राजनीत तेरे रंग हजार....
| Santosh Dev Giri - Apr 27 2019 4:22PM

कहते हैं कि राजनीति में सबकुछ जायज है, यानी यहां भूत और भविष्य को नहीं देखा जाता। यदि कुछ देखा जाता है तो वह है वर्तमान। मुलायम और मायावती को ही देखें दोनों एक दूसरे के धुर, कट्टर विरोधी जिनकी राजनीति में चली आ रही अदावत भला कौन भूला होगा, लेकिन यह राजनीति के वर्तमान का असर ही कहा जायेगा कि सत्ता की लालसा ने न केवल दोनों को एक मंच पर ला खड़ा किया, बल्कि अपने धुर विरोधी मुलायम सिंह यादव के लिए बसपा प्रमुख मायावती ने मंच से वोट मांगते हुए उनकी जीत के लिए लोगों से गुजारिश भी किया।

इस पल को देख जनमानस भी अचरज ही नहीं घोर अचरज से भर उठा। खासबात यह रहा है कि मायावती ने इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए कहा  कि 1995 में हुए गेस्ट हाउस की घटना के बाद आप लोगाें के सवाल मुझसे होंगे, लेकिन देशहित में कभी-कभी कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। वह यही नहीं रुकी आगे भी बोली कि देशहित में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ है। मुलायम सिंह यादव ने समाज के हर वर्ग को अपने साथ जोड़ा है। खासकर पिछड़े वर्ग के लोगों को इन्होंने अपने साथ जोड़ा है। वह खुद भी पिछड़े वर्ग के हैं। नरेंद्र मोदी की तरह नकली पिछड़े वर्ग के नहीं हैं।

           दरअसल, सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की 19 अप्रैल 2019 को मैनपुरी में चौथी चुनावी रैली हुई। इस रैली के दौरान 24 साल बाद मायावती और मुलायम सिंह यादव एक मंच पर दिखाई दिए। इसके पहले साल 1993 में मायावती और मुलायम ने मिलकर यूपी में सरकार बनाई थी। बाद में लखनऊ के गेस्ट हाउस कांड के  बाद माया और मुलायम की न केवल राहे जुदा-जुदा हो गई थी,  बल्कि दोनों एक दूसरे के धुर विरोध भी हो गए थे। लेकिन राजनीति के दांव पेंच और सत्ता की लालसा ही कहा जायेगा कि कल तक एक दूसरे को फूंटी आंख भी न देखने वाले आज एक मंच पर आने को विवश हो गए। मायावती ने उत्तर प्रदेश के  बहुचर्चित गेस्ट हाउस कांड को भुलाकर समाजवादी पार्टी के गढ़ मैनपुरी में मुलायम सिंह के लिए वोट मांगने पहुंचीं थी। मंच पर मुलायम सिंह के पहुंचने पर मायावती ने खड़े होकर उनका स्‍वागत किया। रैली को संबोधित करते हुए मुलायम सिंह ने कहा कि मुझे भारी बहुमत से आखिरी बार जीता देना, मायावती जी आई हैं उनका स्वागत है। वो मेरे लिए वोट मांगने आई हैं मैं उनका एहसान कभी नहीं भूलूंगा। मुलायम सिंह ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि बहुत दिनों के बाद हम और मायावती एक मंच पर हैं।

             आपसे कहना चाहते हैं मैनपुरी में आकर हम आपसे विनती करते हैं कि चुनाव में हमें भारी बहुमत से जिता देना। पहले जिताते आए हो, पहले से ज्यादा मतों से जिताना। मुलायम सिंह यादव यही नहीं रूके उन्होंने आगे कहा कि मेरे भाषण आप बहुत सुन चुके हैं, ज्यादा नहीं बोलूंगा। आज महिलाओं का शोषण हो रहा है। बहुत जबर्दस्त तरीके से। इसके लिए हमने लोकसभा में सवाल उठाया। संकल्प लिया कि महिलाओं का शोषण नहीं होने दिया जाएगा। सपा संरक्षक मुलायम सिंह के संबोधन के बाद मायावती ने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि, भीड़ देखकर लग रहा है कि आप लोग मुलायम सिंह यादव जी को रेकॉर्ड मतों से जिताएंगे। मायावती ने कहा कि 1995 में हुए गेस्ट हाउस की घटना के बाद आप लोग के सवाल मुझसे होंगे, 'देशहित में कभी-कभी कठिन फैसले लेने पड़ते हैं। देशहित में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ है। मुलायम सिंह यादव ने समाज के हर वर्ग को अपने साथ जोड़ा है। खासकर पिछड़े वर्ग के लोगों को इन्होंने अपने साथ जोड़ा है। वह खुद भी पिछड़े वर्ग के हैं। श्री नरेंद्र मोदी की तरह नकली पिछड़े वर्ग के नहीं हैं। जैसा कि मायावती ने कहा कि देशहित में कभी-कभी कठिन फैसले लेने पड़ते हैं।

               देशहित में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ है। उनके इस बोल को लेकर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया प्रकट की है। मसलन,  भाजपा केे दलित नेता डा. नंदलाल सरोज कहते हैं कि जो मायावती दलित समाज का भला नहीं कर पाई, वह भला देश के भलाई के लिए वह भी सपा-बसपा के गठबंधन से कैसे व किस प्रकार करना चाह रही हैं। हास्यप्रद प्रतीत हो रहा है। उन्होंने कहा कि दलितो को महज अपना वोट बैंक समझने वाली मायावती ने दलितो का कितना भला किया है? यह उनके और दलितो के विकास को लेकर देखा जा सकता है कि हित किसका और कितना हुआ है। "आज महिलाओं का शोषण हो रहा है"  मुलायम सिंह के इस बोल पर भी लोगों को घोर आश्चर्य हुआ वह इसलिए कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान प्रदेश में जो आराजकता का बोल बाला रहा वह शायद ही कोई भूूूूला होगा। याद होगा इसकेे कुुछ साल पूूव महिलाओं के साथ बढ़ रही घटनाओं पर मुलायम सिंह यादव ने कहा था कि "लड़के हैं गलतियां हो जाया करती है तो क्या उन्हें -----!"

              1995 में यूपी के गेस्ट हाउस में समाजवादी पार्टी के गुंडाे ने मायावती के साथ जो कृत्य किया था वह आज भी लोगों के मानस पटल से उतर नहीं पाया है। आज वही मुलायम सिंह यादव कह रहे कि महिलाओं का शोषण हो रहा है तो सोचना पड़ जा रहा है।  दूसरी ओर मायावती के बोल पर भी आश्चर्य होता है कि राजनीति भी क्या चीज है जिसे जब चाहे, जहां चाहे ला मिलाये। जैसा कि माया और मुलायम को एक मंच पर देख लगने लगा है। पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा का सुफड़ा साफ होने के बाद मायावती को अपना राजनैतिक अस्तित्व समाप्त होता नजर आने लगा था, सो उन्होंने बड़े ही चालाकी से न केवल सपा से मिलकर गठबंधन के बैनरतले लोस चुनाव लड़ने की हामीं भर दी है, अपितु अपने धुर विरोधी मुलायम सिंह यादव की जीत के लिए मैनपुरी में मंच साझा कर उनके लिए वोट मांगते हुए देशहित में सपा-बसपा का गठबंधन हुआ है कहना नहीं भूली। अब यह गठबंधन कितना कारगर साबित होता है और सपा-बसपा के गठबंधन से कितना भला होगा यह तो आने वाला समय ही बतायेगा। 



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