गन्ना किसान अपनी समस्या सीधे हमसे बताएँ: रामजी गुप्ता
| Posted by- Editor - Nov 30 2018 5:28PM

हमारा देश भारत कृषि प्रधान देश है और उत्तर प्रदेश एक ऐसा प्रान्त है जहाँ तीन फसल चक्रों में धान, गेहूँ, गन्ना एवं दलहन (रबी, खरीफ, जायद) तथा सब्जियों की प्रचुर मात्रा में पैदावार कर यहाँ का किसान खुशहाल जीवन जीता है और उत्तर प्रदेश का किसान (उत्तम खेती, मध्यम बान। निषिध चाकरी, भीख निदार।।) को अपना मूल-मंत्र मानता है। इस समय किसान अपने दो उत्पादों की सरकारी समर्थन मूल्य पर बिक्री करने के लिए बेताब है और ऐसे में वह अपने गाढ़े पसीने की कमाई का उचित मूल्य हर हाल में पाना चाहता है। हम बात कर रहे हैं धान, और गन्ने जैसी नकदी फसल (कैश क्राप) की। धान खरीद की मॉनीटरिंग जहाँ जिला खाद्य विपणन महकमें द्वारा की जा रही है वहीं गन्ने की बिक्री की निगहबानी गन्ना विकास परिषद कर रहा है। 

उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद में गन्ना किसानों के उत्पाद की खरीद अकबरपुर चीनी मिल्स (मिझौड़ा) द्वारा की जाती है। इस कार्य में गन्ना विकास परिषद अकबरपुर (मिझौड़ा) किसानों और मिल के बीच सेतु का काम करता है। आज हम गन्ना विकास परिषद अकबरपुर के मुखिया ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक रामजी गुप्ता के बारे में लिख रहे हैं, जिनसे हमने एक संक्षिप्त मुलाकात किया है। रामजी गुप्ता अपने अकबरपुर स्थित गन्ना विकास परिषद कार्यालय के कक्ष में किसानों की समस्याओं से रूबरू होकर उनका निराकरण करने में मशगूल रहे। 

रामजी गुप्ता अम्बेडकरनगर के गन्ना विकास परिषद अकबरपुर में ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। अम्बेडकरनगर में इनकी तैनाती 14 मई 2018 से है। अतिव्यस्तता के बावजूद सौम्य, मिलनसार व मृदुभाषी स्वभाव के धनी रामजी गुप्ता ने अपने बारे में संक्षिप्त में जो कुछ भी बताया वह इस तरह है। गुप्ता के अनुसार उनका जन्म तमकुहीराज, जिला कुशीनगर निवासी भोला प्रसाद गुप्ता व कोशिला देवी की द्वितीय सन्तान के रूप में 1974 में हुआ। वह तीन भाई व एक बहन में दूसरे नम्बर पर हैं। उनकी प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा तमकुही राज, कुशीनगर में हुई और उच्च शिक्षा एम.एस.सी. ए.जी. (एग्रोनॉमी) वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्व विद्यालय, जौनपुर (उ.प्र.) से प्राप्त किया।

विभागीय सेवा में वर्ष 2013 में आने वाले रामजी गुप्ता की पहली तैनाती जनपद देवरिया-प्रतापपुर में ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक के रूप में हुई। इसके उपरान्त दूसरी पोस्टिंग 14 मई 2018 में अम्बेडकरनगर में उसी पद पर हुई। उनका मानना है कि वर्तमान परिदृश्य में किसी भी सरकारी व संगठन में काम करने वाले मुलाजिम बड़ा साहब व अधीनस्थ कर्मचारी नहीं हैं। मित्रवत व मैत्रीभाव से समस्त कार्यों का सम्पादन व निष्पादन सुचारू रूप से किया जा सकता है। वह भी किसी को अपना अधीन नहीं मानते यही कारण है कि समस्त सहकर्मी गण अपना कार्य बखूबी व त्वरित ढंग से करते हैं। 

रामजी गुप्ता ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक ने संक्षिप्त मुलाकात में रेनबोन्यूज से बातें करते हुए कहा कि जिले का कोई भी गन्ना किसान परेशानी से दो-चार नहीं होगा। हमें मालूम है कि कृषि श्रम साध्य है और किसान अपना तन-मन-धन अर्पित कर धरती का सीना चीर कर कृषि उत्पाद लेता है। इसलिए वह अन्नदाता कहलाता है। हम भी उसकी गाढ़ी कमाई का उचित विक्रय और मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जिले के सभी गन्ना किसानों का भूखण्ड सर्वेक्षण करवाकर पंजीकरण कराकर सट्टा बनवा दिया गया है ताकि चीनी मिल से समय-समय पर पर्ची प्राप्त कर वे अपने निकटतम गन्ना क्रय केन्द्रों अथवा मिल गेट ले जाकर गन्ने की तौल कराकर उनकी बिक्री कर सकें। सरकार के आदेशानुसार चीनी मिल प्रबन्धन द्वारा किसानों के गन्ने का भुगतान उनके बैंक खातों में त्वरित रूप से किया जा रहा है। जिले के लगभग 15 हजार किसानों के गन्ने का बकाया मूल्य रूपये 38 करोड़ अकबरपुर चीनी मिल्स, मिझौड़ा द्वारा उनके खातों में भेज दिया गया है, अब किसी भी किसान का बकाया नहीं रह गया है। 

ज्येष्ठ गन्ना निरीक्षक गुप्ता ने कहा कि पंजीकृत और सट्टा धारक गन्ना किसान धैर्य से काम लें। अपने उत्पाद की बिक्री क्रशरों पर औने-पौने दामों में न करें। इन्डेन्ट के अनुसार मिल से पर्ची आने का इंतजार करें। अपने निकटतम अथवा मिल गेट स्थित गन्ना क्रय केन्द्र पर जाकर सरकारी समर्थन मूल्य पर गन्ना की बिक्री करें। उन्होंने गन्ना किसानों से कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या आने पर किसान सीधे उनसे सम्पर्क करें। वह पेराई सत्र भर 24 घण्टे उनके लिए उपलब्ध रहेंगे। गन्ना क्रय केन्द्रों पर कथित रूप से की जाने वाली घटतौली के बारे में उन्हें जरूर सूचित करें। क्रय केन्द्रों पर शान्तिपूर्ण ढंग से अपनी उपज बेंचे। हम हैं ना................उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए प्रतिबद्ध और तत्पर। 



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