रसूल ने कहा फात्मा मेरे वजूद का हिस्सा : मौलाना सैयद जफर अली रिजवी 
| -Ali Askari Naqvi - Feb 11 2019 12:42PM

अंबेडकरनगर। कायनात की तीन मजलूम बेटियों में रसूले खुदा की बेटी बीबी फातिमा जहरा, मुसलमानों से अपना हक मांगती रहीं नहीं मिला। मौला अली की बेटी जनाबे जैनब, चादर मांगती रहीं नहीं मिली और इमाम हुसैन की मासूम बेटी जनाबे सकीना, पानी मांगती रहीं नहीं मिला। यह इस्लामी तारीख की बेहद दर्दनाक घटना है।

उक्त विचार मौलाना सैयद जफर अली रिजवी ने नगर स्थित राजकीय उद्यान के करीब रौजा फात्मेन में अंजुमन अकबरिया मीरानपुर द्वारा अय्यामे अजा के तीन दिनी मजलिस कार्यक्रम की आखिरी मजलिस को खेताब करते हुये व्यक्त किया। मौलाना जफर अली रिजवी ने प्रामाणिक पुस्तक बिहार-उल-अनवार के हवाले से कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब का कथन है कि फात्मा मेरे वजूद का हिस्सा हैं। जिसने इनको प्रसन्न किया उसने हमें खुश किया। जिससे यह दुखी होंगी उससे मेरा दुखी होना स्वभाविक है। फात्मा मेरे लिए तमाम प्राणियों से अधिक प्रिय हैं।

उन्होंने पुस्तक दलाएल उल इमामा के पृष्ठ संख्या 71 में दर्ज जनाबे फात्मा के फर्मान के हवाले से कहा कि कंजूसी से  बचो, क्योंकि यह जहन्नुम का दरख्त है। जिसकी शाखे दुनिया में है और जो भी इस शाख को पकड़ेगा वह शाख उसे जहन्नुम में दाखिल कर देगी। कहा गया कि बीबी फातिमा जहरा एक बेहतरीन वक्ता भी थीं। वह बिल्कुल इमाम अली की तरह खूबसूरत अंदाज में बेहतरीन अल्फाज और मीठी जबान में तकरीर करती थीं। वह सदा सत्य वचन बोलतीं तथा ऐसी बातें कहतीं, जो अरब के बड़े-बड़े सूरमा भी कहने का साहस नहीं रखते थे। उन्होंने महिलाओं को दर्स दिया कि वह जिंदगी के हर मैदान में आगे रहें। चाहे वह शिक्षा हो, घरदारी हो अथवा वफादारी हो।

डॉ0 आमिर अब्बास उर्फ लकी, दानिश अली, जहबी रिजवी, रेहान, इफ्तिखार हुसैन, रजी, आमिर रिजवी आदि ने कलाम प्रस्तुत किए। नौहाखानी मीसम ने किया। हाजी सज्जाद हुसैन रिजवी, संस्था के सचिव हसन अस्करी मजलिसी, डा0 कासिम हुसैन कासिद अकबरपुरी, साजिद हुसैन नकवी, अबरार हुसैन, कर्रार हुसैन, आशू , अलमदार हुसैन, अख्तर हुसैन, तस्वीर हुसैन,जौवाद हुसैन, हसीन, हसन रजा,आसिम हैदर, सज्जाद अस्करी, मोहम्मद हैदर, जौन रिजवी, अनवर हुसैन लड्डू , मेहदी रजा, एहतेशाम हुसैन, मोहम्मद अब्बास, सिरताज हुसैन राजा सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।



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