिक्रमण जैसी समस्या पर गम्भीरता से विचार करे और ठोस निर्णय उपरान्त उक्त महत्वपूर्ण स्थानों सहित नगर के मुख्य मार्गो पर हुए और हो रहे अतिक्रमण को हटवाये। यदि ऐसा न हुआ तो अतिक्रमण की चपेट में आए शहर के प्रमुख स्थानों सहित पूरा नगर ही विलुप्त सा दिखेगा और फिर ढूंढते रह जाओगे....यह शत-प्रतिशत चरितार्थ होता दिखेगा। 



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