मानसिक स्वास्थ्य, शिक्षा व मतदान का अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन
| Rainbow News - May 31 2019 5:20PM

        अम्बेडकरनगर। उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ द्वारा प्रेषित प्लॉन आफ एक्शन 2019-20 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर अमरजीत त्रिपाठी के निर्देशानुसार 30 मई 2019 दिन गुरूवार को जिला कारागार, अयोध्या में मानसिक स्वास्थ्य विषय पर, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या में शिक्षा के अधिकार विषय पर, तथा महिला शरणालय, अयोध्या में मतदान का अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इन शिविरों में श्रीमती पूजा विश्वकर्मा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर, धीरेन्द्र, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्टेªट, अम्बेडकरनगर, सुश्री प्रीती भूषण, सिविल जज जू0डि0, टाण्डा, अम्बेडकरनगर, बृजेश कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार अयोध्या, एम0सी0 सरोज, डिप्टी जेलर, जिला कारागार, अयोध्या, विनय प्रताप सिंह, उप कारापाल, जिला कारागार, अयोध्या, हरिश्याम गुप्ता, केयरटेकर, बाल सम्प्रेक्षण गृह, अयोध्या, श्रीमती भारती शुक्ला, प्रभारी अधीक्षिका, महिला शरणालय, अंकुर पाण्डेय एवं ओमप्रकाश सहित कर्मचारीगण आदि उपस्थित थे।

        शिविर को सम्बोधित करते हुये श्रीमती पूजा विश्वकर्मा, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अम्बेडकरनगर ने मानसिक स्वास्थ्य विषय पर बोलते हुये कहा कि मानसिक स्वास्थ्य देश के विकास के लिये अत्यंत महत्वपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू0एच0ओ0) के अनुसार ‘‘रोग या दुर्बलता का उपचार, शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक तरीकों से अच्छी तरह से किया जा रहा है। मानसिक स्वास्थ्य को परिभाषित करते हुये सचिव, महोदय ने बताया कि इससे एक व्यक्ति को अपनी क्षमताओं का पता चलता है, यह आत्मविश्वास आता है कि वे जीवन के तनाव के साथ सामना कर सकते हैं। वर्तमान समय में करोड़ों से भी अधिक लोग मानसिक विकारों से ग्रस्त हैं। (डब्ल्यू0एच0ओ0) के अनुसार ‘‘वर्ष 2020 तक अवसाद विश्व भर में दूसरे सबसे बड़े रोगभार का कारण होगा, शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य एक दूसरे से सम्बन्धित है और यह निःसन्देह रूप से सिद्ध हो चुका है कि अवसाद के कारण हृदय और रक्तवाहिकीय रोग होते हैं। मानसिक विकार व्यक्ति के स्वास्थ्य सम्बन्धी वर्तावों जैसे, समझदारी से भोजन करने, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, सुरक्षित यौन व्यवहार, मद्य और धु्रमपान, चिकित्सीय उपचारों का पालन करने आदि को प्रभावित करते हैं और इस तरह शारीरिक रोग के जोखिम को बढ़ाते हैं। कभी-कभी मानसिक अस्वस्थता के कारण व्यक्ति सामाजिक समस्याएं यथा बेरोजगारी, बिखरे हुये परिवार, गरीबी, नशीले पदार्थों का दुर्व्यसन जैसे बीमारियों के आदी हो जाते हैं। 

        कार्यक्रम को संबोधित करते हुये श्री बृजेश कुमार, जेल अधीक्षक, जिला कारागार, अयोध्या ने मानसिक स्वास्थ्य विषय पर जानकारी देते हुये बताया कि मानसिक स्वास्थ्य से तात्पर्य वैसे अधिगमित व्यवहार से होता है जो सामाजिक रूप से अनुकूल होते हैं एवं जो व्यक्ति को अपनी जिन्दगी के साथ पर्याप्त रूप से सामना करने की अनुमति देता है ‘दूसरे शब्दों में मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति की उस स्थिति की व्याख्या है जिसमें व समाज व स्वयं के जीवन की परिस्थितियों से निपटने के लिये, आवश्यकता अनुरूप स्वयं को ढालने हेतु व्यवहारों को सीखता है। एक अन्य मनोवैज्ञानिक के अनुसार-‘मानसिक स्वास्थ्य अधिकतम प्रसन्नता तथा प्रभावशीलता के साथ संसार एवं प्रत्येक दूसरे व्यक्ति के प्रति मानवों द्वारा किया जाने वाला समायोजन है। मानसिक स्वास्थ्य सिर्फ बीमारियों की अनुपस्थिति का नाम नहीं है। स्वास्थ्य का अर्थ विभिन्न लोगों के लिये अलग-अलग होता है। लेकिन अगर हम एक सार्वभौमिक दृष्टिकोण की बात करें तो अपने आपको स्वस्थ कहने का यह अर्थ होता है कि हम अपने जीवन में आने वाली सभी सामाजिक, शारीरिक और भावनात्मक चुनौतियों का प्रबन्धन करने में सफलतापूर्वक सक्षम हों। 

         उक्त शिविर के साथ-साथ जिला सम्प्रेक्षण गृह किशोर अयोध्या में शिक्षा का अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया तथा शिक्षा का अधिकार के सम्बन्ध में सचिव महोदया द्वारा विस्तृत जानकारी दी गई। इसके अतिरिक्त महिला शरणालय अयोध्या में मतदान का अधिकार विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। संवासिनियों को सचिव महोदया द्वारा उपरोक्त विषय पर विस्तृत जानकारी दी गई।  



Browse By Tags



Other News