बाल विवाह दण्डनीय अपराध, इससे बचें और इसकी जानकारी दें: सुबोध कुमार सिंह 
| Rainbow News - May 9 2019 4:57PM

देश के संविधान में शादी की उम्र निर्धारित कर दी गई है, जिसमें लड़की की उम्र 18 वर्ष और लड़का की उम्र 21 वर्ष रखी गई है। जो भी इसका उल्लंघन कर अल्पायु अथवा बाल्यावस्था में लड़का, लड़की की शादी (बाल विवाह) कर देता है वह संवैधानिक प्राविधान के तहत दण्ड का भागीदार होता है। देश में हर दिन, हर हफ्ते/महीने/मौसम में कहीं न कहीं शादी-ब्याह जैसे मांगलिक कार्यक्रम चलते रहते हैं। शादी-ब्याह की उम्र पर निगरानी रखने के लिए सरकार द्वारा महत्वपूर्ण विभाग का गठन किया गया है। सूबों के जिलों में नियुक्त जिला स्तरीय जिला प्रोबेशन अधिकारी समाज में शादी-ब्याह और उनमें वर-कन्या की उम्र पर अपनी पैनी दृष्टि रखते हैं। समय-समय पर अपने माध्यम से लोगों को बाल विवाह न करने के लिए जागरूक भी करते हैं। इसके अलावा जो भी कानून का उल्लंघन करता है उसे बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम- 2006 के अन्तर्गत दण्ड का भागीदार बनाया जाता है। 

पिछले दिनों बाल विवाह पर अपनी सजग एवं पैनी दृष्टि रखने वाले सुबोध कुमार सिंह (जिला प्रोबेशन अधिकारी, अम्बेडकरनगर, उ.प्र.) से बात की गई तो उन्होंने बहुत ही सरल एवं स्पष्ट तरीके से बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के बावत जानकारी दिया। 

जिला प्रोबेशन अधिकारी के अनुसार- 

सुबोध कुमार सिंह, जिला प्रोबेशन अधिकारी

समाज के कुछ लोगों द्वारा लड़के और लड़की का विवाह निर्धारित आयु क्रमशः 21 वर्ष एवं 18 वर्ष के पूर्व ही कर दिया जाता है। प्रायः इस प्रकार का विवाह अक्षय तृतीया के अवसर पर होता है, जबकि इस सम्बन्ध में बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम-2006 के अन्तर्गत बाल विवाह होने पर 2 वर्ष की सजा या 1 लाख रूपए का जुर्माना अथवा दोनों का प्राविधान है। 

सिंह ने लोगों से अनुरोध करते हुए कहा कि यदि कहीं भी किसी भी परिवार या संस्था द्वारा बाल विवाह कराये जाने की जानकारी मिले तो इसकी सूचना अविलम्ब रूप से जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय अथवा 181 महिला हेल्पलाइन नम्बर या फिर अपने नजदीकी थाने पर दें। जिससे समय रहते किसी भी लड़का या लड़की का भविष्य गर्त में जाने से बचाया जा सके। 

सुबोध कुमार सिंह ने बताया कि बाल विवाह से सम्बन्धित एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बीते दिनों लोगों से अपील व अनुरोध किया गया था कि अक्षय तृतीया (7 मई 2019) के दिन बाल विवाह ज्यादा होता है ऐसे में यदि कहीं भी बाल विवाह की जानकारी मिले तो उन्हें अवगत कराया जाय या फिर महिला हेल्प लाइन नम्बर 181 अथवा नजदीकी थाने पर इसकी सूचना दी जाए।

परन्तु इस जिले में अक्षय तृतीया अवसर पर इस तरह की कोई घटना संज्ञान में नहीं आई जबकि पूरे जिले में पुलिस, महिला हेल्प लाइन तथा उनका विभाग, कुछ सामाजिक संगठन व अन्य सहयोगी चौकन्ना रहकर निगरानी रखे हुए थे। सुबोध कुमार सिंह ने मीडिया से भी अपेक्षा की है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा की जानकारी होने पर उन्हें अवगत जरूर कराएँ।  



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