प्रियंका माहेश्वरी की काव्य रचना
| -Priyanka Maheshwari - May 31 2019 6:41PM

चाहती हूं कि तुम्हें एक खत लिखूं... 
वो सारी बातें याद दिला दूं...
जो तुमने बड़े भाव से कही थी...
कभी-कभी ही सही...
पर दिल से कही थी....
सोचती हूं खत में सारी शिकायतें भी लिख दूं....
जो मैं अक्सर रूठ कर....
यूं ही बड़बड़या करती थी...
सोचती हूं सारे एहसासों का हिसाब किताब....
भी मांग लूं...
सुना है कि हिसाब किताब में बड़े पक्के हो...
क्यों ना अपनी मोहब्बत का नफा नुकसान भी समझ लूं...


बन कर देखो मौसम...
दे कर देखो...
कभी... तपिश...
दे कर देखो...
कभी... मौन का...
ठंडा एहसास....
देकर देखो...
कभी... वसंत ऋतु की...
मखमली छुअन...
देकर देखो...
कभी... पतझड़ सा..
रीता मन...
देकर देखो...
इंद्रधनुषी रंग...जो..
सपने बिखेरते..
मीत की याद में...
देकर देखो...
कभी बरसात...
प्यार की घटाओं में...
भीगता मन...
देकर देखो न...
कभी...
मौसम की तरह...
बदलता...
हर रंग... जो
भिगो दे...अंतर्मन...



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