आखिर अकबरपुर नपाप के ई.ओ. का मूड ऑफ क्यों.....?
| Posted by- Editor - Mar 19 2019 4:15PM

बसन्त ऋतु और फागुन का महीना..............ये दोनों मादकता उत्पन्न करने के लिए जाने जाते हैं। इन दोनों की वजह से हर आयु वर्ग के लोग (मानव प्राणी) अपने स्वयं के नियंत्रण में भी नहीं रहते हैं। फिज़ा में मादकता और एक अजीब तरह का उल्हास व्याप्त रहता है। यह क्रम होलिकोत्सव के महीनों पूर्व और समापन उपरान्त तक कायम रहता है। जवां ही नहीं हर उम्र के लोग इस मौसम में चीयरफुल मूड में  रहते हैं। इस मौसम में मूड खराब होना एक अजीब और अलग बात है। साहबों का मूड खराब या आफ होना सुना तो था कभी-कभी इसकी अनुभूति भी होती रहती है। 

सूबे उत्तर प्रदेश के जनपद अम्बेडकरनगर की अकबरपुर नगर पालिका में अधिशाषी अधिकारी की कुर्सी पर विराजमान सुरेश कुमार मौर्य पूरे बसन्त और फागुन माह में डिस्टर्ब चल रहे हैं ऐसा उनके मुँह से अनेकों बार सुना गया। जुलाई 2017 से अब तक मौर्य ने वर्ष 2018 में रंगोत्सव का लुत्फ उठाया था परन्तु इस बार वह बात नहीं दिख रही है जैसा कि होनी चाहिए। उनका मूड खराब व ऑफ रहने के पीछे का सबब तो नहीं मालूम परन्तु एक युवा सरकारी अफसर यदि ऑफ मूड में रहे तो यह शोचनीय अवश्य हो जाता है। यहाँ बताना है कि इस समय आम चुनाव 2019 को लेकर जिला प्रशासन काफी सक्रिय हो चुका है। जिसके मुँह से सुना जाता है तो वही कहता हुआ मिलता है कि चुनाव ने जीना दूभर कर रखा है। हालांकि हम जिस व्यक्ति का जिक्र कर रहे हैं उन्होंने इस तरह की कोई बात नहीं कही है। 
रेनबोन्यूज ने होली की शुभकामना देने के लिए जब सुरेश कुमार मौर्य को फोन किया और पूछा कि आप अपने कार्यालय के चैम्बर में हैं तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऑफिस में तो हूँ, लेकिन मूड ऑफ है, बहुत डिस्टर्ब हूँ। ऐसा क्यों पूंछने पर उन्होंने कहा है कुछ बात.......। उनकी बात सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि एक युवा व चुस्त-दुरूस्त सरकारी अफसर इतना डिस्टर्ब क्यों है.......? 

इस बावत नगर पालिका परिषद कार्यालय के कई कर्मचारियों से बात की गई तो सभी ने ई.ओ. के मूड ऑफ होने की जानकारी से अनभिज्ञता प्रकट की। अकबरपुर नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रतिनिधि मनोज गुप्ता एडवोकेट से बात की गई और बताया गया कि ई.ओ. मौर्या का मूड ऑफ क्यों है, क्या इसका कारण आपको मालूम है......? तो उन्होंने कहा कि- मुझे तो जानकारी नहीं हैं, अभी पता करता हूँ। 

युवा अधिशाषी अधिकारी का मूड ऑफ हो जाना और मीडिया से मिलने व बात करने से कतराना इस फागुनी मौसम में अवश्य ही जिज्ञासा का विषय बन गया है। इनके कार्यकाल के दौरान नगर निकाय चुनाव हुए और उसके उपरान्त नया परिषद गठन हुआ। बीच-बीच में विकास कार्यों में घपले-घोटाले, धांधली की भी बातें मीडिया में आती रहीं किन्तु उस दौरान ई.ओ. सुरेश कुमार मौर्य इतना डिस्टर्ब नहीं दिखे थे जितना कि इस समय बता रहे हैं। 

हम तो मीडिया से हैं जाहिर सी बात है कि जब कोई महत्वपूर्ण पद पर बैठा हुआ ओहदेदार इस तरह की बातें करेगा तब हम सोचने को विवश हो जाएँगे कि कहीं न कहीं कुछ न कुछ बात तो जरूर है। बहरहाल हम ई.ओ. मौर्य के अच्छे मूड के लिए गॉड से प्रे करते हैं। इसी बीच किसी ने कहा कम से कम मई 2019 के अन्त तक ई.ओ. मौर्य को अपना मूड व सेहत दोनों ठीक रखना होगा। -रीता



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