वन्य-जीव बहुल क्षेत्रों में जंगली जानवरों की सुरक्षा पर सवाल?
| - Om Prakash Uniyal - Apr 24 2019 3:20PM

वन्य जीव बहुल क्षेत्रों के बीच से गुजरती हाई टेंशन लाइन व रेल ट्रैक पर तीव्र गति से दौड़ती रेलगाड़ियां जंगली जानवरों को मौत के घाट उतार रही हैं। अब तक न जाने कितने जानवर जगह-जगह इनकी चपेट में आने से अपनी जिंदगी गंवा चुके हैं। हमेशा बेसुध पड़े विद्युत विभाग और रेलवे विभाग अपनी गलतियां सुधारने के बजाय लापरवाही बरतता रहता है। जंगलों में जंगली जानवर स्वतंत्र रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक विचरण करते रहते हैं। उनके आने-जाने का एक ही रास्ता (काॅरिडोर) होता है।

अक्सर अपने रास्ते में आयी बाधाओं को वे तुरंत भांप लेते हैं और बचने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन कई धोड़ी सी चूक उन पर भारी पड़ जाती है। जंगलों के बीच से गुजरती हाई टेंशन लाईन की तारें कभी क्षतिग्रस्त होने के कारण जमीन या पेड़ों पर गिर जाती हैं, जिनमें करंट दौड़ता रहता है समय पर ठीक न किए जाने के कारण जानवर गलती से चपेट में आ जाते हैं। जिसके कारण वे तड़फ-तड़फ कर दम तोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।

जंगलों में घायलों के तुरंत उपचार एवं सुरक्षा संबंधी साधन नहीं होते। यही हाल रेल ट्रैक्स पर भी होता है। ट्रैक पार करते वक्त तेज गति से आने वाली रेलगाड़ियों का अंदाजा न होने के कारण जानवर अपनी जान गंवा बैठते हैं। उत्तराखंड के राजा जी नेशनल पार्क से के बीच इस प्रकार के हादसे घटते ही रहते हैं। देहरादून से हरिद्वार के बीच एक ही ट्रैक होने के बावजूद भी हाथी जैसे भारी-भरकम जंगली जानवर दुर्घटनाओं का शिकार ज्यादा होते हैं।

जंगली जानवर बहुल क्षेत्रों के बीच से चाहे हाईटेंशन विद्युत लाइन गुजर रही हों या फिर रेल ट्रैक व सड़क इन सब से जानवरों को सुरक्षित रखने के लिए कोई न कोई ठोस व्यवस्था करनी ही होगी। वन्य जीवों की प्राकृतिक मौत की बात अलग है लेकिन मनुष्य की लापरवाही के कारण दुर्गति से मरने वाले जानवर अपने पीछे सुरक्षा का सवाल छोड़ जाते हैं?



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