हिन्दी फ़िल्मी गीतों में कविता की ऊँचाई
| Rainbow News - Mar 4 2019 3:17PM

प्रगतिशील लेखक संघ,वाराणसी द्वारा 'क' the art gallery में दिनांक 28.02.19 को विविध भारती के विख्यात रेडियो उद्घोषक यूनुस ख़ान और कथाकार ममता सिंह का वक्तव्य आयोजित किया गया। यूनुस ख़ान और ममता सिंह लम्बे समय से विविध भारती से जुड़े हुए हैं।संचार और सूचना क्रांति के इस दौर में तमाम माध्यमों के बावजूद विविध भारती अब भी आमजन से सरोकार रखने वाला माध्यम है। यूनुस ख़ान ने पुरानी हिन्दी फिल्मों से लेकर अब तक के अनेक गीतकारों, संगीतकारों पर साहित्यिक ऊंचाईयों,सौन्दर्यनुभूति और आस्वादन के स्तर अपना वक्तव्य दिया।

उन्होंने कहा भरत व्यास,शैलेन्द्र, साहिर लुधियानवी,मजरूह सुल्तानपुरी, इरशाद कामिल और वरुण ग्रोवर तक के अनेक उदाहरण देकर यह साबित किया कि इन गीतकारों ने फ़िल्म और ग्लैमर की दुनिया मे रहकर भी अपने भीतर के शायर/कवि को बचाये रखा और बड़ी महीन पंक्तियां लिखीं। सामाजिक मुद्दों पर लिखा। इनके गीत नारे बन गए। शैलेन्द्र को फिल्मी दुनिया मे सिनेमाई कबीर की तरह देखा।उन्होंने कहा बहुत कम लिखने वाले गीतकार योगेंद्र ने अपने गीतों में वह लिखा जो हिन्दी की साहित्यक दुनिया मे विरल हो सकती है लेकिन हम कही न कहीं आज भी सिनेमा साहित्य और संगीत को दोयम दर्ज़े से देखते हैं।

उन्होंने कहा शैलेन्द्र,साहिर,कैफ़ी आज़मी और मखदूम मुहीउद्दीन जन सामान्य के लेखक हैं जिनमें हमारी साहित्यिक विरासत है। रेडियोसिलोन,विविधा,त्रिवेणी,वन्दनवार,जयमाला,छायागीत जैसे साहित्यिक और स्तरीय कार्यक्रमों को जनमानस तक पहुँचाकर लोकप्रिय बनाने में जिन रेडियो उद्घोषकों के नाम लिए जाते हैं वर्तमान समय में वह कार्यभार यूनुस ख़ान और ममता सिंह बख़ूबी संभाल रहे हैं।सखी-सहेली एक ऐसा कार्यक्रम है जो भारत की गांव-गिरांव की कामगार महिलाओं तक पहुंचा है जिसमे ममता सिंह जैसी उद्घोषिका ने अपने बातचीत के तरीके और आत्मीयता के साथ उन स्त्रियों में विचार बोने का काम करती रही हैं।इन्हीं अनुभवों के आधार पर ममता सिंह ने हिन्दी कहानी में कदम रखा है अपने पहले कहानी संग्रह 'राग मारवा' के साथ।

कार्यक्रम में उन्होंने कुछ कहानियों के छोटे छोटे अंशों का पाठ किया और और कहानी की दुनिया पे बातचीत की।रेडियो,सम्प्रेषण माध्यमों और कहानी के समय को लेकर युवा साथियों और विद्यार्थियों ने उनसे ढेर सारे प्रश्न किए।कार्यक्रम में विभिन्न विषयों और अनुशासनों के विद्यार्थियों ने भागीदारी की।आयोजन में प्रो.संजय कुमार,डॉ.गोरखनाथ,डॉ संजय श्रीवास्तव,डॉ. शिवानी गुप्ता, कुसुम वर्मा,डॉ. आशीष कुमार,श्री मिठाईलाल आदि उपस्थित रहे।कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष हिन्दी विभाग, BHU प्रो.बलिराज पांडेय ने की।स्वागत डॉ.प्रभाकर सिंह और धन्यवाद डॉ. नीरज खरे ने दिया।संचालन और संयोजन डॉ. वन्दना चौबे ने किया।

-Kamta Prasad



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