'मुक्तिबोध की वैचारिकी' विषय पर संगोष्ठी आयोजित
| Rainbow News - Mar 13 2019 2:51PM

वाराणसी। प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से 'मुक्तिबोध की वैचारिकी' विषय पर आयोजित संगोष्ठी में विख्यात विचारक, समाज वैज्ञानिक और राजनीतिक विश्लेषक अभय कुमार दुबे, प्रोफ़ेसर और निदेशक, भारतीय भाषा कार्यक्रम, विकासशील समाज अध्ययन पीठ(CSDS) नई दिल्ली ने  अपना महत्वपूर्ण व्यख्यान दिया।काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एनीबेसेन्ट सभागार में आयोजित उक्त व्याख्यान में मुक्तिबोध की कविताओं और लेखों का हवाला देते हुए प्रोफ़ेसर अभय दुबे ने उन पंक्तियों की ओर इशारा किया जहाँ आभिजात्य दबाव के कारण अप्रत्यक्ष सामूहिक चुप्पियां बनती हैं।

यह सामूहिक  चुप्पी भारतीय लोकतंत्र की नींव को कमज़ोर करने का काम करती है।मुक्तिबोध ऐसे कवि हैं जिन्होंने लगातार मध्यवर्गीय चुप्पियों पर निशाना साधा है।उन्होंने कहा कि मुक्तिबोध जितना अपनी कविताओं के कारण जीवित हैं उतना वैचारिक लेखन से नहीं।जबकि उनके कथा साहित्य और लेख पर्याप्त विचार  सघन है। भक्तिकाल पर लिखे उनके लेख 'भक्ति आंदोलन का एक पहलू'  पर अभय जी ने कुछ सवालिया निशान भी लगाए और कहा कि इस एक लेख ने हिंदी साहित्य जगत की धारा मोड़ने में बड़ा महत्वपूर्ण कार्य किया है। मुक्तिबोध के इस लेख ने  तथाकथित मार्क्सवादी आलोचना के लिए एक तरह के सरलीकरण का रास्ता खोल दिया।

इन्हीं आधारों को लेते हुए उन्होंने भक्तिकाल पर विस्तृत चर्चा की।उन्होंने भक्तिकालीन हिंदी आलोचना के माध्यम से इतिहास लेखन की समस्याओं और मार्क्सवादी आलोचना की खेमेबंदियों पर भी बात किया।विमर्शों के सामान्यीकरण और त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर उन्होंने यह बात जोर देकर कहा कि इस सरलीकरण की प्रक्रिया से हम आलोचना की पुरानी ज़मीन खो देंगे और सम्प्रदायवाद और फ़ासीवाद से लड़ने के अनेक मज़बूत तर्क और प्रमाण भी खो देंगे। इस अर्थ में उन्होंने वेदों को महत्वपूर्ण माना। वेदों के बाद योजनाबद्ध ढंग से समाज को जातीय और समुदाय सम्बन्धी नियंत्रण में बांधा गया। प्रबुद्ध श्रोताओं ने ऐसे कई बिंदुओं पर उनसे सवाल जवाब किए।उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि मुक्तिबोध जैसे विचारवान मज़बूत लेखक पर समाज वैज्ञानिक तरीके से काम होना चाहिए।इससे भ्रांतियों की कई परतें खुलेंगी।

इस अवसर पर प्रोफ़ेसर अवधेश प्रधान,प्रोफ़ेसर बलिराज पांडेय,प्रोफेसर आशीष त्रिपाठी, प्रोफेसर अर्चना कुमार,डॉ वन्दना चौबे,डॉ प्रभाकर सिंह,डॉ नीरज खरे, डॉ ओमप्रकाश, डॉ डी. के.ओझा, प्रोफेसर आनंद दीपायन डॉ सत्यपाल शर्मा,डॉ सुमन जैन,डॉ आभा गुप्ता ठाकुर तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे। अध्यक्षता प्रोफ़ेसर संजय कुमार ने की। धन्यवाद प्रोफ़ेसर राजकुमार ने तथा संचालन डॉ गोरखनाथ ने किया।

-डॉ. गोरख नाथ/ डॉ.वंदना चौबे



Browse By Tags



Other News