जल-संरक्षण : बनाएं आदत
| - Om Prakash Uniyal - Apr 15 2019 1:06PM

गर्मियों के मौसम में पानी की किल्लत होना आम बात हो गयी है। जमीन का जल-स्तर निरंतर गिरने लगता है यहां तक कि नदियों में भी पानी की कमी अखरने लगती है। पहाड़ों में तो जल-स्त्रोत तक सूख जाते हैं। कई तो धीरे-धीरे विलुप्त हो चुके हैं या होने के कगार पर हैं जिनका पुनर्जीविकरण अत्यावश्यक है।

कुछ  इलाकों में भयंकर सूखा पड़ने से फसलें तबाह हो जाती हैं। पानी हर प्राणी का जीवन आधार है। पानी के बिना जीवन शून्य है। विश्व के कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां  तो पीने योग्य ही नहीं है। पृथ्वी पर पानी की कमी नहीं है। क्योंकि पृथ्वी के तीन हिस्से में पानी ही पानी है। जो कि खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं होता।

हालांकि, यह खारा पानी अनेकों जलीय जीव व वनस्पतियों को जीवन दे रहा है। लेकिन मनुष्य के लिए यह पानी उपयोगी सिद्ध नहीं हो रहा है। मनुष्य के लिए नदियों का ही पानी उपयोगी है। उसे भी मनुष्य पीने के काबिल नहीं छोड़ रहा है।जमकर प्रदूषित करने पर तुला हुआ है।

सवाल यह उठता है कि पानी की बचत कैसे की जाए? अक्सर देखा जाता है कि ज्यादातर लोग पानी की बर्बादी अधिक करते हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं रहता कि यही पानी कईयों को जीवन दे रहा है। किसी दूसरे को भी इसकी जरूरत है।

पानी का उपयोग उतना ही करना चाहिए जितनी आवश्यकता हो। यदि धरा से निरंतर और असीमित मात्रा में पानी का दोहन किया जाता रहेगा तो एक दिन ऐसा आएगा जब पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ेगा। जल-संरक्षण करना हरेक को आदत बनानी होगी। 



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