आतंक का खूनी चेहरा
| - Om Prakash Uniyal - Apr 27 2019 4:32PM

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो एवं उसके आसपास के क्षेत्रों में रविवार को हुए आतंकी हमलों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आतंक एक देश के लिए ही नहीं बल्कि हर देश के लिए चुनौती बनता जा रहा है। जो देश आतंक से प्रभावित हैं उनको एकजुट होने की आवश्यकता है वरना आतंकियों की जड़ें जमती ही जाएंगी। आतंकवाद के आगे आतंकवाद प्रभावित देश बौने साबित हो रहे हैं।

आतंकवादी लोगों की जानें लेकर जो भय का माहौल बनाते रहते हैं उससे आम नागरिक अपने आप को असुरक्षित महसूस करता जा रहा है। हर देश आंतरिक सुरक्षा का दावा कर अपने देश के नागरिकों को आश्वस्त करता फिरता है फिर भी आतंकी किसी न किसी तरह सुरक्षा को भेद कर घटना को अंजाम देने में सफल  हो जाते हैं।

आखिर ऐसे कौन से कारण हैं जिनकी वजह से आतंकी हर देश में अपनी घुसपैठ कर देते हैं। इस पर आतंक प्रभावित देशों को गंभीरता से विचार करना पड़ेगा। एक ऐसी रणनीति बनानी होगी जिसमें इनको शह देने वालों पर कड़ी निगाह रखनी होगी।

आतंकी जो पकड़ा भी जाए उसको छुड़वाने के लिए उनके आकाओं की कोई भी शर्त न मानी जाए। जगह-जगह आतंकी ढेर भी किए जा रहे हैं इसके बावजूद उनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। इस पर आतंक प्रभावित देशों को रोक लगानी होगी। ताकि आतंक के खूनी चेहरे का डर खत्म हो सके।



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