इलाहाबाद संसदीय सीट से चुनाव लड़ सकते है संजय दत्त 
| Rainbow News Network - Mar 24 2019 2:59PM

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में भाजपा को घेरने में जुटी कांग्रेस पार्टी इलाहाबाद संसदीय सीटों पर बड़ा दांव चल सकती है। चर्चा है कि कांग्रेस एक बार फिर फिल्मी दुनिया के ग्लैमर के सहारे इलाहाबाद संसदीय सीट को वापस पाना चाहती है। कांग्रेस इस सीट पर फिल्म अभिनेता संजय दत्त को उम्मीदवार बनाए जाने के संकेत दिए है और किसी भी समय इसकी घोषणा कर सकती है। आपको बता दें कि संजय दत्त का इलाहाबाद से पुराना नाता रहा है।

प्रियंका गांधी ने विशेष तौर पर इसके लिए संजय दत्त की बहन प्रिया दत्त से मुलाकात की थी और संजय को चुनाव मैदान में उतारने की अपनी मंशा जाहिर की थी। चूंकि प्रिया दत्त काफी समय पहले से ही संजय को चुनाव में उतारने के लिए प्रयासरत थी और कई बार वह कांग्रेस को प्रपोजल भी दे चुकी थी। लेकिन खुद संजय दत्त इस कदम से पीछे हट रहे थे, जिसके कारण संजय का राजनीति में आने का फैसला अधर में लटका हुआ था। प्रियंका के सक्रिय राजनीति में उतरने के बाद कांग्रेस में बदलाव की जो किरण नजर आ रही है, उसी के साथ संजय की भी सियासी पारी शुरू करने की योजना बनायी गयी है।

संजय दत्त को इलाहाबाद संसदीय सीट से उतारने के पीछे अमिताब बच्चन की ही तरह उनका इस शहर से पुराना नाता विशेष कारण है। दरअसल संजय दत्त का यहां पर ननिहाल है और आज भी उनके हर सुख दुख में यहां के लोगों संजय के लिए दुवाओं से लेकर आवाज उठाने तक में पीछे नहीं रहते। शहर के मेजा तहसील क्षेत्र में चिलबिला गांव पडता है। इसी गांव में संजय दत्त का ननिहाल है। जहां उनकी मां नरगिस दत्त पली बढी और फिर मुंबई की मशहूर अदाकारा बनी। संजय की नानी जद्दन बाई की हवेली अभी भी इस गांव में मौजूद है, हालांकि वह पूरी तरह से खंडहर हो चुकी है, लेकिन आज भी लोग इसे उनकी निशानी के तौर पर देखकर याद करते हैं।

यह गांव पिछले साल उस वक्त चर्चा में आया था जब संजय दत्त ने चिलबिला गांव को गोद लेने के लिये उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर अपनी मंशा जाहिर की थी। हालांकि उनकी यह मंशा किन्हीं विशेष कारणों के चलते परवान तो नहीं चढी लेकिन संजय के इस कदम से गांव व इलाके के लोग गदगद रहे और मीडिया ने भी इस पर खूब सूर्खियां चलायी थी। गौरतलब है कि जब संजय दत्त के पिता सुनील दत्त इस दुनिया में थे तो वह कई बार इस गांव में आये। नरगिस भी अपने घर कई बार सुनील के साथ ही आयी थी। नरगिस दत्त की मौत के बाद उनकी याद में सुनील दत्त ने इस गांव में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना कराई थी। जिसे लोग आज नरगिस की निशानी के तौर पर देखते हैं। ऐसे में संजय दत्त को बाहरी बताकर उन पर हमला करना किसी भी राजनैतिक दल के लिये आसान नहीं होगा।

कांग्रेस के सबसे पुराने गढ में कांग्रेस के वोटो की संख्या भले ही मौजूदा समय में कम हो लेकिन संजय दत्त का स्टारडम कांग्रेस के मृतकाय शरीर में संजीवनी फूंक सकता है। भीड जुटाने और भीड को वोट में तब्दील करने की कला संजय में नजर आती है और वैसे भी राजनीति उनके खून में है और नेता बनने के पीछे उनके पिता की छोडी हुई विरासत भी है। वैसे भी कांग्रेस के टिकट पर डेढ लाख से अधिक वोट बटोर कर पिछले चुनाव में नंद गोपाल गुप्ता ने यह साबित भी कर दिया था कि इलाहाबाद में कांग्रेस के लिऐ अभी भी बहुत कुछ बचा हुआ है। ऐसे में अगर संजय इलाहाबाद चुनाव लड़ने आते हैं तो एक बार फिर से कांग्रेस का यह सबसे पुराना किला उठ खडा होगा, ऐसी पूरी संभावना है।

भारतीय सविंधान में मौजूद R.P Act 1951 (Representation of the People Act, 1951) के अनुसार ऐसा कोई भी व्यक्ति जिसे 2 साल या उससे ज्यादा की सज़ा हुई है (सेक्शन 8(3)), भारत में कोई भी संसदीय या विधानमंडल स्तर का चुनाव नहीं लड़ सकता है। संजय दत्त को मुंबई में हुए बम धमाकों में गैर कानूनी तरीके से हथियार रखने का दोषी पाया गया था और उन्हें 6 साल की जेल हो चुकी है। ऐसे में वो भारतीय लोकतंत्र में वोटिंग तो कर सकते हैं लेकिन वो चुनाव में खड़े नहीं हो सकते हैं। वहीं, महानगर कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष नफीस अनवर ने बताया कि संजय दत्त के नाम पर सभी की सहमति है।



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