रटी-रटायी बातें दोहराते नेता ......
| Rainbow News - Apr 6 2019 12:49PM

-ओम प्रकाश उनियाल/ शायद हमारे नेताओं को भाषणों में बार-बार रटी-रटायी बातें दोहराने की आदत-सी पड़ गयी है। इनकी सोच यह दर्शाती है कि जनता कुछ नहीं जानती, कुछ नहीं समझती। जनता को जिस तरह जिधर मर्जी हांक लो। चुनावी माहौल में जनता को बेवकूफ बनाना बहुत आसान होता है।  देश में समस्याएं अधिक हैं जिन्हें ज्यादातर नेता केवल भाषणबाजी कर हल कर देते हैं।

वैसे चुनाव के वक्त नेताओं को वे सब बातें याद आ जाती हैं जिनके बारे में वह कभी सोच भी नहीं सकते। चुनावी भाषणों में स्थानीय मुद्दे गौण रहते हैं।  बेतुकी भाषणबाजी ज्यादा छायी रहती है। हर नेता अपनी शेखी बघारता फिरता है। जो वास्तविक समस्याएं होती हैं उन पर बात करना तो नेता मूर्खता समझते हैं। क्योंकि इससे उन्हें अपनी पोल खुलने का भय बना रहता है।

जनता का हाल यह होता है कि जानते और समझते हुए भी नेताओं के  झूठे भाषणों पर तालियां ठोकनी ही है। झूठ के पुलिदें थामे नेताओं को सच्चाई का रास्ता दिखाने में न जाने जनता क्यों पीछे हटती है। यही कारण है कि आजादी से लेकर अब तक अनेकों समस्याएं जस की तस मुंह बाए खड़ी हैं।

जब तक देश का नागरिक नहीं जागेगा तब तक झूठ का इतिहास बार-बार दोहराने वाले नेताओं का एकाधिकार बना रहेगा। नेताओं को समझना चाहिए कि 'काठ की हांडी बार-बार चूल्हे पर नही चढ़ती' और 'झूठ के पांव नहीं होते'।



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