कचरे से बनेगी सड़क, दिल्लीवासियों को मिलेगी प्रदूषण से राहत
| Rainbow News - Jun 5 2019 12:20PM

35 वर्षों से पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल साइट पर इकट्ठा हुए 140 लाख टन पुराने कचरे से सड़कों का निर्माण किया जाएगा। वर्तमान में इससे करीब 35 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया जा सकता है, जबकि सालाना यहां इकट्ठा होने वाले करीब चार लाख टन कूड़े से एक किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जा सकती है। इस परियोजना पर पहल से पर्यावरण स्वच्छता में बड़ी मदद मिलेगी। पहले पुराने कूड़े को अलग-अलग किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) सड़कों के निर्माण में करेगी। मिट्टी की तरह दिखने वाले पुराने कचरे को लिगेसी वेस्ट नाम दिया गया है।

गाजीपुर लैंडफिल साइट की ऊंचाई बढ़कर 65 मीटर हो चुकी है। बढ़ती ऊंचाई के कारण प्रदूषण और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ रही है। इस परियोजना के लिए पूर्वी दिल्ली नगर निगम व एनएचएआई के बीच करार हो चुका है। 10 जून को इस कचरे के ढेर को अलग-अलग करने के लिए टेंडर जारी होगा, ताकि दिल्ली के पर्यावरण संरक्षण और लोगों के लिए परेशानी बन चुके इस लैंडफिल साइट की ऊंचाई कम की जा सके। एनएचएआई लिगेसी वेस्ट का इस्तेमाल गड्ढों को भरने और सड़क निर्माण में करेगा।

फिर मंडरा रहा है हादसे का खतरा 

1984 में गाजीपुर लैंडफिल साइट को तैयार किया गया। इसके बाद से पूर्वी दिल्ली के घरों में पैदा होने वाला कचरा यहां फेंका जाने लगा। धीरे-धीरे कचरे के ढेर की ऊंचाई बढ़ती गई। वर्तमान में कूड़े का ढेर बढ़ने के साथ ही हादसों की आशंका भी बढ़ गई है। पूर्व में भी यहां दो लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद मंत्रालय, एनएचएआई और एमसीडी के बीच करार किया गया, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि 2002 से इसे बंद करने की मांग की जाती रही है, लेकिन अब तक इस साइट के कारण होने वाली परेशानियों को दूर नहीं किया जा सका। यदि 2020 तक गाजीपुर में कूड़े का ढेर नहीं हटाया गया तो साइट पर फिर कोई बड़ा हादसा हो सकता है। बारिश के दिनों में यह खतरा और बढ़ जाता है। 

आएगा 1000 करोड़ से अधिक का खर्च 

सड़क निर्माण में इस्तेमाल करने से पहले कचरे को अलग-अलग किया जाएगा। इनमें इस्तेमाल योग्य उत्पादों एनएचएआई को दिए जाएंगे, जबकि प्लास्टिक, कांच और मेटल के अलावा दूसरी तरह का कचरा एमसीडी को सौंप दिया जाएगा, ताकि इसका दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। अनुमान है कि लिगेसी वेस्ट को अलग करने पर करीब 1000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च आएगा। इसे देखते हुए एजेंसियां पहल करने में देरी कर रही हैं।



Browse By Tags



Other News