यह हैं स्वयंभू राष्ट्रवादियों के असली चेहरे
| -Tanveer Jafri - May 8 2019 1:08PM

        सोशल मीडिया पर पिछले दिनों एक वीडियो देखने का मौका मिला। राष्ट्रीय विचार मंच बड़ोदरा के बैनर तले आयोजित एक गोष्ठी में धुर दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाले एक वक्ता अपने भावनात्मक लहजे में उपस्थित लोगों को यह समझा रहे थे कि मुसलमानों को मंत्री बनाना या कोई दूसरा महत्वपूर्ण पद देना कितना खतरनाक साबित हो सकता है। उन्होंने अपने तर्क के पक्ष में मुफ्ती मोह मद सईद के गृहमंत्री होने के दौर की वह घटना सुनाई कि किसी प्रकार उनके गृहमंत्री बनते ही उनकी बेटी डा० रूबिया सईद का अपहरण कश्मीरी आतंकवादियों द्वारा किया गया और किस प्रकार उनकी बेटी की रिहाई के बदले में कई आतंकियों को छोड़ा गया। वक्ता महोदया ने सैफुद्दीन सोज़ तथा गुलाम नबी आज़ाद के परिवार के कुछ लोगों के अपहरण की कुछ कहानियां भी सुनाईं। कुल मिलाकर उपस्थित जनसमूह को वह यही समझाना चाह रहे थे कि उपरोक्त नेताओं ने आतंकवादियों के साथ मिलीभगत से अपने-अपने परिवार के लोगों का जानबूझ कर अपहरण करवाया तथा इसके बदले में अनेक आतंकवादियों की रिहाई का मार्ग प्रशस्त हुआ। यही वक्ता महोदय उपस्थित जनसमूह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश में अवतार के रूप में प्राप्त हुआ एक दूरदृष्टि रखने वाला योग्य तथा देश का उज्जवल भविष्य संवारने वाला नेता भी बता रहे थे और उनके प्रति न केवल जनसमर्थन बल्कि पूरा भावपूर्ण समर्पण भी मांग रहे थे। 
        देश ने मुती मोह मद सईद की पुत्री डा० रूबिया सईद के अपहरण की कहानी तो ज़रूर सुनी होगी परंतु यह बात हरगिज़ नहीं सुनी होगी कि भारत के गृहमंत्री ने स्वयं ही अपनी बेटी का अपहरण आतंकियों से मिलीभगत के साथ करवाया था। पूरे देश में इस समय दक्षिणपंथी विचारधारा के लोगों द्वारा अपनी पूरी ताकत के साथ मुसलमानों के विरुद्ध नफरत फैलाने का एक सुनियोजित षड्यंत्र रचा जा रहा है। किसी भी तरह से उन्हें देश विरोधी तथा आतंकवाद का समर्थक या पाकपरस्त साबित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस प्रकार की मनगढं़त व काल्पनिक कहानियां गढ़ने वालों को मु$ ती मोह मद सईद के रूप में एक कथित 'ग़द्दार गृहमंत्रीÓ तो दिखाई देता है परंतु इन्हें देश को स्वतंत्रता दिलाने हेतु अशफाक उल्ला खां का फांसी पर चढ़ना नज़र नहीं आता। इन स्वयंभू राष्ट्रवादियों को परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद का बलिदान दिखाई नहीं देता। देश की सैन्य रक्षा प्रणाली को अग्रिम पंक्ति में ले जाकर खड़ा करने वाला मिसाईलमैन एपीजे अब्दुल कलाम दिखाई नहीं देता। अंग्रज़ों की खुशामदपरस्ती करने वालों को मालूम होना चाहिए कि देश के स्वतंत्रता संग्राम में 2-4-10 नहीं बल्कि हज़ारों मुसलमानों ने हिंदुओं व सिखों के साथ मिलकर अंग्रेज़ों के विरुद्ध अपनी जान की बाजि़यां लगाई हैं। इतिहास इन कुर्बानियों की अनदेखी नहीं कर सकता। जिस कौम को ग़द्दार तथा देशद्रोही साबित करने की कोशिश दक्षिणपंथियों द्वारा की जा रही है उस कौम से संबंध रखने वाले सैकड़ों शहीदों के नाम इंडिया गेट के पत्थरों पर दर्ज हैं। 
        संघी मानसिकता के उक्त विचारक की बात सुनकर एक सवाल यह पैदा होता है कि जब मुसलमान कौम भरोसे के लायक नहीं और खासतौर पर मु$ ती मोह मद सईद देश के 'ग़द्दार व आतंकी समर्थक' गृहमंत्री थे फिर आखिर उसी मुफ्ती मोह मद सईद व उसकी बेटी महबूबा मुफ्ती के साथ ज मू-कश्मीर में भारतीय जनता पार्टी द्वारा सरकार बनाए जाने का आखिर क्या औचित्य था? क्या वजह थी कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रवक्ता तथा भाजपा के वर्तमान महासचिव राम माधव ने मुफ्ती जैसे उस 'ग़द्दार परिवार' के साथ मिलकर ज मू-कश्मीर में भाजपा व पीडीपी की संयुक्त सरकार बनाई जो अ$फज़ल गुरू को शहीद मानता आ रहा है? कहने को तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुसलमानों के सशक्तिकरण की बात भी करते हैं। यह भी सुना जा चुका है कि वह मुसलमानों के एक हाथ में कुरान तथा दूसरे हाथ में कंप्यूटर देखना चाहते हैं परंतु मुस्लिम सशक्तिकरण के उनके दावे का एक दूसरा पहलू यह भी है कि उनकी पार्टी ने गुजरात में किसी भी मुस्लिम को अपनी पार्टी का उ मीदवार न बनाए जाने का जो प्रयोग किया था उसे अब वे राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू कर चुके हैं। यहां तक कि इस चुनाव में उनके दो चिरपरिचित मुस्लिम चेहरे शाहनवाज़ हुसैन तथा मुतार अब्बास नकवी भी नदारद हो चुके हैं। 
