पहाड़ों में नहीं थम रहे सड़क हादसे
| - Om Prakash Uniyal - May 2 2019 2:42PM

पहाड़ों में आए दिन सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी होती ही जा रही है। पुलिस और परिवहन विभाग वाहन चालकों द्वारा बरती जा रही लापरवाही व मनमानी पर अंकुश लगाने में नाकामयाब साबित हो रहा है। अक्सर जिस प्रकार से वाहन चालक मैदानी क्षेत्रों में तेज गति से वाहन चलाते हैं, ओवरटेक करते हैं या शराब पीकर वाहन चलाते हैं उसी प्रकार पहाड़ों में भी वाहन चालक वाहन चलाते हैं। कई बार तो पहाड़ी क्षेत्रों के अनुभवी वाहन चालक भी मार खा जाते हैं। पहाड़ी इलाकों में सड़कें काफी घुमावदार, कम चौड़ी, क्षतिग्रस्त, घटिया निर्माण वाली व कच्ची होती हैं। सड़कों के एक तरफ पहाड़ तो दूसरी तरफ गहरी खाईयां होती है। जरा-सी चूक खतरनाक साबित हो जाती है।

वाहनों की सही फिटनेस न होने के बावजूद खटारा वाहन पहाड़ में चलते देखे जा सकते हैं। वाहनों में अचानक आग लगना भी एक समस्या बन गयी है। जो कि सही रख-रखाव न होने के कारण होती है। सीमा से अधिक सवारियां या सामान ढोना भी दुर्घटना का कारण बनता है। मोड़ अधिक होने व अंधे मोड़ों  के कारण या तो आमने-सामने की टक्कर होती है या फिर सीधा खाई में गिरने की संभावना बनती है। चार धाम यात्रा सात मई से आरंभ हो रही है। वाहनों का दबाव बढ़ता है। सरकार की व्यवस्थाएं लचर ही होती हैं। पहाड़ी सड़कों पर लंबे वाहन भी दिखाई देते हैं। जिनके लिए जगह-जगह मोड़ खतरनाक साबित होते हैं। लेकिन इन पर रोक नहीं लगाई जाती। और तो और मौसम भी दुर्घटनाओं को न्यौता देता है।

बर्फबारी से सड़कों पर फिसलन होने से जरा-सी तेज गति सीधा काल के मुंह में पहुंचाती है। बरसात में पहाड़ों से भू-स्खलन होने, बोल्डर गिरने से कई बार दुर्घटना घटती है। पहाड़ों में हर मौसम में पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है।  यात्रा सुरक्षित रहे, किसी प्रकार की अनहोनी न घटे यह तो वाहन चालकों को स्वयं ही सोचना होता है। एक वाहन चालक के साथ कई जिंदगियां जुड़ी रहती हैं। पुलिस व प्रशासन लापरवाही बरतें लेकिन वाहन चालक सचेत रहें।

-ओम प्रकाश उनियाल



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