छः सूत्रीय मांगों को लेकर विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने किया धरना-प्रदर्शन
| Rainbow News - Dec 14 2018 5:37PM

उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति लखनऊ के आह्वान पर महत्वपूर्ण छः सूत्रीय माँगों को लेकर विद्युत कर्मियों द्वारा प्रदेश के समस्त जिला/मण्डल कार्यालयों पर गुरूवार 13 दिसम्बर 2018 को एक दिन का धरना-प्रदर्शन किया गया। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के जनपद अम्बेडकरनगर में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की जिला इकाई ने अकबरपुर विद्युत वितरण खण्ड परिसर में समिति के जिला संयोजक/विद्युत कर्मचारी नेता राजेश यादव की अगुवाई में धरना-प्रदर्शन किया। इस धरने में दर्जनों विद्युत कर्मियों ने भाग लिया। 

धरना-प्रदर्शन मौके पर वक्ताओं ने कहा कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का पुर्नगठन किया जाए। इलेक्ट्रिीसिटी (एमेण्डमेन्ट) बिल 2018 वापस लिया जाए। आगरा फ्रेन्चाइजी व ग्रेटर नोयडा का निजीकरण निरस्त किया जाए। सरकारी क्षेत्र के बिजली उत्पादन गृहों का नवीनीकरण व उच्चीकरण किया जाए। निजी घरानों से महंगी बिजली खरीद हेतु सरकारी बिजली घरों को बन्द करने की नीति समाप्त की जाए। बिजली कर्मियोें की वेतन विसंगितयों का तत्काल द्विपक्षीय वार्ता द्वारा निराकरण किया जाए। वर्ष 2000 के बाद भर्ती सभी कार्मिकों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली लागू की जाए। सभी श्रेणी के समस्त रिक्त पदों पर नियमित भर्ती की जाए, और नियमित प्रकृति के कार्यों में संविदा व ठेकेदारी प्रथा समाप्त कर संविदा कर्मियों को तेलंगाना सरकार के आदेश की तरह नियमित किया जाए। 

उक्त बातें विद्युत वितरण खण्ड अकबरपुर परिसर में आयोजित धरने को सम्बोधित करते हुए राम बहादुर उपाध्याय और राजेश यादव जिला संयोजक, उत्तर प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति ने कहीं। कर्मचारी नेताद्वय ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही उनकी मांगे न मानी गईं तो आगामी दिनों में बड़ा आन्दोलन छेड़ा जाएगा। 

उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेन्द्र दूबे ने रेनबोन्यूज को दूरभाषीय वार्ता में बताया कि विद्युत कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करते हैं। बावजूद इसके उनका उत्पीड़न किया जाता है। आए दिन उनके साथ अभद्रता की जाती है, जिस पर अंकुश लगाए जाने के लिए समय-समय पर आवाज भी उठाई जाती है परन्तु हमारी आवाज हमेशा दबा दी जाती है, हमारी समस्याओं के निराकरण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। 

उन्होंने कहा कि लम्बे समय से विद्युत कर्मियों के हित में उक्त मांगे सरकार के समक्ष प्रस्तुत की जा रही परन्तु न तो सरकार और न ही जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान दे रहे हैं। मजबूरन संघर्ष समिति अपनी मांगों को लेकर बड़ा आन्दोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगा। अभी भी समय है सरकार/यू.पी.पी.सी.एल. के जिम्मेदार ओहदेदार चेत जाएँ। 



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