        ठीक इसके विपरीत जिन 'राष्ट्रवादियों' पर यह दक्षिणपंथी शक्तियां अपना विश्वास जता रही हैं तथा जिन चेहरों में इनको वास्तविक राष्ट्रवाद दिखाई दे रहा है उनमें इस चुनाव में अवतरित हुई साध्वी प्रज्ञा ठाकुर भी हैं। इन्हें योगी आदित्यनाथ का 'एडवांस वर्जन' भी कहा जा सकता है। साध्वी के तेवरों तथा इनकी 'दिव्य शक्ति' का अंदाज़ा आतंकवाद विरोधी दस्ते के प्रमुख रहे आईपीएस अधिकारी शहीद हेमंत करकरे के बारे में  दिए गए उस बयान से भी लगाया जा सकता है जिसमें उसने करकरे को कुटिल तथा देशद्रोही बताया था। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने कहा कि 'मैंने हेमंत करकरे से कहा था कि तेरा सर्वनाश होगा'। उसका दावा है कि उसके श्राप दिए जाने की वजह से ही आतंकवादियों ने हेमंत करकरे को मार डाला। साध्वी प्रज्ञा द्वारा दिया गया यह बयान कितना 'राष्ट्रवादी' बयान था इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके इस गैर जि़ मेदाराना एवं अपमान जनक बयान के बाद देश की आईपीएस एसोसिएशन ने इस कथित साध्वी के बयान की घोर भर्त्सना की। एसोसिएशन ने कहा कि-अशोक चक्र हासिल करने वाले दिवंगत पुलिस कर्मी हेमंत करकरे ने आतंकवादियों से लड़ते हुए देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। हम सभी पुलिसकर्मी एक नेता  (साध्वी प्रज्ञा) द्वारा उनके बलिदान का अपमान करने वाले बयान की निंदा करते हैं। एसोसिएशन ने कहा कि शहादत का हर हाल में स मान किया जाना चाहिए'। इतना ही नहीं बल्कि चुनाव आयोग सहित पूरे देश में प्रज्ञा ठाकुर के इस बयान की घोर निंदा की गई। आ$िखरकार उसे अपना बयान यह कहते हुए वापस लेना पड़ा कि यह मेरा निजी बयान था मैं इसे वापस लेती हूं और माफी मांगती हूं। 
        प्रज्ञा ठाकुर का यह बयान अनायास ही दिया गया बयान नहीं था बल्कि दक्षिणपंथियों द्वार हेमंत करकरे की शहादत से लेकर अब तक गुपचुप तरीके से पूरे देश में यही प्रचारित किया जा रहा था जो साध्वी प्रज्ञा द्वारा साफ शब्दों में कहा भी गया। परंतु जब भारतीय जनता पार्टी ने  साध्वी के बयान से अपनी भारी फज़ीहत होते हुए देखी तो पार्टी ने बंद कमरे में बिठाकर साध्वी को न केवल अपना बयान वापस लेने के लिए बाध्य किया बल्कि भविष्य के लिए भी यही समझाया कि वह हिरासत के दौरान अपने ऊपर किए गए कथित ज़ुल्मों व सख्तियों की दास्तान तो जनता को ज़रूर सुनाए परंतु हेमंत करकरे की शहादत पर सवाल सार्वजनिक रूप से न खड़ा करे। साध्वी का आरोप व उसकी माफी जैसी औपचारिकताएं तो अपनी जगह हैं परंतु उसके इस बयान ने निश्चित रूप से दक्षिणपंथी विचारधारा रखने वाले लोगों की वास्तविकता से पर्दा ज़रूर हटा दिया है। हेमंत करकरे को श्राप देने के बयान से करकरे के परिवार सहित पूरे देश के हज़ारों शहीद परिवारों के दिलों पर क्या गुज़री होगी यह इन 'स्वयंभू राष्ट्रवादियों' के बयानों तथा विचारों से साफ ज़ाहिर होता है। रही-सही कसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुत्र्द्ध पर्चा दाखिल करने वाले तेज बहादुर यादव ने पूरी कर दी। आज भले ही तेज बहादुर यादव का पर्चा किन्हीं तकनीकी कारणों से निरस्त क्यों न कर दिया गया हो परंतु वाराणसी की लोकसभा सीट पर नरेंद्र मोदी के विरुद्ध प्रचार करने वाले हज़ारों पूर्व सैनिक इन दक्षिणपंथियों के कथित राष्ट्रवाद के असली चेहरे को बेनकाब करते ज़रूर दिखाई दे रहे हैं।



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