कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में BSP कैंडिडेट ने छोड़ा चुनावी मैदान
| Rainbow News Network - Apr 30 2019 2:07PM

2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर यूपी के सियासी रण में सपा और आरएलडी के साथ मिलकर चुनावी बिसात बिछाने में जुटी बसपा सुप्रीमो मायावती को तगड़ा झटका लगा है। छत्तीसगढ़ की रायपुर सीट के बाद अब एक और लोकसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी ने कांग्रेस के उम्मीदवार का समर्थन कर दिया है। यही नहीं, बसपा प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल भी हो गए। बात हो रही है, मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट की, जहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता और पश्चिमी यूपी के प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया चुनाव लड़ रहे हैं। गुना सीट पर बसपा उम्मीदवार लोकेंद्र सिंह धाकड़ ने ज्यातिरादित्य का समर्थन करते हुए कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान कर दिया। वहीं, इस मामले को लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस पर तीखी नाराजगी जाहिर की है।

सोमवार को मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट से बसपा प्रत्याशी लोकेंद्र सिंह धाकड़ ने इसी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार ज्योतिरादित्य सिंधिया को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। ज्योतिरादित्य सिंधिया को समर्थन देने के बाद लोकेंद्र सिंह धाकड़ अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल भी हो गए। उन्हें ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ही कांग्रेस की सदस्यता दिलाई। बसपा प्रत्याशी के समर्थन पर कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट करते हुए कहा, 'गुना संसदीय क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी के युवा प्रत्याशी श्री लोकेंद्र सिंह धाकड़ जी ने आज कांग्रेस में शामिल होकर अपना समर्थन हमें दे दिया है, कांग्रेस परिवार में आपका स्वागत है। मुझे पूर्ण विश्वास है की आपके आने से पार्टी और मजबूत होगी।' आपको बता दें कि मध्य प्रदेश की गुना लोकसभा सीट पर छठें चरण में 12 मई को मतदान होगा।

वहीं, इस मामले को लेकर बसपा अध्यक्ष मायावती ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने कांग्रेस पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ट्वीट कर कहा, 'सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग के मामले में कांग्रेस भी बीजेपी से कम नहीं। एमपी की गुना लोकसभा सीट पर बीएसपी उम्मीदवार को कांग्रेस ने डरा-धमकाकर जबर्दस्ती बैठा दिया है किंतु बीएसपी अपने सिंबल पर ही लड़कर इसका जवाब देगी व अब कांग्रेस सरकार को समर्थन जारी रखने पर भी पुनर्विचार करेगी। साथ ही, यूपी में कांग्रेसी नेताओं का यह प्रचार कि बीजेपी भले ही जीत जाए, किंतु बसपा-सपा गठबंधन को नहीं जीतना चाहिए, यह कांग्रेस पार्टी के जातिवादी, संकीर्ण व दोगले चरित्र को दर्शाता है। अतः लोगों का यह मानना सही है कि बीजेपी को केवल हमारा गठबंधन ही हरा सकता है। लोग सावधान रहें।'

आपको बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है, जब कांग्रेस ने मायावती को इस तरह झटका दिया है। इससे पहले हाल ही में छत्तीसगढ़ की रायपुर लोकसभा सीट पर बीएसपी के उम्मीदवार खिलेश्वर कुमार साहू ने कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद दूबे को समर्थन देने का ऐलान करते हुए चुनावी मैदान से अपने कदम पीछे हटा लिए। बसपा उम्मीदवार खिलेश्वर साहू ने कांग्रेस प्रत्याशी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा था, 'लोकसभा का चुनाव लड़ने के लिए ना मेरे पास पर्याप्त फंड है और ना ही कार्यकर्ता। मुझे बहुजन समाज पार्टी की तरफ से भी चुनाव लड़ने के लिए कोई फंड नहीं मिला है। मैं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कामकाज को लेकर काफी खुश हूं और इसलिए मैंने रायपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार प्रमोद दूबे का समर्थन करने का फैसला लिया है।' बसपा ने इस मामले को लेकर कांग्रेस पर खरीद-फरोख्त करने का आरोप लगाया था।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के दो विधायक हैं और उन्होंने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को समर्थन दिया हुआ है। इसके बावजूद मायावती कई मौकों पर खुले तौर पर कांग्रेस पर हमला बोल चुकी हैं। यूपी के महागठबंधन में भी मायावती ने कांग्रेस को जगह नहीं दी थी। हाल ही में यूपी के मैनपुरी में आयोजित महागठबंधन की संयुक्त रैली में मायावती ने अपने भाषण में कहा था कि कांग्रेस और भाजपा दोनों की नीतियों गरीब विरोधी हैं। कांग्रेस की न्याय योजना पर हमला बोलते हुए मायावती ने कहा था कि अगर वो सत्ता में आईं तो हर गरीब को रोजगार देने की व्यवस्था करेंगी। इससे पहले भी मायावती ट्वीट कर कांग्रेस को निशाने पर ले चुकी हैं।



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