एक राष्ट्र, एक एजेंडा, एक आवाज
| Rainbow News - Apr 29 2019 11:25AM

    ये तीन शब्द जब सुननें में आते हैै, मानो दिल में एक नया जोश सा जाग जाता हैै। वो जोश जो सच में, हकीकत में एक वो नेशन यानी कि एक वो राष्ट्र बनाना चाहता हैै जहॉं सिवाये भाईचारे, के और कुछ न हो जहॉं सिवायें प्रेम और उन्नति के कुछ न हो, उस एक राष्ट्र में धर्म और सियासत के नाम पर बात-बात पर लड़ाई की कोई जगह भी न हो। वहीं एक ओर हम एक एजेंडा की बात करते हो, वो एक एजेंडा जो हम सब पर लागू हो जिससे न ही किसी को तकलीफ पहॅुचे न ही किसी को चोट पहॅुचे, वो एजेंडा कैसा होना चाहिए? मेरी नजर से अगर देखा जाये तो देखा जाये तो ये ”एक एजेंडा” कुछ इस तरह का हो जिससे-
    गरीब और अमीर में कोई फर्क न रह जाये। हर गरीब अपने को अमीर समझने लग जाये और उस एजेडें के अंतर्गत गरीब भी अपना हर त्योहार पूरी खुशी के साथ अमीरों की तरह बनाने लग जाये। ”एक एजेंडा” कुछ इस तरह बनना चाहिये जिसमें लोग अपनी मर्जी से अपने शौक से अपने मजहब और धर्म का बेखौफ होकर पालन कर सके। जो हर किसी के हक में सही हो। जिससे किसी को भी ज्यादती या दिली तकलीफ न पहॅुचे। जो किसी भी एक धर्म या एक मजहब या किसी एक समुदाय के लोगों को आगे रखकर न बनाया जाये बल्कि छोटे और बड़ें लोगों में फर्क किये बिना सबको एक समान मानकर बने ताकि हर कोई उस पर चल सकें। वही दूसरी ओर हम बात कर लेते हैै ”एक आवाज” कीः

    ”एक आवाज” जैसा कि हम सब  जानते हैै कि ”एक आवाज” वो एक आवाज वो आवाज हो जिसमें सबकी सहमति हो, जो हर किसी के मन से निकले! वो ”एक आवाज” महज एक लोग या एक धर्म जाति या एक मजहब की ना हो बल्कि वो आवाज हर धर्म, जाति, मजहब, गरीब अमीर, छोटे से लेकर बड़े सभी लोगों की मिलकर एक नई आवाज होनी चाहिए और उस आवाज का नाम ”हिन्दुस्तानी आवाज” होना चाहिए, यकीन मानिये फिर वो ”एक आवाज” सही मानों में राष्ट्र की आवाज़ के लिए होगी, जो आपस में मिलजुलकर रहने की होगी। जो बात-बात पर धर्म और सियासी मामलात पर लडाई झगड़े की बात न कर बल्कि भाईचारे की आवाज होगी।
    जिस आवाज से हर गरीब के दिल को सुकुन हासिल हो, जो हर मज़लूम के जख्म पर मरहम का काम कर सके। भले ही वो होगी ”एक आवाज” लेकिन वो हमारे राष्ट्र हमारे मुल्क की एक ऐसी आवाज होगी, जो लड़कियों के हक के लिए होगी, जो हमारे राष्ट्र को पूरी दुनिया में एक नया परचम बुलंद करने के काबिल बना देगी।
     लेकिन...................
सवाल ये उठता हैे कि क्या ये तीन चीजे कायम हो सकती हैै?
”एक राष्ट्र हकीकत में कायम हो सकता हैै,
क्या ” एक राष्ट्र एक एजेंडा एक आवाज की बात हकीकत में, की जा सकती हैै।
    जहॉ बात बात पर लोग धर्म और सियासी मामलात पर ईट-पत्थर चलाने लग जाये, जहॉं लोग एक दूसरे की कामयाबी न देख सके, जहॉं आपसी दुश्मनों को जानलेवा दुश्मनी बनते देख लगे जहॉं लड़कियों के साथ खिलवाड़ करने से पहले कोई एक बार न सोचे, गरीबो का मजाक बनाना लोगों की शान बन जाये। जहॉं लोग भ्रूण-हत्या की लालसा रखते हो क्या वहॉं एक नेशन एजेंडा, एक आवाज की बात की जा सकती हैै?
    इसी के साथ एक सच ये भी हैै कि अगर ये ख्बाव सच में पूरा हो गया, तो ये एक नेशन, एक एजेंडा, एक आवाज एक ऐसा राष्ट्र कायम कर देगा जहॉं कोई गरीब कभी भूखा नही सोयेगा, जहॉं कोई भू्रण हत्या के बारे में सोचेगा भी नहीं। धर्म और मजहबी मामलात पर आपसी मतभेद कभी नहीं होगी। जहॉं आपसी दुश्मनी कभी जानलेवा दुश्मनी नहीं बनेगी, जहॉं लड़कियॉं बेखौफ होके जी सकेगी।
उनकी इज्जत के साथ खेलवाड़ करने से पहले हर कोई सोचेगा।
    ”लेकिन 100 बात की एक बात हैै”।
‘एक नेशन एक एजेंडा‘ एक आवाज वो चीज़ है,े जो कभी खुद से नहीं बन सकती हैै।
इसके लिए हम सबको मिलकर एक नया कदम उठाना होगा तो आईये मिलकर बनाते हैै।
‘एक वो नेशन‘, एक वो राष्ट्र, जो हर किसी को हो गरीब से लेकर अमीर, हर धर्म के लोगो का हो।
 आईये मिलकर बनाते वो ‘एक एजेंडा‘ जो हर किसी पर लागू हो? छोटे से लेकर बडे हर इंसान पर, जिस पर  लोग पूरी उमंग और ईमानदारी के साथ चल सके।
    आईये मिलकर उठाते हैै वो ‘एक आवाज‘ जो हर उस गरीब की आवाज हो जो भूखा सो जाता हैै। जो हर उस मज़लूम लड़की की हो जिसकेे साथ लोगों ने खिलवाड़ करने से पहले एक बार नहीं सोचा, जो उस मासूम बच्ची को ही जिसे पैदा होने से पहले ही मार दिया जाता हैै, वो आवाज़ जो हर मज़लूम की हो, जो उस मॉं की भी आवाज को जो अपना बेटा सरहदों पर हमेशा के लिये खो देती हो और फिर ये तीन चीजों का मिशन मिलकर हमारे राष्ट्र में एक नये सवेरा लायेगा।

ज़ैनब आक़िल खान
9838740521



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