ए.डी.आर. मैकेनिज्म एवं प्ली बारगेनिंग विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन    
| Rainbow News - May 9 2019 10:07PM

      अम्बेडकरनगर। उ.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के निर्देशानुसार गुरूवार 9 मई 2019 को जिला कारागार, अयोध्या में ए.डी.आर. मैकेनिज्म एवं प्ली बारगेनिंग विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या में न्यायिक व्यवस्था में मध्यस्थता का महत्व विषय पर विधिक साक्षरता का अयोजन एवं निरीक्षण, तथा महिला शरणालय, अयोध्या में महिलाओं के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण किया गया। इन शिविरों में श्रीमती पूजा विश्वकर्मा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, अशोक कुमार, सिविल जज (सी0डि0) त्वरित, अम्बेडकरनगर, बृजेश कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार अयोध्या, विनय प्रताप सिंह, उप कारापाल, जिला कारागार, अयोध्या, हरिश्याम गुप्ता, केयरटेकर, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या, श्रीमती भारती शुक्ला, सहायक अध्यापिका, महिला शरणालय, श्री इशरतुल्लाह एवं ओमप्रकाश सहित कर्मचारीगण आदि उपस्थित थे।

    शिविर को सम्बोधित करते हुये श्रीमती पूजा विश्वकर्मा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर ने  ए0डी0आर0 मैकेनिज्म एवं प्ली बारगेनिंग विषय पर बोलते हुये कहा कि भारतीय संसद ने दण्ड प्रक्रिया संहिता में संशोधन अधिनियम 2/2006 द्वारा एक नया अध्याय 21(ए) (धारा 265-ए से 265-एल) प्ली बारगेनिंग नामक शीर्षक जोड़कर दांडिक अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपसी सामंजस्य से प्रकरण के निपटारे हेतु न्यायालय के अनुमोदन से एक रास्ता निकालते हैं जिसके तहत अभियुक्त द्वारा अपराध स्वीकृति पर उसे हल्के दण्ड से दण्डित किया जाता है जो अन्यथा कठोर हो सकता है। भारत में प्ली बारगेनिंग का लाभ गंभीर अपराधों में नहीं उठाया जा सकता है। प्ली बारगेनिंग समझौते का एक तरीका है। इसके तहत अभियुक्त कम सजा के बदले में अपने द्वारा किये गये अपराध को स्वीकार करके और पीड़ित व्यक्ति को हुये नुकसान और मुकदमें के दौरान हुये खर्चे की क्षतिपूर्ति करके कठोर सजा से बच सकता है। 

शिविर में बोलते हुये अशोक कुमार, सिविल जज (सी.डि.) त्वरित, अम्बेडकरनगर, ने कहा कि प्ली बारगेनिंग केवल उन अपराधों पर लागू होता है जिनके लिये कानून में सात वर्ष तक सजा का प्राविधान है। पुलिस द्वारा प्रस्तुत रिर्पोट अथवा परिवाद प्रकरण में अभियुक्त प्ली बारगेनिंग हेतु आवेदन प्रस्तुत कर सकता है। यह आवेदन शपथ पत्र द्वारा समर्थित होना चाहिये। अभियुक्त के आवेदन में यह वर्णित होना चाहिये कि उसने अपराध की प्रकृति को एवं दण्ड की सीमा को समझ लिया है और स्वेच्छा से आवेदन पेश कर रहा है। यदि अभियुक्त उसी अपराध में पूर्व में सिद्धदोष हुआ हो तो वह प्ली बारगेनिंग के लिये अयोग्य होगा। आवेदन प्राप्त होने के पश्चात न्यायालय लोक अभियोजक पीड़ित एवं अनुसंधानकर्ता अधिकारी को न्यायालय में उपस्थित रहने के लिये नोटिस जारी करेगा। न्यायालय उक्त पक्षों को आपसी संतोषजनक हल निकालने के लिये समय देगा। 

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुये  बृजेश कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार, अयोध्या ने बताया कि विचाराधीन कैदियों की संख्या को कम करने के उद्देश्य से वर्ष 2006 में दण्ड प्रक्रिया संहिता में एक महत्वपूर्ण संशोधन करके प्ली बारगेनिंग का नया अध्याय जोड़ा गया। इसके तहत सात साल तक की सजा के मामले में आपसी सहमति से मुकदमों का निपटारा करने का विकल्प प्रदान किया गया है। अभियुक्त अपना अपराध स्वीकार करने के एवज में सजा में आधी से अधिक छूट प्राप्त करके रिहा हो सकता है। इन प्राविधानों को व्यवहारिक बना कर विचाराधीन बंदियो की संख्या कम की जा सकती है।
    उक्त शिविर के साथ-साथ जिला सम्प्रेक्षण गृह किशोर अयोध्या में न्यायिक प्रक्रिया में मध्यस्थता का महत्व विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण किया गया तथा न्यायिक प्रक्रिया में मध्यस्थता का महत्व के सम्बन्ध में सचिव महोदया द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त महिला शरणालय अयोध्या में महिलाओं के अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन एवं निरीक्षण किया गया। संवासिनियों को सचिव महोदया द्वारा उपरोक्त विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई।    



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