ऐसे हैं अम्बेडकरनगर के डी.एस.ओ. नीलेश उत्पल
| Rainbow News Network - Apr 16 2019 6:39PM

डी.एस.ओ. नीलेश उत्पल

संवेदनशील व्यक्ति को उसके दायित्वबोध का भान कराने की आवश्यकता नहीं होती। मानव शरीर हाड़-मांस का एक पिण्ड है, जिसमें तरह-तरह की व्याधियाँ भीं अपना प्रभाव दिखाती रहती हैं। शरीर में यदि किसी तरह की व्याधि का संक्रमण हो तो सम्पूर्ण व्यक्तित्व विचलित सा रहता है और कुछ भी अच्छा नहीं लगता साथ ही मनःस्थिति भी असामान्य सी रहती है। ऐसी स्थिति में बहुतेरे तो अवसादग्रस्त हो जाते हैं, परन्तु व्याधियों से लड़ना और उन्हें परास्त करते हुए जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन करना दृढ़ इच्छाशक्ति वाले व्यक्ति की विशेषता होती है। तनावग्रस्त होने के अनेकानेक कारण हो सकते हैं। कोई शारीरिक व्याधि के चलते तो कोई सामाजिक सरोकारों व अन्य दायित्वों के निर्वहन को लेकर अकस्मात व समय-समय पर अप्रत्याशित घटनाक्रमों की वजह से तनावग्रस्त होता रहता है। 

एक ऐसे विद्यावान व सुहृदय व्यक्तित्व के स्वामी जिन पर ऊपर कही गई बातें लागू होती हैं से बीते दिनों एक संक्षिप्त मुलाकात हुई। औपचारिक हाल-चाल का आदान-प्रदान हुआ। इस मुलाकात में हमने उनसे उनके विभागीय कार्यों की प्रगति रिपोर्ट चाही। जिसे तत्परता से उन्होंने उपलब्ध कराया। आश्चर्य हुआ कि लोकतंत्र के महापर्व (लोकसभा आम चुनाव 2019) अवसर पर जब समस्त प्रशासनिक हलके और उसके हाकिम व ओहदेदार अति व्यस्त हैं तब ऐसे में अपने विभागीय दायित्व का निर्वहन करते हुए बड़े ही सहज ढंग से सरकारी अधिकारी ने हमारे द्वारा चाही गई रिपोर्ट उपलब्ध कराई और मौखिक रूप से बहुत कुछ बताया भी। 

जी हाँ यहाँ बात हो रही है उत्तर प्रदेश सूबे के अम्बेडकरनगर जनपद में जिला पूर्ति अधिकारी पद पर नियुक्त नीलेश उत्पल की। गौर वर्ण एवं सामान्य कद-काठी के हंसमुख व मिलनसार व्यक्तित्व के धनी उत्पल यहाँ वर्ष-2017 में डी0एस0ओ0 पद पर तैनात हुए। अपने दो वर्ष के कार्यकाल में जिला पूर्ति अधिकारी नीलेश उत्पल निर्विवाद रूप से अपना दायित्व निर्वहन कर रहे हैं। गरीबों के लिए बनी सरकारी योजना का लाभ पात्रों को शत-प्रतिशत मिले इसको लेकर वह हमेशा चैतन्य रहते हैं। डी.एस.ओ. उत्पल अपने विभाग के अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ मैत्री-भाव रखकर गाँव-गिराँव से लेकर शहरी आबादी में निवास करने वाले गरीब पात्रों को रसद की आपूर्ति कराने के लिए प्रतिबद्ध देखे जाते हैं। 

यह तो रहा उनका विभागीय दायित्व और उसका बोध.......। शारीरिक व्याधियों के बावजूद उत्पल सामाजिक सरोकारों और मानवीय संवेदनाओं के प्रति अपना एक अलग सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। जिस दिन हमारी मुलाकात हुई उसी दिन समय को एक अन्य जिला स्तरीय सरकारी महकमें के मुलाजिम अपने साहब का हुक्म लेकर वहाँ पहुँच गये। बात-चीत के दौरान डी.एस.ओ. नीलेश उत्पल ने कहा कि समाज में यदि किसी से भी कोई कार्य लेना है तो उसको मैत्रीभाव से ही लिया जा सकता है। अच्छे व्यवहार से काफी कुछ हासिल किया जा सकता है। वर्तमान के संदर्भ में यदि किसी व्यक्ति विशेष को यह दर्प है कि वह ही शिक्षित और सर्व गुण सम्पन्न है तो यह उसकी अज्ञानता का परिचायक है। सहज बोलचाल में इसे मूर्खता भी कहा जा सकता है। उनके इस कथन को डी.एस.ओ. चैम्बर में बैठे अन्य लोगों ने भी स्वीकारा, और अपने तरीके से कमेण्ट किया। 

मीडिया के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाले डी.एस.ओ. जब भी मिलते हैं बगैर किसी लाग-लपेट और सहज भाव से अपनी बात साझा करते हैं। उनके इस व्यवहार से ऐसा प्रतीत होता है कि यह व्यक्ति अवश्य ही अन्तर्यामी (दूसरों के मनोभावों को बेहतर समझने वाला) है, वर्ना ऐसी बातें कौन करता है, सभी मीडिया से बचकर अथवा छिपकर निकलना चाहते हैं। लोकतंत्र का महापर्व यानि लोकसभा चुनाव-2019..........समस्त सरकारी अमला चुनाव प्रक्रिया को आरम्भ से लेकर अन्त तक सकुशल सम्पन्न कराने में व्यस्त है। उसी क्रम में नीलेश उत्पल भी................उनके साथ संक्षिप्त बैठक.......... कुछ बातों का आदान-प्रदान.........और फिर औपचारिक इजाजत............निकल आए उनके चैम्बर से इस वादे के साथ कि फिर कभी आपकी चाय और आपके अनुभव.........। -रीता 



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