हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि हरिवंश राय बच्चन
| Rainbow News - Nov 27 2018 12:43PM

-लाल बिहारी लाल/ नई दिल्ली। हरिवंश राय बच्चन का जन्म 27 नवंबर 1907 में इलाहाबाद से सटे जुलाप्रतापगढ़ के एक छोटे से गाँव बाबूपट्टीमें एक कायस्थ परिवार मे हुआ था। इनके पिता का नाम प्रताप नारायण श्रीवास्तव तथामाता का नाम सरस्वती देवी था। इनको बाल्यकाल में 'बच्चन' कहा जाता था जिसका शाब्दिक अर्थ 'बच्चा' या संतान होता है। बाद में ये इसी नाम सेमशहूर हुए। इन्होंने कायस्थ पाठशाला में पहले उर्दूकी शिक्षाली जो उस समय कानून की डिग्री के लिए पहला कदम माना जाता था। उन्होनेप्रयाग विश्वविद्यालय से अंग्रेजीमें एम ए. और कैमव्रिज विश्वविद्यालय से अग्रैजी साहित्य में के विख्यात कवि डब्लू बी यीट्स की कविताओं पर शोध कर पी.एच.डी. पूरी की फिर स्वदेश आ गये और भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में हिन्दी विशेषज्ञ रहे। औऱ राज्य सभा के मनोनीत सदस्यभी रहे। बच्चन जी की गिनती हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय कवियों में होती है।

1926 में 19 वर्ष की उम्र में उनका विवाह श्यामा बच्चन से हुआ जो उस समय 14वर्ष की थीं। लेकिन 1936 में श्यामा की टी.वीके कारणमृत्यु हो गई। पांच साल बाद 1941 में बच्चन ने एक पंजाबन तेजी सूरी से विवाह कियाजो रंगमंच तथा गायन से जुड़ी हुई थीं। इसी समय उन्होंने 'नीड़ का पुनर्निर्माण' जैसे कविताओं की रचना की।तेजी बच्चनसे अमिताभतथा अजिताभ दो पुत्र हुए। अमिताभ बच्चन एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं। तेजी बच्चन नेहरिवंश राय बच्चन द्वारा शेक्सपियर के अनूदित कई नाटकों में अभिनय का काम किया है।

हरिवंश राय श्रीवास्तव "बच्चन” हिन्दी भाषा के एक कविऔर लेखक थे।'हालावाद' के प्रवर्तक बच्चन जी हिन्दी कविता के उत्तरछायावाद काल के प्रमुख कवियों मे से एक हैं। उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति मझुशालाहै। भारतीय फिल्म उद्योग के प्रख्यात अभिनेताअमिताभ बच्चनउनके सुपुत्र हैं। उनकी कृति दो चटानें को 1968 में हिन्दी कविता का साहित्य अकादमीपुरस्कार से सम्मनित किया गया था। इसी वर्ष उन्हेंसोवियत लैंड नेहरु पुरस्कारतथा एफ्रो एशियाई सम्मेलन के कमल पुरस्कार सेभी सम्मानित किया गया। विडला फांउडेशन ने उनकी आत्मकथा चार खंडों के लिये उन्हेंपहला सरस्वती सम्मान(1991) दिया था। बच्चन को भारत सरकार द्वारा 1976 में साहित्य एवं शिक्षाके क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

उनकी प्रमुख कृतियों में-

कविता संग्रह- तेरा हार (1929), मधुशाला(1935), मधुबाला(1936), मधुकलश(1937), निशानिमंत्रण (1938). एकांत संगीत (1939), आकुल अंतर (1943), सतरंगिनी (1945), हलाहल (1946),. बंगाल का काव्य (1946), खादी के फूल (1948), सूत की माला (1948), मिलन यामिनी (1950), प्रणय पत्रिका (1955), धार के इधर उधर (1957), आरती और अंगारे (1958), बुद्ध और नाचघर (1958), त्रिभंगिमा (1961), चार खेमे चौंसठ खूंटे (1962), दो चट्टानें (1965), बहुत दिन बीते (1967), कटती प्रतिमाओं की आवाज़(1968), उभरतेप्रतिमानों के रूप (1969), जालसमेटा (1973) आदी।

आत्मकथाओं में- क्या भूलूँ क्या याद करूँ(1969), नीड़ कानिर्माण फिर (1970),. बसेरेसे दूर (1977),बच्चनरचनावली के नौ खण्ड (1983), दशद्वारसे सोपान तक (1985) आदी सहित सौकड़ो छिटपूट कवितायें बिभिन्न स्र्तरो एवं पत्रपत्रिकायें में प्रकाशित हुई थी। इस लोकप्रिय कवि कानिधन 18 जनवरी 2003 को मुम्बई में लंबी बिमारी के कारण हुआ।

-लाल बिहारी लाल, सचिव लालकला मंच, बदरपुर, नई दिल्ली



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