उत्तराखंड में सीमित रहा चुनाव प्रचार
| - Om Prakash Uniyal - Apr 9 2019 12:24PM

उत्तराखण्ड में लोकसभा चुनाव प्रचार में    मतदाताओं की जुबान पर मोदी व राहुल का ही नाम चढ़ा रहा। हाथ व कमल का कम। मोदी की चुनावी जनसभाओं में मोदी....मोदी... और राहुल की जनसभाओं में राहुल.....राहुल... के नारे गूंजते रहे। दलों के समर्थक भी इन्हीं के नाम की माला जपते रहे। प्रत्याशी कौन है किसी को कोई मतलब नहीं?

बस भाजपा के मोदी और कांग्रेस के राहुल जिन्दाबाद... जिन्दाबाद। इस बार प्रचार भी हल्का रहा। जनसभाओं तक सीमित रहा। कहीं-कहीं रैलियां भी निकली कम। मगर शोर-शराबा थमा रहा। डंडे-झंडे, पोस्टर-बिल्ले, लाउडस्पीकर की चिल्ला-पौं भी खास नहीं, बस खामोश प्रचार।  

 हाथी भी चिंघाड़ मारता रहा और साईकिल भी दौड़ती रही। लेकिन उतराखंड के मैदानी इलाकों तक सीमित होकर। हाथी पहाड़ चढ़ने में हांफता रहा और साईकिल का पहाड़ की सर्पाकार सड़कों पर चलाना मुश्किल रहा।

मैदानी इलाकों में भी  किसने हाथी की चिंघाड़ सुनी और किसने नहीं, साईकिल चलते किसी ने देखी या नहीं कुछ पता नहीं। प्रचार में जोर मोदी और राहुल का ही ज्यादा रहा। दलों के समर्थकों के अलावा आम आदमी ने प्रचार में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई।



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